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मादक दवाओं से चाहिए छुटकारा तो घुटना प्रत्योरपण के बाद एक्युपंक्चर और इलेक्ट्रोथेरेपी है इलाज

27th Sep 2017
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दर्द को नियंत्रण करने के लिए अप्रचलित तरीके गहरा प्रभाव डालते हैं। पुराने दर्द दर्द निवारण के लिए सस्ते तरीके और मादक दवाईयों का सेवन बहुत लम्बे समय तक असर डालता है। जिससे बाद में इनका आदि न जाना पड़ता है। ये आदतें संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में एक महामारी बनती जा रही हैं। घुटने की प्रत्यरोपण के बाद दर्द को कम करने के लिए गैर-चिकित्सात्मक उपचार में दिलचस्पी बढ़ जाती है।

साभार: सोशल मीडिया

साभार: सोशल मीडिया


शोधकर्ताओं ने 39 बेतरतीब चिकित्सालय को चिन्हित किया और इसमें 2,391 मरीजों पर इसका शोध किया। इनमें निरंतर निष्क्रिय गति, एक्सरसाइज, क्रायोथेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी, और एक्युपंक्चर जैसे शोध शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इस बात का मध्यम प्रमाण पाया कि इलेक्ट्रोथेरेपी और एक्युपंक्चर पुराने दर्द पर ज्यादा प्रभावी हैं और दवाओं के सेवन की आदत को कम करते हैं।

तकरीबन 18000 लोगों पर अब तक हुए 29 शोधों में भी कई तथ्य निकलकर सामने आए हैं। जैसे कई हफ्ते तक पेन किलर लेने के बाद दर्द में 50 फीसदी राहत मिलती है, वहीं एक्यूपंक्चर एक बार में ही 50 फीसदी आराम दिलाता है।

दर्द को नियंत्रण करने के लिए अप्रचलित तरीके गहरा प्रभाव डालते हैं। पुराने दर्द दर्द निवारण के लिए सस्ते तरीके और मादक दवाईयों का सेवन बहुत लम्बे समय तक असर डालता है। जिससे बाद में इनका आदि न जाना पड़ता है। ये आदतें संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में एक महामारी बनती जा रही हैं। घुटने की प्रत्यरोपण के बाद दर्द को कम करने के लिए गैर-चिकित्सात्मक उपचार में दिलचस्पी बढ़ जाती है। फिर थोड़ी सी गंभीरता इसके प्रभाव को और बढ़ा देती है। कैलिफोर्निया के स्टैंफोर्ड यूनिवर्सिटी के सकॉलर टीना हर्नाडेज बुजाज और उनके सहयोगियों ने इसकी समीक्षा करने के लिए एक विश्लेषण कि जिससे ये घुटना प्रत्यारोपण के बाद बिना दवाओं के दर्द का निवारण का तरीका ढूंढा जा सके।

कैसे निकला ये निष्कर्ष

शोधकर्ताओं ने 39 बेतरतीब चिकित्सालय को चिन्हित किया और इसमें 2,391 मरीजों पर इसका शोध किया। इनमें निरंतर निष्क्रिय गति, एक्सरसाइज, क्रायोथेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी, और एक्युपंक्चर जैसे शोध शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इस बात का मध्यम प्रमाण पाया कि इलेक्ट्रोथेरेपी और एक्युपंक्चर पुराने दर्द पर ज्यादा प्रभावी हैं और दवाओं के सेवन की आदत को कम करते हैं। इस बात का बहुत कम प्रमाण मिला कि क्रायोथेरेपी की वजह से दवाइयों का सेवन कम हुआ। और इस बात का बिल्कुल भी कोई प्रमाण नहीं मिला कि इसकी वजह से दर्द कम हुआ। इस आर्टिकल में शोध की कुछ सीमाएं पायी गईं। इसमें राष्ट्रीय जांच के मानकों पर खरी उतरने वाली दवाइयों का ही उपयोग हुआ। जिन मरीजों को दवाइयों की लत लग गई थी उनके लिए सर्जरी का सहारा लिया गया। लेखक बताते हैं कि प्रयोग में औषधीय चिकित्सा के लिए जरूरी विकल्पों को पहचानना जरूरी था।

एक्यूपंक्चर इमोशनल प्रॉब्लम्स को भी सुलझाने में मददगार है। यह पद्धति क्रोनिक किडनी फेलियर के मामलों में डायलिसिस पर चल रहे पेशेंट पर भी कारगर साबित हो चुकी है। स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया हो या अस्थमा, चार से पांच सिटिंग में फायदा दिखने लगता है। एक्यूपंक्चर ओनुरी सुजोक पद्धति में ट्विस्ट थेरेपी, मेडिटेशन व स्माइल द्वारा इमोशनल ट्रीटमेंट भी दिया जाता है। इस पद्धति में कई बार मिनटों या सेकेंडों में ही फायदा होने लगता है। अंगुलियों में छोटे-छोटे चुम्बक और हाथों में निडिल लगाकर यह चिकित्सा की जाती है।

कैसे काम करता है एक्यूपंक्चर-

शरीर पर कुछ बिंदु होते है जो बायोइलेक्ट्रीकल आवेगों पर प्रतिक्रिया करते है और ऊर्जा का वहन भी करते हैं। जब इन बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है तब एंडोर्फिन उत्पन्न होता हैं, जो दर्द को कम करने और रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाने मे सहायक होता है। यह शरीर की बीमारी के लिए प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम देता है और उन्हें चंगा करता हैं। यह तनाव और चिंता से राहत में भी मदद करता है और शरीर को संतुलन पाने की अनुमति देता है। एक्यूप्रेशर का मतलब है, शरीर पर बारह चैनलों में स्थित विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव डालना है। दबाव प्रेषित करने के बाद, क्यूई मुक्त होता है और शरीर को आराम महसूस होता है और दर्द कम और संतुलित हो जाता हैं। प्रमुख चैनल में लगभग 365 बिन्दु है और 650 अकेले दबाव बिन्दु हैं और इसी कारण से एक्यूप्रेशर के लिए एक प्रमाणित चिकित्सक की आवश्यकता है।

वैज्ञानिकों ने एक्यूपंक्चर पद्धति को विभिन्न आयामों पर परखा है, लेकिन परिणाम मिले-जुले रहे हैं। आरकाइव्स ऑफ इंटर्नल मेडिसिन के ताजा शोध में कहा गया है कि एक्यूपंक्चर सामान्य दर्दो में राहत देता है। तकरीबन 18000 लोगों पर अब तक हुए 29 शोधों में भी कई तथ्य निकलकर सामने आए हैं। जैसे कई हफ्ते तक पेन किलर लेने के बाद दर्द में 50 फीसदी राहत मिलती है, वहीं एक्यूपंक्चर एक बार में ही 50 फीसदी आराम दिलाता है।

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