संस्करणों
विविध

82 वर्षीय मेडिसिन बाबा मुफ्त में दवाएं बांट कर कर रहे हैं गरीबों का इलाज

गरीबों को फ्री में दवा बाँटने वाले मेडिसिन बाबा...

7th Apr 2018
Add to
Shares
1.6k
Comments
Share This
Add to
Shares
1.6k
Comments
Share

दवाई की बाज़ार में कीमत चाहे कितनी भी हो, लेकिन मेडिसिन बाबा लगभग 10 सालों से गरीब मरीजों को फ्री में दवाईयाँ दे रहे हैं। दवाईयां बांटने के लिए मेडिसिन बाबा दिल्ली की सड़कों पर घूमते रहते हैं। दूसरों के घरों में जाकर बच गई फालतू रखी दवाईयां दान में ले लेते हैं और फिर उन दवाईयों को ज़रूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।

image


ओमकार नाथ शर्मा जी उर्फ़ "मेडिसिन बाबा" ग्रेटर नोएडा, उत्तर-प्रदेश में स्थित कैलाश अस्पताल के ब्लड बैंक में तकनीशियन के पद पर काम करते थे। वर्ष 2008 में उनके सामने हुए उस प्रत्यक्ष हादसे के बाद से ही वे लोगों से दवाईयां एकत्रित करने का काम कर रहे हैं

आज हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहाँ इलाज़ के नाम खुली लूट हो रही है। दवाइयों के दाम को ऐसा लगता है कि जैसे आसमान छू रहे हों। जहां समाज का पैसे वाला तबका इलाज़ और दवाईयां आसानी से ले सकता है वहीं दिहाड़ी मजदूर के रूप में कमाने-खाने वाला तबका दवाईयों के अभाव के चलते दम तोड़ देता है। ऐसे ही समाज के लोगों के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं दिल्ली के 82 वर्ष के बुज़ुर्ग ओमकार नाथ शर्मा जिन्हें लोग "मेडिसिन बाबा" के नाम से जानते हैं।

दवाई की बाज़ार में कीमत चाहे कितनी भी हो, लेकिन मेडिसिन बाबा लगभग 10 सालों से गरीब मरीजों को फ्री में दवाईयाँ दे रहे हैं। दवाईयां बांटने के लिए मेडिसिन बाबा दिल्ली की सड़कों पर घूमते रहते हैं। दूसरों के घरों में जाकर बच गई फालतू रखी दवाईयां दान में ले लेते हैं और फिर उन दवाईयों को ज़रूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।

image


ओमकार नाथ शर्मा जी उर्फ़ "मेडिसिन बाबा" ग्रेटर नोएडा, उत्तर-प्रदेश में स्थित कैलाश अस्पताल के ब्लड बैंक में तकनीशियन के पद पर काम करते थे। वर्ष 2008 में उनके सामने हुए उस प्रत्यक्ष हादसे के बाद से ही वे लोगों से दवाईयां एकत्रित करने का काम कर रहे हैं, जब दिल्ली के लक्ष्मीनगर में एक निर्माणाधीन मेट्रो पुल गिर गया था उसमें दो मजदूरों की मौत हो गयी थी और कई अन्य घायल हो गये थे। घायलों का इलाज़ सार्वजनिक अस्पतालों में करवाया गया जहाँ ओमकार नाथ ने घायलों को पर्याप्त चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण पीड़ित पाया।

2008 के हादसे के बाद से लगभग पिछले 10 वर्षों से मेडिसिन बाबा प्रतिदिन भगवा कुर्ता पहन कर अपने घर से निकलते हैं जिस पर लिखा होता है,"चलता फिरता दवा बैंक। गरीबों को मुफ्त दवाईयाँ।" ओमकार दिल्ली के मंगलापुरी इलाके में किराये के घर में अपनी पत्नी और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहते हैं।

image


मेडिसिन बाबा प्रतिदिन अपने घर से सुबह 6 बजे निकल जाते हैं। 12 वर्ष की आयु में एक कार दुर्घटना के कारण वो दोनों पैरों से अपंग हो गये थे, लेकिन इन सब परेशानियों के बावजूद भी वह दिल्ली के उच्च वर्गीय और निम्न वर्गीय घरों से दवाईयां इकट्ठा करने के लिए 5-7 किमी पैदल चलते हैं।

मेट्रो रेल का किराया बहुत अधिक होने के कारण मेडिसिन बाबा उसे वहन नहीं कर सकते हैं और इसीलिए वे वरिष्ठ नागरिक पास की मदद से बस द्वारा यात्रा करते हैं। दिल्ली के दूरदराज के इलाकों में जहां बसें नहीं चलती हैं, वहां मेडिसिन बाबा पैदल ही यात्रा करते हैं।

image


डीएनए न्यूज़ को दिए हुए एक इंटरव्यू में ओमकार नाथ जी ने बताया कि,"मैं हर महीने 4-6 लाख रुपये के मूल्यों की दवाएं वितरित करता हूं।" पिछले कुछ सालों में, मीडिया रिपोर्ट्स के कारण 'मेडिसिन बाबा' ने लोकप्रियता हासिल की है। अब शहर में लोगों ने उनकी मदद के लिए कुछ स्थानों जैसे कि कॉलेज और मंदिरों के बाहर दवा पेटियां लगवाई हैं, जहाँ लोग उन दवाइयों को छोड़ते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं है।

मेडिसिन बाबा दवाइयों से अपने लिए कोई भी पैसे बनाने का काम नहीं करते हैं। मेडिसिन बाबा जैसे बहुत कम लोग होते हैं, जो इतनी ज्यादा उम्र हो जाने के बाद भी नि:स्वार्थ भाव से समाज के एक खास तबके की इस तरह सेवा कर रहे हैं। मेडिसिन बाबा का बस एक यही सपना है कि वे जरूरतमंद लोगों के लिए एक दवाई बैंक स्थापित कर सकें।

ये भी पढ़ें: शिमला के ज़रूरतमंद लोगों की जी-जान से सेवा करने वाले बॉबी भाई

Add to
Shares
1.6k
Comments
Share This
Add to
Shares
1.6k
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें