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दुनिया की सबसे ऊंची पटरियों पर दौड़ेंगे विमान जैसे कोच

29th Oct 2018
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आधुनिक भारतीय रेलव इन दिनो देश में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर गंभीरता से सक्रिय है। इनमें ही राष्ट्रीय महत्व की एक बड़ी परियोजना है चीन सीमा पर बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन। प्रस्तावित उच्च गति के रेल मार्गों के दोनों ओर दीवार बनाने और उन पर विज्ञापन से कमाई करने के प्रस्ताव पर भी रेलवे विचार कर रहा है। इसके अलावा मानव रहित रेल क्रॉसिंगों को खत्म करने की भी रेलवे की योजना है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


रेलवे उच्च गति के रेल मार्गों के दोनों ओर दीवार बनाने और उन पर विज्ञापन से कमाई करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके पीछे रेलवे की मंशा किराये के अतिरिक्त आय में बढ़ोत्तरी की है। 

वायुमण्डल में विभिन्न गैस एवं अन्य तत्व भी भौतिक पदार्थों की तरह सक्रिय रहते हैं। इनमें भार होता है। पृथ्वी के चारों ओर सैकड़ों किलोमीटर की ऊँचाई तक वायु का आवरण है। इसका धरातल पर भारी दबाव होता है। सामान्यतः समुद्रतल पर वायुदाव 1013.2 मिलीवार रहता है 300 मीटर की ऊँचाई पर 976.5 एवं 600 मीटर की ऊंचाई पर गिरकर 942 मिलीबार रह जाता है। अधिकं ऊँचाई पर वायु इतनी हल्की हो जाती है कि न केवल सांस लेना कठिन हो जाता है, वरन् मूर्च्छा भी आ जाती है। इसलिए पर्वतारोही और वायुयान चालक अपने साथ सदैव ऑक्सीजन के थैले रखते हैं। इन्ही सब स्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे चीन सीमा पर बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन पर चलने वाली ट्रेनों में विमानों की तरह ही वायुदाब नियंत्रण वाले कोच का इस्तेमाल करेगी। यह रेलवे ट्रैक दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर बनने जा रहा है। वायुदाब नियंत्रण वाले कोचों से यात्रियों को सांस लेने में परेशानी नहीं होगी।

उत्तर रेलवे के चीफ इंजीनियर (निर्माण) डी आर गुप्ता के मुताबिक समुद्र की सतह से 5,360 मीटर की ऊंचाई पर एक खास रणनीति के तहत भारतीय रेलवे 83,360 करोड़ रूपये की लागत से 465 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने जा रही है, जिस पर दौड़ने वाली ट्रेनों में पहली बार वायुदाब नियंत्रण वाले कोचों का उपयोग किया जाएगा। इस समय पूरी दुनिया में केवल चीन की किंघाई-तिब्बत रेलवे लाइन में इस तरह के कोचों का इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने का यह लाभ होता है कि परियोजना के लिए अधिकांश वित्तीय मदद केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है।

एक राष्ट्रीय परियोजना के रूप में भारत-चीन सीमा से जुड़ी सामरिक महत्व की यह बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन विश्व का सबसे ऊंचा रेल मार्ग होगा। रेलवे की यह सबसे कठिन परियोजना है और यह सामरिक महत्व के लिहाज से पांच सर्वाधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसके पूरा हो जाने पर इससे भारतीय सशस्त्र बलों को मदद के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही देश दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की राह आसान होगी। सरकार को रेलवे ने सुझाव दिया है कि हिमाचल प्रदेश के उप्शी और और लेह के फे के बीच 51 किलोमीटर लंबी पट्टी पर तत्काल निर्माण शुरू होना चाहिए। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विशेष चौबे बताते हैं कि परियोजना के लिए सर्वेक्षण का पहला चरण पूरा हो चुका है। इस 465 किलोमीटर लंबी लाइन पर लागत का प्रारंभिक आकलन 83,360 करोड़ रुपये का है।

रेलवे उच्च गति के रेल मार्गों के दोनों ओर दीवार बनाने और उन पर विज्ञापन से कमाई करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके पीछे रेलवे की मंशा किराये के अतिरिक्त आय में बढ़ोत्तरी की है। दीवारें सुरक्षा का काम करने के साथ कमाई का माध्यम भी बन सकती हैं। इसी प्रोजेक्ट के तहत ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए ध्वनि रोधक दीवारें बनाने का भी प्रस्ताव है। दीवारें लगभग 7-8 फुट ऊंची होगी और इसके दोनों तरफ विज्ञापन सामग्री लगाने का विकल्प होगा। विज्ञापन से इनकी निर्माण लागत वसूलने में मदद मिलेगी। इस समय रेलवे ऐसे ठेकेदारों से बातचीत कर रहा है, जो कि प्री- फैब्रिकेटेड दीवारों की आपूर्ति कर सकते हैं। उन्हें विज्ञापन की आय में हिस्सेदार बनाया जा सकता है। इस समय दिल्ली-मुंबई उच्च-गति गलियारे की योजना पर काम चल रहा है। इस पर सुरक्षा के लिहाज से भी इस तरह की दीवारों की जरूरत है। यह गलियारा सघन क्षेत्र से जाएगा। इसमें विज्ञापन बहुत ज्यादा लोगों की निगाह से गुजरेंगे। इससे जुड़ी पायलट परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। दीवरें पूरे नेटवर्क पर होंगी पर शुरुआत शहरी इलाकों से की जाएगी। यह दीवारें केवल आय के लिहाज से ही अहम नहीं होंगी बल्कि पटरियों पर सुरक्षा बनाए रखने, अतिक्रमण से छुटकारा पाने, मवेशियों व अन्य व्यवधानों को भी कम करने में मददगार साबित होंगी।

इसके अलावा रेलवे मानव रहित रेल क्रॉसिंगों को खत्म करने पर भी विचार कर रहा है। पिछले दिनो एक समीक्षा बैठक में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस तरह की क्रॉसिंग खत्म करने की प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी एक वेबसाइट पर देने का फैसला किया। रेलमंत्री के मुताबिक ऐसा करने से जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। बैठक में गोयल ने रेल नेटवर्क में मानव रहित रेल क्रॉसिंग खत्म करने की योजना की समीक्षा की। बताया गया है कि रेलवे के उन पांच महत्वपूर्ण जोन के महाप्रबंधकों के साथ एक विस्तृत समीक्षा की गई, जहां सबसे ज्यादा मानव रहित रेल क्रॉसिंग हैं। जवाबदेही एवं सार्वजनिक निगरानी बढ़ाने के लिए मानव रहित रेल क्रॉसिंग खत्म करने की प्रक्रिया में होने वाली प्रगति की जानकारी पारदर्शी तरीके से एक वेबसाइट पर भी डाले जाने का निर्णय लिया गया है।

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