मिलिए डॉ. हिमांगी भारद्वाज से, जो इस साल MBE प्राप्त करने वाली दो भारतीय महिलाओं में से एक हैं

ब्रिटिश उच्चायोग में एक वरिष्ठ स्वास्थ्य और नीति सलाहकार डॉ. हिमांगी भारद्वाज को 2021 के लिए ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (MBE) से नवाजा गया है।

मिलिए डॉ. हिमांगी भारद्वाज से, जो इस साल MBE प्राप्त करने वाली दो भारतीय महिलाओं में से एक हैं

Wednesday June 16, 2021,

4 min Read

ब्रिटिश उच्चायोग में वरिष्ठ स्वास्थ्य और नीति सलाहकार डॉ. हिमांगी भारद्वाज को 2021 के लिए ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (एमबीई) के सम्मान से नवाजा गया है। ये अवॉर्ड हासिल करने वाली दो भारतीय महिलाओं में से हिमांगी एक हैं। महामहिम महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान भारत और यूके में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉ. हिमांगी के काम की प्रशंसा में है।

डॉ. हिमांगी भारद्वाज

डॉ. हिमांगी भारद्वाज

डॉ. हिमांगी भारद्वाज ने 12 जून को महारानी एलिज़ाबेथ के जन्मदिन पर यह सम्मान प्राप्त किया। MBE एक ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर अवार्ड है। यह तीसरा सर्वोच्च रैंकिंग ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर अवार्ड है, जो किसी खास व्यक्ति को तब दिया जाता है जब वो अपने काम के जरिए लोगों पर पॉजिटिव इंपैक्ट डालता है और लोगों के लिए प्रेरणा बनता है। यह अवॉर्ड कला और विज्ञान में योगदान और सिविल सेवा के बाहर धर्मार्थ और कल्याणकारी संगठनों और सार्वजनिक सेवा के साथ काम करने वाले लोगों को पुरस्कृत करता है।


डॉ. हिमांगी भारद्वाज ने YourStory को बताया,

"यह मेरे जीवन के सबसे बड़े क्षणों में से एक है। मैं अपने काम को लेकर इस स्तर की पहचान पाने के लिए अविश्वसनीय रूप से गौरवान्वित प्राप्त और सम्मानित महसूस कर रही हूं। यह बहुत अच्छा अहसास है और ब्रिटिश उच्चायोग में बिताए नौ वर्षों की वास्तव में अच्छी परिणति है।”


एक सेना अधिकारी की बेटी के रूप में, उन्होंने देश की खूब यात्रा की, केंद्रीय विद्यालयों में स्कूली शिक्षा प्राप्त की और देश में स्वास्थ्य प्रणालियों को भी करीब से देखा। सिकंदराबाद के आर्मी कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज से डेंटल सर्जरी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से पब्लिक हेल्थ में मास्टर्स की पढ़ाई की, जिससे उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्व का एहसास हुआ।


वह कहती हैं,

"मैंने स्वास्थ्य के महत्व को एक अधिकार के रूप में समझना शुरू कर दिया, और सिस्टम के साथ मिलकर काम किया। मैंने ग्रामीण महाराष्ट्र में काम किया, और इसने मुझे सामुदायिक स्वास्थ्य के काम करने के तरीके और स्वास्थ्य का सामुदायिक स्वामित्व कैसे महत्वपूर्ण है, के करीब लाया।”


डॉ. हिमांगी 2012 में ब्रिटिश उच्चायोग में शामिल हुईं। वह वरिष्ठ स्वास्थ्य और नीति सलाहकार के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बताते हुए कहती हैं:

“मेरी भूमिका पॉलिसी साइड पर भारत और यूके के बीच सहयोग को विकसित करने पर केंद्रित है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हम स्वास्थ्य पर ऐसे संयुक्त कार्यक्रमों और परियोजनाओं को लागू करें जो हमारे दोनों उद्देश्यों को पूरा करती हों और उन क्षेत्रों को कवर करें जो दोनों देशों के लिए वास्तविक महत्व के हैं।"


इन पहलों में मेडिकल एजुकेशन और ट्रेनिंग, नर्सिंग, हेल्थ और लाइफ साइंस पर सभी सरकार से सरकार की भागीदारी का नेतृत्व करना और ट्रेड, कॉमर्स, रिसर्च और इनोवेशन से टीम के सदस्यों के साथ काम करना शामिल है।


वह कहती हैं,

"2013 में जिनेवा में हेल्थ और लाइफ साइंस पर दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर एक प्रमुख पहल थी। इसके अलावा, दो दवा नियामकों, एमएचआरए और सीडीएससीओ के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। हमने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काफी काम किया है।"


डॉ. हिमांगी का कहना है कि लिंग नीति पर ध्यान केंद्रित करना उनके काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


वह कहती हैं,

"लचीलेपन और महिलाओं पर मजबूत फोकस से मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत फायदा हुआ है। जब मैं यहां काम कर रही थी, तब मेरी बेटी हुई और जब बात मातृ स्वास्थ्य और देखभाल की आई तो मुझे पूरा सहयोग मिला। हम इस लिंग-आधारित नीति को अपनी सभी परियोजनाओं और कार्यक्रमों में भी विस्तारित करने का प्रयास करते हैं।”


डॉ. हिमांगी उस क्राइसिस टीम का भी हिस्सा हैं, जो तब बनी थी जब COVID-19 महामारी ने दुनिया को प्रभावित किया था। इस पर विस्तार से बताते हुए, वह कहती हैं, “पिछले साल गठित क्राइसिस टीम में राजनयिकों के साथ-साथ देश-आधारित कर्मचारियों की एक बड़ी आबादी भी शामिल थी। हमने COVID-19 विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित किया है और इस पर भारत सरकार के साथ मिलकर काम किया है। हमने कर्मचारियों के कल्याण, प्रत्यावर्तन और टीकाकरण पर एक साथ काम किया है।"


आगे बढ़ते हुए, उनका मानना है कि स्वास्थ्य भारत और यूके दोनों के लिए काम के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बना रहेगा।


वह बताती हैं,

“महामारी ने दिखाया है कि यह कुछ ऐसा है जिस पर दुनिया को ध्यान केंद्रित करने, इससे सीखने और अधिक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की आवश्यकता है। ज्ञान और सीखने के आपसी आदान-प्रदान से दोनों देशों को लाभ होगा।”


एमबीई प्राप्त करने वाली अन्य भारतीय महिला चंडीगढ़ में ब्रिटिश उप उच्चायोग में कांसुलर अधिकारी मोहिनी सिंह हैं।


Edited by Ranjana Tripathi