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'i can fly', क्योंकि ज़िंदगी पर सबका बराबर हक़ है

20th Aug 2015
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एक स्पेशल चाइल्ड की मां होने के नाते मीनू बुधिया उन लोगों की जरुरतों को समझती हैं जो इस क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हैं। उनके निजी अनुभव ने उन्हें मनोवैज्ञानिक विकास के लिए एडलाइफ (AddLife) की स्थापना के लिए प्रेरित किया। कोलकाता में अपनी तरह के इस पहले सेंटर में 30 से ज्यादा मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल क्लिनिकल और नॉन-क्लिनीकल दोनों ही इश्यूज में अपनी एक्सपर्ट सर्विसेज देते हैं। मीनू बताती हैं- 

“मैं लंबे समय से अपने स्पेशल चाइल्ड प्राची के फ्यूचर को लेकर चिंतित थी। मुझे चिंता होती थी कि वह एक स्पेशल चाइल्ड है, वो जब बड़ी होगी तो क्या करेगी? क्या उसे टीवी देखने से मना करूंगी या इवनिंग वॉक पर जाने से रोकूंगी? मैं नहीं चाहती थी कि मेरी बेटी इतनी सुस्त हो। और, मेरे दिगाम में सिर्फ मेरी बेटी ही नहीं थी।” 

इस विचार में उलझते हुए उनके दिमाग में आइडिया आया कि इन स्पेशल नीड्स वाले युवा वयस्कों को सशक्त बनाया जाए। ये भी समाज में एक स्थान के हकदार हैं। मीनू महसूस करती हैं- “उन्हें इस हद तक स्वतंत्र होने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है कि वह किसी शेल्टर्ड वर्कप्लेस में जॉब कर सकें। कुछ अच्छे बच्चे तो कॉरपोरेट में भी नौकरी पा सकते हैं। ये समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें एक्सेप्ट करे और उन्हें सुटेबल जॉब दे। उनके लिए कोटा भी होना चाहिए जैसा पश्चिमी देशों में होता है।”

मीनू की हमेशा से मानव मस्तिष्क और मेडिकल साइंस के अध्ययन में रूचि थी और उन्होंने कॉग्निटिव विहैवियर थेरैपी (संज्ञानात्मक व्यवहार थेरैपी) का कोर्स भी किया। वह स्कूलों और कॉलेजों में स्टूडेंट काउंसलर के तौर पर काम कर चुकी हैं।

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मीनू बुधिया कहती हैं- 

“अपनी छोटी बेटी प्राची को थेरैपी और काउंसिलिंग के लिए ले जाते वक्त मैंने पाया कि लोगों को विभिन्न सेवाओं के लिए कई क्लिनिक्स के चक्कर लगाने पड़ते हैं और इसमें बहुत सारा स्ट्रेस होता है। तभी मैंने एक वन स्टेप क्लीनिक की स्थापना का फैसला किया जहां मेंटल हेल्थ से संबंधित सभी तरह की सर्विसेज उपलब्ध हों।”

पिछले दो साल से एडलाइफ केयरिंग माइंड्स की 4 विंग काम कर रही हैं- क्लिनिकल, ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट, एकेडमिया और माइंडस्पीक। क्लिनिकल विंग साइक्रिस्ट्स, साइकोलॉजिस्ट, स्पेशल एजुकेटर्स, साइकोथेरेपिस्ट्स, स्पीच थेरेपिस्ट्स, हियरिंग और वॉइस क्लिनिक जैसी सेवाओं के साथ मेंटल हेल्थ केयर उपलब्ध कराती है। ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट विंग माता-पिता, टीचर्स, स्टूडेंट्स, कॉरपोरेट ऑडिएंसेज और दूसरे सामाजिक संगठनों के लिए प्रासंगिक मुद्दों पर वर्कशॉप का आयोजन करती है। तीसरा विंग यानी एकेडमिया प्ले थेरैपी, बिहैवियर मॉडिफिकेशन, स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर्स आदि टॉपिक्स पर बेसिक काउंसलिंग कोर्सेज के साथ-साथ कई शॉर्ट टर्म कोर्सेज का कामयाबी से संचालन करती है। चौथा विंग यानी माइंड स्पीक एक ऐसा ओपन फोरम है जो हर महीने प्रासंगिक विषयों पर स्पीक-फ्री सेशन की व्यवस्था करती है जहां जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े लोग हिस्सा ले सकें और विषय पर अपने विचारों को व्यक्त कर सकें।

एडलाइफ केयरिंग माइंड्स की फाउंडर डायरेक्ट मीनू बुधिया कहती हैं- “हम लोग पांचवीं विंग आई कैन फ्लाई को इंट्रोड्यूस करने जा रहे हैं। इसी मुख्य तौर पर यंग स्पेशल नीड्स वाले एडल्ट्स के लिए डिजाइन किया गया है जिन्हें सार्थक वोकेशनल कामों के जरिये प्रेरित करने की जरूरत है। ये उनके खुद के बारे में बोध को बढ़ाएगा जिससे उन्हें अहसास होगा कि उन्होंने समाज में कुछ योगदान दिया है और कुछ सार्थक बनाया है। हम उम्मीद करते हैं कि जो इस ट्रेनिंग को करेंगे वह बाद में अपने घरों से ऑनलाइन काम कर पाने या ऐसे प्रोडक्ट्स बनाने में समर्थ होंगे जिन्हें बाजार में बेचा जा सके। हम आई कैन फ्लाई के लिए नामांकन कराने वाले हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने और उनके उज्जवल भविष्य की उम्मीद करते हैं।”

i.can.fly का मकसद स्पेशल नीड वाले एडल्ट्स (15 साल और उसके ऊपर के) के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है जहां वह अपनी रूचियों और अपने एप्टीट्यूड के बारे में जान सकें, विभिन्न करियर ऑप्शंस के बारे में जागरूक हो सकें और जिससे वह एक अच्छे भविष्य के लिए जरूरी हुनर को ट्रेनिंग के जरिये विकसित कर सकें। ट्रेनिंग से उन्हें सिर्फ आर्थिक रुप से फायदा नहीं होगा बल्कि ये उनमें एक नई दृष्टि का संचार करेगा और उन्हें इस प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में स्वतंत्र बनाएगा।

मीनू बताती हैं- “ये एक स्पेशली डिजाइंड करिकुलम है जिसे उन प्रोफेशनल्स ने बनाया है जो यंग स्पेशल नीड्स एडल्ट्स के साथ सालों से काम कर चुके हैं। करिकुलम सभी डिफरेंटली-एबल्ड एडल्ट्स की बैगर किसी भेदभाव के सेवा करती है। ऐसे एडल्ट्स धीरे धीरे स्किल बेस्ड क्रियाकलापों को सीख सकेंगे और हमारे प्रोडक्शन यूनिट का एख हिस्सा बन सकेंगे या अपने घर या सेटअप पर स्वतंत्र रुप से काम कर सकेंगे। चूंकि अलग-अलग लोग अलग स्पीड से सीखते हैं इसलिए एडलाइफ केयरिंग माइंड्स के टीचर्स और इंस्ट्रक्टर्स उन्हें उनकी अपनी गति से सीखने में मदद करेंगे। टीचर्स और इंस्ट्रक्टर्स एक सहयोग और उत्साह का वातावरण बनाने में मदद करेंगे।”

i.can.fly सिर्फ स्किल बिल्डिंग के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया नहीं कराता बल्कि इन स्पेशल नीड्स वाले एडल्ट्स के पैरेंट्स/केयरगिवर्स को कुछ चैन की सांसें भी देता है। रिसर्च बताता है कि अगर केयरगिवर्स नियमित तौर पर अपने काम से कुछ समय के लिए खुद को अलग नहीं करते हैं तो क्वालिटी केयर प्रभावित हो सकता है।

मीनू एडलाइफ केयरिंग माइंड्स का विस्तार कर रही हैं और अपने सपनों को साकार कर रही हैं। आज उनके चेहरे पर मुस्कान है। मीनू की बड़ी बेटी प्रियम भी अब उनके इस मिशन में उनके साथ जुड़ी हैं।

मीनू की बेटी प्राची ने कुछ दूसरे जरुरतों के लिए कुछ को बहुत ही संवेदनशील बना लिया है। ये एडलाइफ का ही कमाल है, वरना वह इनके बारे में जागरूक नहीं हो पाती। मीनू ठीक ही कहती हैं- 

“भगवान जो कुछ भी करता है, उसके पीछे एक मकसद होता है। प्राची के जरिये उन्होंने मुझे अपने तरीके से समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। मेरा सपना अब काफी बड़ा है। ऊपर वाले को धन्यवाद।”
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