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दुर्लभतम ब्लडग्रुप वाले आदित्य 55 बार रक्तदान कर बचा चुके हैं कईयों की जिंदगी

2nd Jan 2018
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सवा अरब आबादी वाले भारत में भी सिर्फ 10 से 17 हजार लोग ही ऐसे हैं, जिनका ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है। बड़ी बात ये है कि आदित्य ने अब तक 55 बार ब्लड डोनेट कर नजाने कितने लोगों की जान बचाई है।

आदित्य हेगड़े

आदित्य हेगड़े


आदित्य के साथ एक मुश्किल भी है। जब उन्हें खुद के लिए रक्त की जरूरत पड़ती है तो फिर खून ढूढ़ना काफी मुश्किल हो जाता है क्योंकि इस रक्त समूह के लोगों की संख्या काफी कम है।

बेंगलुरु में रहने वाले 34 साल के आदित्य हेगड़े हाल ही में चेन्नई में गर्भवती महिलाओं को ब्लड डोनेट करने के लिए चर्चा में थे। आदित्य का ब्लड ग्रुप 'ओ नेगेटिव' है। इसे दुर्लभतम ब्लड ग्रुप में से एक माना जाता है। पूरी दुनिया में सिर्फ 0.0004 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जिनका ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव होता है। सवा अरब आबादी वाले भारत में भी सिर्फ 10 से 17 हजार लोग ही ऐसे हैं, जिनका ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है। बड़ी बात ये है कि आदित्य ने अब तक 55 बार ब्लड डोनेट किया है। उन्होंने अब तक न जाने कितने लोगों की जान बचाई है।

कर्नाटक के सिद्दापुर गांव के पास जन्मे आदित्य का पालन पोषण हुबलली में हुआ। कॉलेज में आने के बाद उन्होंने रक्तदान करना शुरू किया। उन्होंने बताया, 'कॉलेज में आकर मुझे मालूम चला कि मेरा ब्लड ग्रुप काफी दुर्लभ होता है। यह ऐसा ग्रुप है जो किसी को भी रक्तदान कर सकता है। मैंने खुद को एक एनजीओ और संगठन के साथ रजिस्टर किया।' आदित्य बताते हैं कि जब उन्हें पता चला कि यह ब्लड ग्रुप काफी दुर्लभ है तो उन्होंने इसके बारे में और अधिक जानना शुरू किया। 2005 में बेंगलुरु आने के बाद वे नियमित रूप से रक्तदान करने लगे। उन्होंने विदेशियों के भी रक्तदान किया है।

ब्लड बैंक नेटवर्क संकल्प इंडिया फाउंडेशन चलाने वाले रजत अग्रवाल ने बताया कि आदित्य ने श्रीलंका के एक मरीज को जरूरत पड़ने पर रक्तदान किया था। आदित्य बताते हैं कि आज के दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण रक्तदान करने वालों को जोड़ना और जरूरत पड़ने पर उन्हें खोजना आसान है। हालांकि आदित्य के साथ एक मुश्किल भी है। जब उन्हें खुद के लिए रक्त की जरूरत पड़ती है तो फिर खून ढूढ़ना काफी मुश्किल हो जाता है क्योंकि इस रक्त समूह के लोगों की संख्या काफी कम है। हाल ही में आदित्य का एक्सिडेंट हुआ था और उनकी बाईं कोहनी में गंभीर चोट लगी थी। उन्हें यह सोचकर डर लगा था कि अगर सर्जरी की जाएगी तो खून कहां से लाया जाएगा।

हालांकि उन्हें सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी और वे ऐसे ही ठीक हो गए। आदित्य अभी अपनी खुद की कंपनी खोलने की तैयारी कर रहे हैं। वे हर तीन महीने पर जरूरत पड़ने पर रक्तदान करते रहते हैं। आदित्य सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं। उन्होंने हाल ही में बेंगलुरु से रात भर का सफर कर के चेन्नई की एक गर्भवती महिला को रक्तदान किया था। उस महिला का रक्त समूह भी ओ नेगेटिव था। अगर वक्त पर उसे खून नहीं मिलता तो उसकी डिलिवरी संभव नहीं हो पाती। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए डिलिवरी को अंजाम दिया था। आदित्य ने कई बार कोरियर के जरिए अपना खून विदेश भेजा है। वे पाकिस्तान, श्रीलंका और मलेशिया के मरीजों की जान बचा चुके हैं।

सबसे दुर्लभतम क्यों है ये ब्लड ग्रुप?

बाकी सभी रक्त समूहों से इतर ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों की रक्त कोशिकाओं में एच एंटीजन की अनुपलब्धता होती है। इन रक्त समूहों में ए और बी एंटीजन नहीं होता इसलिए इसे ओ ग्रुप के नाम से जाना जाता है। इसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप भी कहा जाता है। दुर्लभतम श्रेणी में होने के कारण www.bomabybloodgroup.org और संकल्प इंडिया फाउंडेशन जैसी संस्थाएं इसे उपलब्ध कराने का काम कर रही हैं। ये संस्था रक्त दान करने वाले लोगों का पूरा लेखा जोखा अपने पास रखती हैं। किसी को भी खून की जरूरत पड़ने पर इनसे संपर्क किया जा सकता है।

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