संस्करणों

जनधन खातों से नकद निकासी सीमा 10,000 रूपये हुई

रिज़र्व बैंक ने प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) खाताधारक किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये यह कदम उठाया गया है।

30th Nov 2016
Add to
Shares
4
Comments
Share This
Add to
Shares
4
Comments
Share

भारतीय रिजर्व बैंक ने जनधन खातों से नकद निकासी की सीमा 10,000 रुपये प्रति माह तय कर दी है। कालाधन रखने वालों द्वारा जनधन खातों के दुरुपयोग के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

image


रिजर्व बैंक की इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा गया है, कि प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) खाताधारक किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये यह कदम उठाया गया है। उनके खातों का मनी लांड्रिंग गतिविधियों के लिये इस्तेमाल करने और इसके परिणामस्वरूप बेनामी संपत्ति लेनदेन एवं मनी लांड्रिंग कानून के कड़े प्रावधानों को देखते हुये एहतियात के तौर पर ऐसे खातों के संचालन पर कुछ सीमा लगाये जाने का फैसला किया गया है। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि फिलहाल ये उपाय अस्थाई तौर पर किये गये हैं।अधिसूचना के अनुसार जिन जनधन खातों में अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) की सभी शर्तों का अनुपालन किया गया है, उनमें से हर महीने 10,000 रुपये तक और ऐसे जनधन खाते जिनमें सीमित अथवा केवाईसी अनुपालन नहीं है उन खातों से महीने में 5,000 रुपये ही निकाल सकेंगे। हालांकि बैंकों के शाखा प्रबंधक मौजूदा तय सीमाओं के दायरे में रहते हुये मामले की गंभीरता की जांच पड़ताल करने के बाद ऐसे खातों से महीने में दस हजार रुपये की अतिरिक्त निकासी की भी अनुमति दे सकते हैं।

रिजर्व बैंक ने कहा है, कि जहां तक जमा राशि के मामले में जनधन खातों के लिये 50,000 रुपये की सीमा है। केन्द्र सरकार के 500 और 1,000 रुपये के नोटों को चलन से हटाने के फैसले के बाद जनधन खातों में अचानक पैसा जमा होने लगा। कई खातों में 49,000 रुपये तक जमा कराये गये। इस तरह की रिपोर्ट आई है, कि कई लोगों, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में जिन लोगों के खातों में नोटबंदी की घोषणा के दिन तक कोई राशि नहीं थी, उनमें अचानक पैसा आ गया।

सरकार को आशंका है कि कालाधन रखने वाले अपने अवैध धन को वैध बनाने के लिये किसानों और दूसरे लोगों के जनधन खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नोटबंदी के बाद पिछले केवल 14 दिन में ही जनधन खातों में 27,200 करोड़ रुपये की जमापूंजी आ गई। इन 25.68 करोड़ जनधन खातों में 23 नवंबर तक कुल जमा राशि 70,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करते हुये 72,834.72 करोड़ रूपये तक पहुंच गई। नोटबंदी से पहले इन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये जमा थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को अचानक 500 और 1,000 रूपये के नोटों को अमान्य करने की घोषणा की। उसे बाद से जनधन खातों में 27,198 करोड़ रूपये की अतिरिक्त पूंजी जमा हुई है। हालांकि, यह भी तथ्य सामने आया है, कि 25.68 करोड़ जनधन खातों में से 22.94 प्रतिशत खातों में अभी भी खाली हैं।

उधर दूसरी तरफ सरकार ने बताया है, कि भारतीय रिजर्व बैंक तथा बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और अमान्य हो चुके 500 रूपये और 1000 रूपये के नोटों को बैंक में जमा कराने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर 2016 से आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। वित्त राज्य मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक तथा बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। उन्होने बताया कि 100 रूपये के नोटों का परिचालन पहले ही बढ़ा दिया गया है। मेघवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए बैंकों को 100 रूपये या उससे कम मूल्यवर्ग के नोटों की आपूर्ति करने को कहा गया है। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि आठ नवंबर 2016 की स्थिति के अनुसार, 500 रूपये के 1716.50 करोड़ नोट तथा 1000 रूपये के 685.80 करोड़ नोट परिचालन में थे। जनता की सुविधा के लिए की गई व्यवस्था का ब्यौरा वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अमान्य हो चुके 500 रूपये और 1000 रूपये के नोटों को बैंक में जमा कराने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर 2016 से आगे बढ़ाने पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।

साथ ही रिजर्व बैंक ने मॉल और दुकान मालिकों से अपनी रोजाना की नकदी को बैंकों के पास जमा कराने को कहा है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि उन्हें अपनी जमा की गई राशि 2,000 और 500 रूपये के नोट में निकालने की अनुमति होगी, बेशक मौजूदा निकासी की सीमा कुछ भी हो। इस कदम का मकसद नए वैध करेंसी नोटों की जमाखोरी को रोकना है, जिससे नकदी संकट को खत्म किया जा सके। एक अधिसूचना में रिजर्व बैंक ने कहा कि ऐसा सामने आया है कि कुछ जमाकर्ता मौजूदा निकासी की सीमा की वजह से अपना पैसा बैंक खातों में जमा कराने से हिचकिचा रहे हैं।

करेंसी नोटों को बाजार में लाने के लिए सावधानी से विचार विमर्श के बाद यह फैसला किया गया है कि 29 नवंबर या उसके बाद वैध नोटों में की गई जमा को मौजूदा निकासी सीमा से आगे भी निकालने की अनुमति होगी।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस तरह की निकासी के लिए ऊंचे मूल्य यानी 2,000 और 500 के नोट जारी किए जायेंगे। लोगों ने नोटबंदी के बाद 27 नवंबर तक 500 और 1,000 के 8.45 लाख करोड़ रूपये के नोट जमा कराए हैं या बदले हैं। इस दौरान विभिन्न बैंक शाखाओं ने काउंटर या एटीएम के जरिये 2.16 लाख करोड़ रूपये वितरित किए हैं।

Add to
Shares
4
Comments
Share This
Add to
Shares
4
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें