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यात्रियों के लिए टैब और लैपटॉप रखने वाले हाइटेक ऑटोड्राइवर अन्नादुराई के 10 हज़ार फेसबुक फालोअर्स

YS TEAM
21st Jul 2016
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क्या आप सोच सकते हैं कि एक ऑटोचालक के फेसबुक पर 10 हज़ार फॉलोअर्स होंगे, इतना ही नहीं, उसका ऑटोरिक्षा लगता है, जैसे किसी ऑई टी एक्सपर्ट का कार्यालय है, जहाँ 2 टेडेक्स, टैब और लैपटॉप भी मौजूद हैं। यह हैं अऩ्न्ना दुराई।

अन्नादुराई उर्फ ऑटो अन्नादुराई 2012 से 12 वीं की शिक्षा अधूरी छोड़कर ऑटो चला कर रहे हैं। उन्होंने अपनी ऑटोरिक्षा से सभी को चौंका दिया है। उनकी ऑटोरिक्शा में कई तरह की पत्र पत्रिकाएँ हैं, किताबे हैं, छोटा सा टीवी है, वाई फाई कनेक्शन हैं। जब भी कोई चेन्नई वासी या बाहर का व्यक्ति उनकी ऑटोरिक्षा में बैठता है तो चौंके बिना नहीं रह सकता, बल्कि चेन्नई में सबसे अधिक चाहे जाने वाले ऑटो ड्राइवर के रूप में उन्हें देखा जा सकता है।

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पत्र- पत्रिकाओं में छपने के बाद अन्नादुराई की लीडरशिप गुणवत्ता के गुण सब गाने लगे हैं। उन्होंने अब तक 40 से अधिक कार्पोरेट कार्यालयों में अपना भाषण दिया है। 31 वर्षीय अन्नादुराई हुंडई, वोडा फोन, रॉयल इन्फील्ड, डैन्फो एवं गेमेसा जैसी कंपनियों के कर्मचारियों को संबोधित कर चुके हैं। न केलव चेन्नई बल्कि बैंगलूर, हैदराबाद, मुंबई, पूणे, गुरगाँव जैसे दूसरे शहरों में भी जा सकते हैं।

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अन्ना ने अपने ऑटोरिक्शा में टैबलेट, आईपैड तथा लैपटॉप रख छोड़े हैं, ताकि यात्री उनके ऑटो में बैठकर इन चीज़ों से लाभ उठा सकें। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ स्विपिंग मशीन भी रखी है, ताकि यात्रियों को छुट्टे की समस्या न हो। इसके पीछे का कारण भी बड़ा दिलचस्प है। जब यात्री के पास चिल्लर पैसे नहीं होते तो वे यात्रियों से कहते कि अगली बार दें, लेकिन यात्री इस पर लज्जा महसूस करते। इस समस्या का हल करने के लिए उन्होंने स्विपिंग मशीन की शुरूआत की और फिर आज लोग क्रेडिट और डेबिट कार्ड से अपने पैसे अदा कर सकते हैं। वे दूरी के अनुसार, अपने यात्रियों को 10, 15, 20 एवं 25 रुपये चार्ज करते हैं।

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अन्नादुराई खास दिनों में अपने यात्रियों को डिस्काउँट भी देते हैं। विशेषकर शिक्षकों को वे खास सेवा प्रदान करते हैं। वेलेंटाइन डे के दिन प्रेमी भी उनकी खास सेवा से खुश होते हैं। मदर्स डे पर वे अपने बच्चों के साथ यात्रा करने वाली माँ को भी फ्री राइड की सुविधा दे चुके हैं।

अन्ना चाहते हैं कि हर यात्री उनकी ऑटोरिक्षा की सवारी कर खुश हों। वे महीने 45 हज़ार रुपये कमाते हैं और 9000 से अधिक रुपये विभिन्न सेवाओं पर खर्च करते हैं। वे एक ऐप तैयार करने की तैयारी में है, जिससे ग्राहकों को पता चल सके कि उनका ऑटोरिक्षा कहाँ है और वह खाली है या नही है।

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