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दलेर मेंहदी, वो गायक जो मौसिकी सीखने के लिए 11 साल की उम्र में ही घर से भाग गये थे

18th Aug 2017
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दलेर मेंहदी को भांगड़ा की थाप को अंतर्राष्ट्रीय बनाने का श्रेय दिया जाता है। इंडो-पंजाबी पॉप संगीत के सुपरस्टार दलेर मेहंदी के कई गानों ने हमें खूब नचाया है। 

<b>दलेर मेंहदी (फोटो साभार: सोशल मीडिया)</b>

दलेर मेंहदी (फोटो साभार: सोशल मीडिया)


सबसे पॉपुलर गाना है तुणक तुणक तुण। ये गाना आज भी उतना हिट है जितना इसके रिलीज टाइम पर था। आज भी जब किसी बारात में ये गाना डीजे वाला चला देता है तो लोग पगला जाते हैं और जी भरके नाचते हैं।

दलेर मेहंदी के तुणक तुणक तुण गाने का इतना अधिक क्रेज़ है कि वीडियो गेम बनाने वाली ब्लिजार्ड जैसी बड़ी कंपनी ने भी अपने गेम वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट में इसका इस्तेमाल किया है। इस गाने का न सिर्फ देसी फैन है बल्कि विदेशी भी इसकी धुन पर जमकर भांगड़ा करते हैं।

दलेर मेंहदी मतलब सनील के लंबे से चोगेनुमा कुर्ते और उसपर ढेर सारी कलाकारियां, मैचिंग की पगड़ी और हाथों में माइक। दलेर मेंहदी का पहनावा जितना आकर्षक और जुदा है उनकी गायकी भी उतनी अलहदा है। वो जब अपनी रोबीली खनकदार आवाज में ऊंचे सुर लगाना शुरू करते हैं तो जनता पगला जाती है और नाच-नाच कर जमीन तोड़ देती है। दलेर मेंहदी को भागड़ा की थाप को अंतर्राष्ट्रीय बनाने का श्रेय दिया जाता है। इंडो-पंजाबी पॉप संगीत के सुपरस्टार दलेर मेहंदी के कई गानों ने हमें खूब नचाया है। भला 'बोलो तारा रा रा' जैसे गाने को कौन भूल सकता है जिसकी करीब 2 करोड़ से ज्यादा कॉपियां बिकीं थी।

दलेर मेंहदी को भारतीय संगीत जगत में एक नई विधा को लाने का श्रेय भी जाता है। ये विधा है रब्बाबी संगीत। रब्बाबी सूफी, ठुमरी और रॉक म्यूजिक का फ्यूजन है। इस विधा का सबसे पॉपुलर गाना है तुणक तुणक तुण। ये गाना आज भी उतना हिट है जितना इसके रिलीज टाइम पर था। आज भी जब किसी बारात में ये गाना डीजे वाला चला देता है तो लोग पगला जाते हैं और जी भरके नाचते हैं। इंटरनेट पर भी इस गाने का राज है। लोगों ने इसके तरह-तरह के कवर सॉन्ग्स बना रखे हैं। लोगों में इस गाने का इतना क्रेज है कि वीडियो गेम बनाने वाली ब्लिजार्ड जैसी बड़ी कंपनी ने भी अपने गेम वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट में इसका इस्तेमाल किया है। इस गाने का न सिर्फ देसी फैन है बल्कि विदेशी भी इसकी धुन पर जमकर भांगड़ा करते हैं।

एक डाकू के नाम पर हुआ नामकरण

दलेर मेहंदी का जन्म 18 अगस्त 1967 को पटना साहिब बिहार में हुआ था। जन्म के वक्त इनका नाम 'दलेर सिंह' था। इनके माता-पिता ने एक फिल्म 'डाकू दलेर सिंह' के नाम से प्रेरित होकर इनका नाम रखा था। उनके नामकरण का किस्सा जितना रोचक है उतना ही रोचक है उनके उपनाम पड़ने का किस्सा। दरअसल उस दौर में एक मशहूर गायक परवेज मेहंदी हुआ करते थे, दलेर का परिवार उनकी मौसिकी का दीवाना था। उन्हीं परवेज मेंहदी के नाम से प्रेरित होकर दलेर के नाम के साथ 'मेहंदी' जोड़ दिया गया। दलेर मेहंदी एक खानदानी गायक हैं। उनके परिवार में सात पीढ़ियों से संगीत सेवा हो रही है। उनके माता-पिता ने उन्हें बचपन में ही 'राग' और 'सबद' की शिक्षा दे दी थी।

संगीत सीखने के लिए बचपन में छोड़ दिया था घर

घर में तो संगीत का भरपूर माहौल था ही लेकिन दलेर खुद को और विस्तार देना चाहते थे। और ये पका हुआ ख्याल उन्हें बिल्कुल अधपकी उम्र में आया था। वो किसी भी तरह अपने इस लक्ष्य को पूरा करना चाहते थे। दलेर मेहंदी ने 11 साल की उम्र में गोरखपुर के रहने वाले उस्ताद राहत अली खान साहिब से शिक्षा लेने के लिए घर छोड़ दिया था और भागकर उनके पास पहुंच गए थे। उनके मां-बाप उनकी गुमशुदगी से परेशान हो गए। वो उन्हें दर ब दर ढूंढते रहे लेकिन दलेक का कुछ पता नहीं चला। फिर एक दिन दलेर मेहंदी ने 13 साल की उम्र में जौनपुर में 20 हजार लोगों के सामने अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। यहां पर उनके माता-पिता को उनकी खबर मिली, जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने दलेर को पैसों और फूलों की माला के साथ स्टेज पर पाया।

दलेर मेंहदी की दुनिया करती है नकल

नब्बे के दशक में अपने पॉप अलबम के जरिये करोड़ों हिंदुस्तानियों के दिलों पर राज करने वाले दलेर मेहंदी का कहना है कि बाॅलीवुड से लेकर दक्षिण भारत के फिल्म उद्योग में उनके स्टाइल अौर गाने के रिदम को कॉपी किया जाता है। बाॅलीवुड से लेकर दक्षिण भारत के फिल्म उद्योग में उनके गानों की धुनों के साथ साथ उनके कपड़े और सेट के स्टाइल को भी कॉपी किया जा रहा है और ये उनके लिए बड़ी बात है। 90 के दशक में वोअपने वीडियो एलबम के लिए जैसा सेट बनाते थे और जैसे कपड़े पहनते थे, बॉलीवुड के सितारे उस स्टाइल को अब भी फाॅलो करते हैं।

गायक, संगीतकार, गीतकार, प्रोड्यूसर, कलाकार के रूप में काम करने के बाद दलेर मेहंदी फिलहाल पर्यावरण और समाजसेवा की दिशा में काम कर रहे हैं। एक समय ऐसा था जब उनके गाने हर एक फिल्म में सुनने को मिल जाते थे। लेकिन बीच में वो अपने व्यक्तिगत कारणों से गायब हो गए थे। वो वापस आ गए हैं, दलेर मेंहदी वापस आ गए हैं। फिल्म बाहुबली की अल्बम में भी उनका एक गाना था, कई सारे और म्यूजिक अल्बम भी जल्द रिलीज होने वाले हैं। इस्तेकबाल है फिर से पंजाबी शेर, साड्डा दलेर।

यह भी पढ़ें: 'रूढ़िवादी समाज' से निकलीं भारत की पहली महिला सूमो पहलवान हेतल दवे 

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