संस्करणों
विविध

मुस्लिम से शादी के बाद सोशल बायकॉट झेल रहे हिरनवाले ने नए कानून के तहत कराई एफआईआर

19th Oct 2017
Add to
Shares
126
Comments
Share This
Add to
Shares
126
Comments
Share

पुणे के लश्कर पुलिस स्टेशन में 61 साल के रमेश दत्तू हिरनवाले ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिनका आरोप है कि उन्हें सोशल बायकॉट झेलना पड़ा था। वीरशिव लिंगायत गावली समुदाय ने तब से हुक्का पानी कर दिया है जब 1992 में उन्होंने एक मुस्लिम लड़की से ब्याह रचाया था। इस प्राथमिकी पर एक्शन लेते हुए पुलिस ने 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

शमशुन्निसा खान के साथ हिरनवाले, साभार: इंडियन एक्सप्रेस

शमशुन्निसा खान के साथ हिरनवाले, साभार: इंडियन एक्सप्रेस


रमेश ने पिछले साल सितंबर में पुलिस से संपर्क किया था। अपने मामले में पंचायत के खिलाफ शिकायत दर्ज की। लेकिन फिर भी उनकी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। हालांकि, महाराष्ट्र अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) के बाद कुछ दिनों पहले स्थिति बदली।

इसके अतिरिक्त, अब एक नया कानून, सामाजिक संरक्षण (निवारण, निषेध और निवारण) अधिनियम, जो कि 13 जुलाई, 2017 को लागू हुआ है। इस वजह से इस तरह का सोशल बायकॉट झेल रहे लोग सशक्त हुए हैं।

पुणे के लश्कर पुलिस स्टेशन में 61 साल के रमेश दत्तू हिरनवाले ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिनका आरोप है कि उन्हें सोशल बायकॉट झेलना पड़ा था। वीरशिव लिंगायत गावली समुदाय ने तब से हुक्का पानी कर दिया है जब 1992 में उन्होंने एक मुस्लिम लड़की से ब्याह रचाया था। इस प्राथमिकी पर एक्शन लेते हुए पुलिस ने 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। ये बीसों हिरनवाले समुदाय की जाति पंचायत के सदस्य हैं। महाराष्ट्र के एक नए कानून के मुताबिक, जनता इस तरह के सोशल बायकॉट से खुद की रक्षा कर सकती है।

हिरनवाले ने 48 वर्षीय अरुण किसान नायकुनजी की आत्महत्या के बाद चुप न रहने का फैसला किया। अरुण पिछले साल अगस्त तक हिरनवाला समुदाय के थे। जाति के पंचायत द्वारा इसी तरह के उत्पीड़न के कारण वो काफी परेशान रहते थे। अरुण के भाई ने आरोप लगाया था कि जाति के पंचायत ने बहिष्कार का आदेश दिया था क्योंकि उन्होंने किसी दूसरी जाति से महिला से शादी करने में मदद की थी।

क्या है ये कानून-

हिरनवाले ने कहा कि उन्होंने अरुण की मौत के तुरंत बाद पिछले साल सितंबर में पुलिस से संपर्क किया था। अपने मामले में पंचायत के खिलाफ शिकायत दर्ज की। लेकिन फिर भी उनकी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। हालांकि, महाराष्ट्र अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) के बाद कुछ दिनों पहले स्थिति बदली। जब मार डाले गए बुद्धवादी नरेन्द्र दाभोलकर द्वारा स्थापित एक संगठन ने अंधविश्वासी प्रथाओं से लड़ते हुए हिरणवाले के मामले को लेने का फैसला किया था। इसके अतिरिक्त, अब एक नया कानून, सामाजिक संरक्षण (निवारण, निषेध और निवारण) अधिनियम, जो कि 13 जुलाई, 2017 को लागू हुआ है। इस वजह से इस तरह का सोशल बायकॉट झेल रहे लोग सशक्त हुए हैं।

हिरनवाले ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि उन्होंने पड़ोस में रहने वाली शमशुन्निसा खान से मुहब्बत थी। 19 जून 1992 को दोनों ने शादी कर ली थी। अपनी शिकायत में, हिरणवाले ने कहा कि उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत भी नहीं दी गई थी और दिसंबर 2016 में मेरी भतीजी की सगाई समारोह से भी दूर रहने के लिए कहा गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ जाति के पंचायत सदस्यों ने सामाजिक बहिष्कार हटाने के लिए उनके पास से पैसे मांगते हैं।

जाति पंचायत ने पार की हदें-

हिरनवाले आगे कहते हैं, पंचायत वालों ने मेरा बहिष्कार कर दिया था। मैंने उनसे कई बार माफी मांगी लेकिन वो नहीं माने। मुझे मेरे ही घर से दूर कर दिया गया। यहां तक कि मुझे एक हिंदू महिला से विवाह करने को मजबूर किया गया और ये आश्वासन दिया गया कि इसके बाद ही उनका सामाजिक बहिष्कार समाप्त होगा। मैंने वो शादी भी कर ली लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे बहिष्कृत ही रखा।

हारकर मैं शमशुन्निसा के वापस चला आया। उसने मुझे उस हाल में भी स्वीकार किया और मेरे समर्थन में खड़ी रही। मुझे उसके परिवार द्वारा भी स्वीकार किया गया था। वे अपने मुस्लिम रिश्तेदारों की शादी के कार्ड पर अपना नाम जोड़कर मुझे सम्मान देते हैं। मुझे अपने स्वयं के समुदाय द्वारा इसी तरह के व्यवहार की याद आती है। मैं अपने पैतृक घर पर जाकर अपने रिश्तेदारों से मिलना चाहता हूं। वे मुझसे नफरत नहीं करते लेकिन वे जाति पंचायत के दबाव के कारण दूरी बनाए रखने के लिए मजबूर हैं।

ये भी पढ़ें: रिजर्व बैंक की नई गाइडलाइंस के बाद पेटीएम करेगा 10,000 लोगों की भर्ती

Add to
Shares
126
Comments
Share This
Add to
Shares
126
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें