यह होने वाले एक और युद्ध की आहट तो नहीं!

By जय प्रकाश जय
August 20, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:16:30 GMT+0000
यह होने वाले एक और युद्ध की आहट तो नहीं!
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आज से भारतीय सेना प्रमुख लद्दाख के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह भारत और चीन के बीच होने वाले एक और युद्ध की आहट तो नहीं!

<b>फोटो साभार: South China Morning Post</b>

फोटो साभार: South China Morning Post


भारतीय सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत आज, रविवार से तीन दिवसीय लद्दाख यात्रा पर हैं। दोकलम ट्राई जंक्शन पर चीन के साथ चल रही तनातनी के मद्देनजर वह लद्दाख सेक्टर में सीमा पर तैनाती और तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

सेना के सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन महीने में चीन की ओर से ऐसी घुसपैठ की कोशिश होती रहेगी। नवंबर से शुरु होने वाली ठंड के बाद ही चीन की उकसाने वाली हरकतें रुकेंगी। 

भारत के उत्तर-पूर्व से दो देशों की सेनाओं की जिस तरह सरगर्मियां चल रही हैं, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन जिस तरह अपने रुख का इजहार कर रहा है, डोकलाम तनाव को लेकर पिछले कुछ वक्त से रह-रह कर जिस तरह की सूचनाएं मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं, मामला आसान नहीं लगता है। आज से भारतीय सेना प्रमुख लद्दाख के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह भारत और चीन के बीच होने वाले एक और युद्ध की आहट तो नहीं!

भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह तनातनी सीधे टकराव में तब्दील हो सकती है। अमेरिकी संसद की कांग्रेसनल रिसर्च रिपोर्ट (सीआरएस) में भी कुछ इसी तरह का खुलासा करते हुए कहा गया है कि डोकलम में भारत और चीन का गहराता तनाव खुला टकराव का रूप ले सकता है लेकिन ये हालात अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा करेंगे, जिसका चीन पर असर हो सकता है।

भारत और चीन के बीच यह प्रतिद्वंद्विता न सिर्फ दोनों देशों के बीच 2,167 मील लंबी विवादास्पद सीमा पर दिख रही है बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर को भी अपनी चपेट में ले सकती है। उधर, भारतीय सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत आज, रविवार से तीन दिवसीय लद्दाख यात्रा पर हैं। दोकलम ट्राई जंक्शन पर चीन के साथ चल रही तनातनी के मद्देनजर वह लद्दाख सेक्टर में सीमा पर तैनाती और तैयारियों की समीक्षा करेंगे। साथ ही सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ उनकी सैन्य ऑपरेशनल विषयों पर बातचीत होगी।

इसी सेक्टर में स्थित पैंगॉग झील से गुजरने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 15 अगस्त को चीनी सेना भीतर घुस आई थी। उसे खदेड़ने की कवायद में दोनों तरफ से पत्थरबाजी भी हुई। सेना के सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन महीने में चीन की ओर से ऐसी घुसपैठ की कोशिश होती रहेगी। नवंबर से शुरु होने वाली ठंड के बाद ही चीन की उकसाने वाली हरकतें रुकेंगी। भारतीय सेना की कोशिश है कि छोटी मोटी घुसपैठ की घटना गंभीर रूप न ले ले। 15 अगस्त की घटना के बाद इसी सेक्टर के चुसूल में भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों ने फ्लैग मीटिंग की थी। इसमें एलएसी पर शांति व्यवस्था बनाए रखने रखने के उपायों पर विचारों का आदान प्रदान हुआ। लद्दाख सेक्टर में कई ऐसी जगहें हैं जहां चीनी सैनिक अक्सर घुसपैठ कर भारतीय सेना को उकसाते रहते हैं।

