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ऐसे बदल दिया राशि नांरग ने अपने पालतू जानवरों के प्रोजेक्ट को करोड़ों के व्यापार में

स्टार्टअप HUFT की फाउंडर राशि नारंग की कहानी...

25th Oct 2017
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भारतीय मूल की राशि नारंग ने सिंगापुर में जानवरों को लेकर स्टार्टअप HUFT की स्थापना की। 2008 में स्टार्ट अप शुरू करने के बाद नारंग सात सालों तक भारत से दूर सिंगापुर में थी। सात सालों में भारत में इसके कई कॉपी ब्रांड खुल गए। पालतू जानवरों का यह बिजनेस भारत में पक्का उद्योग बन गया।

साभार: सोशल मीडिया

साभार: सोशल मीडिया


नांरग ये दावा करती हैं कि उस वक्त बाजार में मौजूद सारे सामान उपयोगी थे, लेकिन उन्होंने प्रीमियम प्रोडक्ट्स की डिजाइन और गुणवत्ता पर ध्यान दिया, जिससे उनके सामान महंगे हो गए। कुत्ते के पट्टे की कीमत 100 रुपये थी, लेकिन नारंग ने इसकी कीमत 500 रूपये रखी।

200 स्टोर्स से इंकार किए जाने के बाद भी नारंग निराश नहीं हुईं। इसने उन्हें अकेले चलने के लए प्रेरित किया। उन्होंने साउथ दिल्ली के चुनिंदा सिटी मॉल में 100 वर्ग फीट की एक जगह भाड़े पर लिया। सबने जबरदस्त हौसला बढ़ाया। सबने माना कि यह औरों से हटकर है।

भारतीय मूल की राशि नारंग ने सिंगापुर में जानवरों को लेकर स्टार्टअप HUFT की स्थापना की। 2008 में स्टार्ट अप शुरू करने के बाद नारंग सात सालों तक भारत से दूर सिंगापुर में थी। सात सालों में भारत में इसके कई कॉपी ब्रांड खुल गए। पालतू जानवरों का यह बिजनेस भारत में पक्का उद्योग बन गया। नारंग के मुताबिक, मैंने ये सारी चीजें अपने कुत्ते के लिए बनाना शुरू किया था जो बाज़ार में मौजूद चीज़ों की पसंद नहीं करता था। मैंने इसे अपने दोस्तों को दिखाया और उन्हे पालतू कुत्तों ने इसे खूब पसंद किया। मैं इसके बारे में कुछ भी नहीं जानती थी। इसलिए मैंने इस पर काफी रिसर्च किया। जो सामान हम बना रहे थे, उसे लेकर मैं काफी डरी ही थी।

6 हजार किलोमीटर दूर रह रहीं नारंग भारत आने के लिए बहुत बेचैन थी। नारंग के मुताबिक, यह बहुत निराशाजनक था। ठीक इसी समय में कई लोग यही कर रहे थे, वो सब कुछ नकल कर रहे थे जो हम बना रहे थे। और बस आगे बढ़ते जा रहे थे। नांरग ये दावा करती हैं कि उस वक्त बाजार में मौजूद सारे सामान उपयोगी थे, लेकिन उन्होंने प्रीमियम प्रोडक्ट्स की डिजाइन और गुणवत्ता पर ध्यान दिया, जिससे उनके सामान महंगे हो गए। कुत्ते के पट्टे की कीमत 100 रुपये थी, लेकिन नारंग ने इसकी कीमत 500 रूपये रखी। कुत्तों के लिए बेड की कीमत 600 रुपये थी लेकिन नारंग ने इसकी कीमत 2000 रूपये रखी। 

नारंग के मुताबिक, मेरे प्रोडक्ट्स सिर्फ कुत्तों को ध्यान में रख कर तैयार हुए थे। इसलिए वो बहुत महंगे थे। 200 स्टोर्स से इंकार किए जाने के बाद भी नारंग निराश नहीं हुईं। इसने उन्हें अकेले चलने के लए प्रेरित किया। उन्होंने साउथ दिल्ली के चुनिंदा सिटी मॉल में 100 वर्ग फीट की एक जगह भाड़े पर लिया। सबने जबरदस्त हौसला बढ़ाया। सबने माना कि यह औरों से हटकर है।

साभार: सोशल मीडिया

साभार: सोशल मीडिया


सात सालों की दूरी का नतीजा

2015 में भारत आने के बाद नारंग के लिए सेट अप और फंड जुटाने का समय था। तब तक नारंग ने सिंगापुर में दोस्तों, सलाहकारों औऱ ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को का मन जीत लिया था। जैसे भी हो किसी कर्ज या लोन लेने के बदले उन्होंने अपने सिंगापुर के दोस्तों से मदद मांगी। नारंग के मुताबिक, हम इस पर फोकस रहे कि हमारे ग्राहकों की आवश्यकता क्या है ? हम उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहे। हम उन सभी लोगों के पास गए जो हमारे विजन को समझते थे। जिस प्रकार हम अपने बिजनेस को खड़ा कर रहे थे, उससे सभी लोग काफी प्रभावित थे। मैं बहुत खुश थी कि हम बाहर नहीं गए और जो लोग भी निवेश करना चाहा वो खुद हमारे पास आये। यह हमारे भरोसे को थोड़ा बढ़ाने के लिए काफी था। 

साल 2015 में HUFT ने लोगों से व्यक्तिगत तौर पर लोगों से 1 मिलियन डॉलर जुटाये। जनवरी महीने में HUFT को 2 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त मदद मिली। इन रूपयों ने हमारे स्टार्ट अप को 100 वर्ग फीट से 9 स्टोर्स और ऑनलाइन तक पहुंचने में मदद की। इन नौ स्टोर्स में से तीन दिल्ली में, चार बैंगलुरू में और एक पुणे में हैं। जिसके एक लाख से भी ज्यादा ग्राहक हैं।

नक्कालों को नारंग ने कैसे हराया ?

हाल के कुछ सालों में पालतू जानवरों से जुड़े सामानों का व्यापार ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। कुछ लोग इससे कमाने में कामयाब भी हुए। कई ऑनलाइन बाजारों ने भी पालतू जानवरों से जुड़े सामानों को बेचते हैं। इस भीड़ में HUFT ने खुद को अलग कैसे करती है ? नारंग बताती हैं कि अचानक ये इंडस्ट्री मशहूर हो गई और सब इसमें कूद पड़े। लेकिन ज्यादातर लोग जो समझ नहीं सके वो है इसका औरों से अलग और असंगठित होना। आप जल्दबाजी नहीं कर सकते। आपको इसमें लम्बे समय तक रहने की जरूरत है। यह किसी इंडस्ट्री की तरह नहीं है। 

हम सिर्फ गुणवत्तापूर्ण चीजों को बनाने पर ध्यान देते रहे इसलिए कभी छूट नहीं देते। इस बाजी से बचने के लिए HUFT धीरे धीरे कई ब्रांड ऑफर करने वाला बन गया। जब भी हम डिजाइन करते समय इस बात का पूरा ख्याल रखते हैं कि आपके प्यारे पालतू जानवरों के लिए सिर्फ यही काफी नहीं। इसलिए हम खाने की श्रेणी में नहीं गए। मैंने थर्ड पार्टी ब्रांड को बेचना शुरू किया। नांरग बताती हैं कि HUFT के आधे ब्रांड थर्ड पार्टी के हैं, जो 10 कैटोगरी में बंटी हैं। नारंग की इस कंपनी ने पिछले साल अपने पूंजी में 6 गुणा की बढ़ोत्तरी की और इस साल इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।  

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