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'आँकड़ों का गाँव', एक बीपीओ ऐसा, जिसे चलाती हैं सिर्फ गांव की महिलाएं...

“ग्रामीण युवतियों का उत्साह और उनकी सीखने की ललक देखते ही बनती है और वही हमें इस काम में लगे रहने के लिए उत्प्रेरित करती हैं और भरोसा दिलाती हैं कि हम एक सही व्यवसाय कर रहे हैं।"

Ajit Harshe
13th Jul 2015
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पिछले दिनों कंपनी बिल पास हो जाने के बाद सामाजिक उद्यमिता व्यवसाय को कार्पोरेट जगत की ओर से अधिक सहयोग की आशा है। कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समूह (CSR) की गतिविधियाँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक उद्यमिता व्यवसाय को प्रभावित करेंगी। एक ग्रामीण बी पी ओ, डेटाहल्ली (Datahalli) को परियोजना के रूप में एक व्यावसायिक कार्पोरेशन द्वारा प्रारम्भ किया था, जो अब अपने पैरों पर खड़ा एक स्वयंधारी (self sustained) सामाजिक उपक्रम (एंटरप्राइज) है। इसे जे एस डब्ल्यू फाउंडेशन द्वारा प्रारम्भ किया गया था और विजयनगर, बेल्लारी में सिर्फ महिलाओं द्वारा परिचालित पहला ग्रामीण बी पी ओ है। कन्नड में इसका अर्थ हुआ 'आँकड़ों का गांव'!

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जे एस डब्ल्यू फाउंडेशन के कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी एस आर) कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में 2005 में ‘डेटाहल्ली’ (Datahalli) इस विचार के साथ स्थापित किया गया था कि वह समाज को कुछ प्रतिदान दे सके, ख़ास तौर पर महिलाओं को। उसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की शिक्षित लड़कियों की अंतर्निहित क्षमता को बाहर निकालकर और उसका उपयोग गाँवों की गरीबी हटाने और महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक कार्यों में करना है। बी पी ओ की स्थापना से पहले, समुचित शिक्षा और दक्षता प्राप्त ग्रामीण लड़कियाँ भी या तो घर के काम-काज में लग जाती थीं या उनकी शादी कर दी जाती थीं।

डेटाहल्ली (Datahalli) की अधिक जानकारी के लिए हम कर्मेश घोष से मिले, जो कि जे एस डब्ल्यू समूह के सूचना प्राद्योगिकी विभाग द्वारा बी पी ओ संबंधी पहल हेतु स्थापित एक भाग, जे सॉफ्ट (JSoft) के व्यापार विकास कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं।

सन् 2005 से अब तक, डेटाहल्ली के 2 वितरण केंद्र अस्तित्व में आ चुके हैं-एक केवल स्वर आधारित परियोजनाओं को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है और दूसरा मिश्रित परियोजनाओं को। डेटाहल्ली के इन दो केन्द्रों में आज लगभग 300 महिलाएँ कार्यरत हैं। एक भारतीय बैंक के लिए चेकों की प्रोसेसिंग से शुरू करते हुए और फिर xml/html कोडिंग, अंतर्गामी ग्राहक सेवा (inbound customer services) और गैर सरकारी संस्थाओं की निधियाँ इकट्ठा करने के लिए स्थापित निर्गामी (outbound tele-sales) परियोजनाओं के लिए काम करते हुए डेटाहल्ली आज बहुत आगे बढ़ चुका है।

बी पी ओ कर्मचारियों के घरों में आर्थिक और सामाजिक स्तर पर इसका सीधा और त्वरित प्रभाव दिखाई दे रहा है। सूचना प्राद्योगिकी संबंधित सेवाओं में कार्यरत लोगों में आत्मसम्मान और गर्व की भावना भी विकसित हुई है। डेटाहल्ली (Datahalli) लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है क्योंकि विवाह उपरांत किसी दूसरी जगह जाकर भी वे लड़कियाँ कहीं भी बी पी ओ से संबंधित नौकरियाँ पा सकती हैं।