उल्लेखनीय है कि क़रीब दो माह से डोकलाम सीमा पर दोनो देशों के बीच गतिरोध बरकरार है। दोनों ही देशों की तरफ़ से इस तनाव को ख़त्म करने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस बीच चीन के सरकारी अख़बार 'ग्लोबल टाइम्स' ने चीनी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' की उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उसने बताया था कि दोनों देशों के बीच गोपनीय बातचीत नाकाम हो गई है। 'ग्लोबल टाइम्स' ने कहा है कि यह पूरी तरह से अफ़वाह है। इसके साथ ही गत नौ अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय ने चीनी मीडिया घरानों से कहा था कि 53 भारतीय सुरक्षाकर्मी और एक बुल्डोज़र अब भी अवैध रूप से चीनी इलाक़े में हैं। इस बीच दालाई लामा ने कहा है कि भारत और चीन के बीच गतिरोध केवल बातचीत के ज़रिए ही ख़त्म किया जा सकता है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने डोकलाम गतिरोध पर भारत को चेताते हुए लिखा है कि भारत मुसीबत को मज़ाक में न ले। साथ ही भारत को चीन कमतर में न आंके। लेकिन वह ये भी लिखता है कि अगर चीन और भूटान के बीच सीमा को लेकर कोई विवाद है तो यह चीन और भूटान के बीच का मुद्दा है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले हफ्ते चीन के उप प्रधानमंत्री और सुषमा स्वराज के बीच डोकलाम के मुद्दे पर नेपाल में चर्चा हो सकती है। इस बीच भारतवंशी ब्रिटिश अर्थशास्त्री और ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य मेघनाद देसाई ने आशंका जतायी है कि डोकलाम को लेकर भारत और चीन में कभी भी एक बड़े स्तर का युद्ध छिड़ सकता है।

मेघनाद दक्षिण एशिया मामलों के जानकार हैं। देसाई ने कहा है कि डोकलाम में भारत और चीन की सेना की उपस्थिति से दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ता जा रहा है। अभी तक डोकलाम विवाद पर किसी का ध्यान नहीं है, जबकि यहां एक महीने के अंदर किसी भी समय युद्ध छिड़ सकता है, जो नियंत्रण से बाहर होगा। मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं कि युद्ध की निश्चित तिथि और घड़ी की भविष्यवाणी करूं, लेकिन यह होगा। युद्ध न सिर्फ डोकलाम, बल्कि हिमालय की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण चीन सागर के कई मोर्चों पर शुरू हो सकता है। दक्षिण चीन सागर के मोर्चे पर युद्ध का मतलब है अमेरिका के साथ लड़ाई। दक्षिण चीन सागर में अमेरिका भारत के साथ खड़ा होगा क्योंकि, भारत बिना अमेरिका के और अमेरिका बिना भारत के सहयोग से यहां चीन के सामने खड़ा नहीं हो सकता।

देसाई का कहना है कि भारत समझता है, वह युद्ध के लिए तैयार है, लेकिन चीन के पास विश्व की सबसे उत्कृष्ट सेना है, जो पहाड़ों पर युद्ध के लिए वे हमसे ज्यादा प्रशिक्षित हैं। इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए भी कत्तई आसाना नहीं मानी जा सकती है। उधर, चीन अब नेपाल पर कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। नयी दिल्ली स्थिति चीनी राजनयिकों ने नेपाली अधिकारियों को इस मुद्दे पर अपना पक्ष बताया है। उससे पूर्व चीनी अफसर ने नवनियुक्त नेपाली अधिकारी को चीन के रुख से अवगत कराया था। चीन का नेपाल के साथ इस विवाद पर चर्चा करना बेहद अहम माना जा रहा है। भारत एक विवादित क्षेत्र में चीन और नेपाल के साथ एक ट्राइजंक्शन शेयर करता है। एक पश्चिमी नेपाल के लिपुलेख में और दूसरा जिनसंग चुली में। लिपुलेख पर भारत और नेपाल दोनों ही दावा करते रहे हैं। वर्ष 2015 में पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिपुलेख के जरिये चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का फैसला लिया था। इस कदम से नेपाल काफी नाराज हुआ था। 

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