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ई-लर्निंग में हो रहा है नए-नए एजुकेशनल टूल्स का इस्तेमाल

सिर्फ आठ सालों में बनी "नेक्स्ट एजुकेशन" एक प्रतिष्ठित ई-लर्निंग कंपनीई लर्निंग के लगातार बढ़ते कदम से जगी नयी उम्मीदें

15th Mar 2015
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21वीं शताब्दी तकनीकी दृष्टिकोण से बहुत प्रभावशाली सिद्ध हो रही है। यह हर उस चीज का स्वागत कर रही है जो तकनीकी के विकास में सहायक है। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है, ई लर्निंग। आज से कुछ साल पहले शायद यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में भी इतनी क्रांति आ सकती है। लेकिन यह संभव हुआ और आज ई लर्निंग का जिस प्रकार तेजी से विस्तार हो रहा है वह हम सबके सामने है।

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भारत में ऑन लाइन एजुकेशन का भविष्य उज्जवल है। अब ज्यादा से ज्यादा शिक्षण संस्थान इनको अपना रहे हैं कारण साफ है यह बच्चों को नवीनतम शिक्षा उच्चस्तरीय तकनीक के साथ प्रदान कर रहे हैं। और छात्र भी इस नई तकनीक को काफी पसंद कर रहे हैं। यह तकनीक अब सहज उपलब्ध हो रही है और आज का युवा जोकि तकनीक को बहुत जल्दी और आसानी से पिकअप कर लेने में सक्षम है उसके लिए यह काफी लाभकारी भी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एजुकेशन सेक्टर २०१५ के अंत तक ५० बिलियन यूएस डॉलर का हो जाएगा। यह १४ प्रतिशत की तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन अभी हम यह नहीं कर सकते कि यह सेक्टर पूरी तरह से मैच्योर हो चुका है। अभी भी इस दिशा में बहुत कुछ करना बाकी है और जिस प्रकार इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ रही है उससे भविष्य में इस क्षेत्र में और अधिक प्रगति के संकेत भी मिल रहे हैं।

ई लर्निंग की जरूरतों को देखते हुए कुछ आईआईटी के छात्रों ने बायस देव रलहान के साथ मिलकर नेक्स्ट एजुकेशन नाम से एक कंपनी लॉच की।

नेक्स्ट एजुकेशन है क्या?

नेक्स्ट एजुकेशन एक तकनीक केंद्रित शैक्षिणिक उपक्रम है जिसका मुख्यालय हैदराबाद में है। सन २००७ में इसकी स्थापना की गई। यह कंपनी स्कूलों, छात्रों और अध्यापकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। इसके उत्पादों में सिम्यूलेशन्स, एक्सपेरिमेंट्स, एनिमेटिड एण्ड इंट्रक्टिव टूल्स और एक्टिविटी किट शामिल हैं।

टीच नेक्स्ट कंपनी का नवीनतम ऑडियो विजुअल टीचिंग प्रोड्क्ट है। इसके उपयोग के लिए केवल एक प्रोजेक्टर और एक रिमोर्ट की आवश्यकता होती है। निसंदेह इसके उपयोग से छात्रों को बहुत लाभ भी मिल रहा है। टीच नेक्स्ट का कंटेंट एनसीईआरटी के मानकों के अनुसार ही बनाया गया है और सीबीएसई, आईसीएसई के अलावा तेईस स्टेट बोर्ड्स का कंटेंट इसमें शामिल किया गया है।

इसके कंटेंट को विशेषज्ञों की टीम ने अथक प्रयास के बाद तैयार किया है। लगभग ६ मिलियन छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा नेक्स्ट एजुकेशन के और भी कई लर्निंग प्रोडक्ट्स हैं जिसमें लर्ननेस्ट, नेक्स्ट लैब्स, नेक्स्ट ईआरपी शामिल हैं।

शोध और विकास पर फोकस -

नेक्स्ट एजुकेशन के हर लर्निंग टूल पर कई विशेषज्ञों ने साथ काम किया है। यह कई महीनों के अथक शोध का परिणाम है। इसकी विषयवस्तु को आज के समय की जरूरत के अनुसार तैयार किया गया है। इसे तैयार करने में अतिआधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है ताकि छात्रों को नवीनतम और श्रेष्ठ लर्निंग एक्सपीरियंस प्राप्त हो सके।

भारत में एजुकेशन सेक्टर में बहुत ज्यादा शोध नहीं हुआ है। इसलिए इस सेक्टर में शोध व सुधार की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं। नेक्स्ट एजुकेशन इन्हीं जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। कंपनी के अनुसार अब भारत के छोटे शहरों से भी ई- लर्निंग टूल्स की मांग काफी बढ़ रही है जोकि इस दिशा में एक शुभसंकेत है। अब इस दिशा में और अधिक प्रयास की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों, छात्रों व उनके परिवार को यह बात समझाई जा सके कि ई-लर्निंग शिक्षा का एक बहुत ही सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा शिक्षा का और बड़े स्तर पर प्रसार किया जा सकता है। नए-नए विषयों को आसान माध्यमों से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

सफलता के आठ साल -

इस दौर में एक नई ई-लर्निंग कंपनी का बाजार में खड़ा हो पाना आसान काम नहीं था। कई चुनौतियां थीं जिनका डटकर सामना करना था। इस क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे टाटा, एनआईआईटी, एचसीएल, पियर्सन आदि पहले से स्थापित थीं और इन कंपनियों से नेक्स्ट एजुकेशन का सीधा मुकाबला था। लेकिन नेक्स्ट एजुकेशन की बेहतरीन स्टैटरजी और स्पष्ट निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने का जुनून, कंपनी से जुड़े लोगों की कड़ी मेहनत और नई-नई सुलभ तकनीकों के प्रयोग ने नेक्स्ट एजुकेशन को बाजार में खड़ा कर दिया। आज आठ साल बाद कंपनी का रेवन्यू डेढ़ सौ करोड़ पार कर चुका है। कंपनी आगामी पांच सालों में दस हजार नए स्कूलों से जुडऩा चाहती है और लगभग दस मिलियन छात्रों तक पहुंचने का लक्ष्य रखकर आगे बढ़ रही है। यह अच्छी बात है कि अब स्कूल भी ई-लर्निंग की जरूरत और महत्व को समझ रहे हैं।

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