सिर्फ यही तथ्य कि आज ये लड़कियाँ अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों से फोन पर वार्तालाप करती हैं, उनकी समस्याओं का समाधान करती हैं और विदेशी ग्राहकों को संभाल पाती हैं, उस असर की कहानी कहता है, जो डेटाहल्ली (datahalli) के चलते निर्मित हुआ है। अपने आर्थिक विकास के लिए ग्रामीण लड़कियों को तैयार करने और उन्हें देश की विकास-मशीनरी के पुर्ज़े के रूप में ढालने में हम कामयाब हुए हैं और आज वे एक ऐसी सर्वमान्य शक्ति के रूप में उभर चुकी हैं, जिनके साथ ग्राहक व्यापार करने के लिए सदा तैयार रहते हैं।

वर्त्तमान में ग्रामीण बी पी ओ मॉडल न सिर्फ बाज़ार में अच्छी तरह स्वीकार्य हो चुका है बल्कि उनसे समाज के विभिन्न तबकों को भी बड़ी आशाएँ और अपेक्षाएँ हैं। नौकरीपेशा लड़कियाँ और उनके माता-पिता एक आत्मसम्मान युक्त ज़िन्दगी और सुरक्षित और बेहतर आजीविका पाकर गर्व से फूले नहीं समाते। व्यवसाय के दृष्टिकोण से भी ग्रामीण बी पी ओ को एक सोची-समझी और दूरदर्शी व्यापारिक पहल के रूप में देखा जाता है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और बदलते शहरी ढाँचे को देखते हुए दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में पैर फैलाना चतुराई पूर्ण और समझदार व्यापारिक कदम ही कहा जाएगा, जो कंपनियों को न सिर्फ अस्तित्व में बने रहने बल्कि संघटित रूप से (organically) विकसित होने में मददगार साबित होगा।

"जब हम नए कर्मचारियों की भर्ती करते हैं तो ग्रामीण युवतियों का उत्साह और उनकी सीखने की ललक देखते ही बनती है और वही हमें इस काम में लगे रहने के लिए उत्प्रेरित करती हैं और भरोसा दिलाती हैं कि हम एक सही व्यवसाय कर रहे हैं। कुल मिलाकर, उद्योग के नज़रिए से भी यह सबके लिए हितकारी उपक्रम है। ग्रामीण जनता को रोज़गार के लिए बाहर नहीं निकलना पड़ता और उद्योग को अपनी परियोजनाओं के लिए किफायती श्रमिक मिल जाते हैं," कर्मेश कहते हैं।

डेटाहल्ली (datahalli) इसी मॉडल को दूसरे कई गाँवों में भी लागू करना चाहता है, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की ज़िन्दगियों में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके और जो इस काम में आगे आना चाहते हैं, उनके साथ संपर्क और सलाह-मशविरा करके आपसी सहयोग से इस काम को और आगे ले जाना चाहता है। डेटाहल्ली (datahalli) के सामने सबसे बड़ी रुकावट तब पैदा होती है जब वे उच्च दर्जे की परियोजनाओं में काम करने का प्रयास करते हैं। व्यवसायी अपने कामों के लिए कम से कम समय देना चाहते हैं और तब ग्रामीण इलाकों की लड़कियाँ हाथ खड़े कर देती हैं क्योंकि उन्हें आवश्यक दक्षता प्राप्त करने के लिए समय और संसाधनों की ज़रूरत होती है। यहीं आकर शहरी बी पी ओ ग्रामीण बी पी ओ पर बीस साबित होते हैं। मूल्य चेन (value chain ) में ऊपर आने और कर्मचारियों को नई दक्षता श्रेणियों (skill set) से लैस करते हुए बेहतर और जटिल परियोजनाएँ हासिल करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की दक्षता के विस्तार के लिए डेटाहल्ली (datahalli) लगातार पूंजी निवेश कर रहा है, जिससे उनका बी पी ओ जल्द से जल्द के पी ओ में रूपांतरित हो सके।

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