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बच्चों को ट्यूशन भेजकर उनका नुकसान कर रहे हैं आप: यूनेस्को रिपोर्ट

3rd Nov 2017
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यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट में भारतीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कुछ खामियां बताई गईं हैं। इस रिपोर्ट में ट्यूशन को भारतीय शिक्षा के लिए नुकसानदायक बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट ट्यूशन छात्रों पर पढ़ाई का बोझ और तनाव बढ़ाते हैं।

साभार: लिंक्डइन

साभार: लिंक्डइन


ट्यूशन में खर्च होने वाले पैसों छात्रों की देखभाल को कमजोर करते हैं और इससे घर का बजट भी प्रभावित होता है। यह रिपोर्ट भारतीय शिक्षा में बढ़ती असमानता को दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट ट्यूशन का प्रचलन शहरी इलाकों के समृद्ध परिवारों में हैं।

उच्च शिक्षा में अभी भी बहुत बड़ा फर्क दिखता है। बेहतरीन गुणवत्ता वाले संस्थानों तक पहुंचने में भी बहुत फासला है और भारत में ये शिक्षा के लिए भुगतान करने की क्षमता पर निर्भर है। रिपोर्ट बताती है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जांच परीक्षाओं के जरिये कमजोर बच्चों की क्षमता को आंका जाता है। ये बच्चों के सीखने पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और उन्हे अपमान के तौर पर दंडित करता है। 

यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट में भारतीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कुछ खामियां बताई गईं हैं। इस रिपोर्ट में ट्यूशन को भारतीय शिक्षा के लिए नुकसानदायक बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट ट्यूशन छात्रों पर पढ़ाई का बोझ और तनाव बढ़ाते हैं। हालांकि व्यक्तिगत सहायता से छात्रों को इसका फायदा हो सकता है। ट्यूशन में खर्च होने वाले पैसों छात्रों की देखभाल को कमजोर करते हैं और इससे घर का बजट भी प्रभावित होता है। यह रिपोर्ट भारतीय शिक्षा में बढ़ती असमानता को दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट ट्यूशन का प्रचलन शहरी इलाकों के समृद्ध परिवारों में हैं।

आर्थिक विषमता का शिक्षा पर असर-

उच्च शिक्षा में अभी भी बहुत बड़ा फर्क दिखता है। बेहतरीन गुणवत्ता वाले संस्थानों तक पहुंचने में भी बहुत फासला है और भारत में ये शिक्षा के लिए भुगतान करने की क्षमता पर निर्भर है। रिपोर्ट बताती है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि जांच परीक्षाओं के जरिये कमजोर बच्चों की क्षमता को आंका जाता है। ये बच्चों के सीखने पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और उन्हे अपमान के तौर पर दंडित करता है। रिपोर्ट बताती है कि स्कूलों में होने वाली जांच विद्यार्थियों के लिए तनाव पैदा करती है। और उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को तोड़ देती है। इंडियन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2015 में 2,672 छात्रों ने परीक्षा में फेल होने के बाद आत्महत्या कर ली।

ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था की हालत पस्त-

यह रिपोर्ट कुछ और निष्कर्षों को बताती है, साल 2010 में 1297 गावों के एक प्रतिनिधि पैनल ने पाया कि भारत में प्राय: ग्रामीण इलाकों के 24 फीसदी शिक्षक बिना बताये गायब थे। दूसरे अध्ययन में 6 राज्यों के 619 स्कूलों में 18.5 फिसदी शिक्षिक गैरहाजिर थे। 9 फिसदी छुट्टी पर थे, 7 फीसदी ड्यूटी पर थे और 2.5 फिसदी अनाधिकृत रूप से गायब थे। प्रभावी पॉलिसी में इतनी जटिलताएं है जो शिक्षकों के गैरहाजिरी की वजह बन रही है। जैसे कि स्कूल की दूरी, छात्रों-शिक्षकों का अनुपात और काम करने के बदतर हालात। जिन देशों में शिक्षकों में भरोसे की कमी, वहां प्राय: शिक्षकों की कमी भी महसूस की जा रही है। ऐसी हालत ठेका शिक्षा को बढ़ावा मिला।

क्या बदलेंगे ये हालात?

निश्चित अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट भारत में तेजी से बढ़े और सब सहारा अफ्रीका के हिस्सों में भी, जहां नौजवान, कम प्रशिक्षण वाले, कम वेतन वाले शिक्षक रखे गये और वो बेहद पिछड़े इलाकों में पढ़ाते हैं। भारत का आकाश टैबलेट एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनर्शिप प्रोजेक्ट था जो अपर्याप्त सरकारी सहयोग की वजह से बेचने वालों को फायदा पहुंचा कर समाप्त हुआ। 2010 के इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सभी छात्रों को सस्ता टैबलेट मुहैया कराना था, जबकि कुछ ही छात्रों को सस्ते दर पर टैबलेट मिल सका। डाटाविंड इसमें सबसे ज्यादा फायदे में रही।

साल 1993 में के लिए शिक्षा के उदेश्य से E-9 देशों का समूह बना। जिसे साल 2017 में जीवन का नया लगाम मिल गया। 9 कम और मध्यम आय वाले ये देश, दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी के लिए, यूनेस्को के सतत विकास लक्ष्य-4 को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अभी तक बांग्लादेश, चीन, भारत, नाइजीरिया और पाकिस्तान शिक्षा के वैश्विक सूचकांक 4.1.1 पर कोई रिपोर्ट नहीं करते।

ये भी पढ़ें: बटाईदार किसानों की व्यथा कौन सुनेगा !

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