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ख्याति के लिए उनका जज्बा बना सफलता का ट्रंप कार्ड

- बचपन से ही स्केचिंग का शौक था ख्याति को- नौकरी के साथ रखी ख्यातिवर्क्स की शुरूआत- ख्यातिवर्क्स की हर वस्तु हैंडमेड है।

Ashutosh khantwal
22nd Sep 2015
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कुछ लोग अपने सपनो की उड़ान में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आने देना चाहते। वो निरंतर परिश्रम से अपने कार्यों का निर्वाहन करते हैं। ऐसा जरूरी नहीं कि सबकुछ छोड़कर किसी एक क्षेत्र में लगकर ही कोई सफल हो सकता है आप अपने पैशन को अपनी नौकरी के साथ भी उसी बखूबी के साथ पूरा कर सकते हैं और एक ऐसी ही एक मिसाल हैं ख्याति मेहरा जिन्होंने अपने परिश्रम के बल पर अपने बचपन के शौक को तो पूरा किया ही साथ ही वे अपनी नौकरी भी सफलतापूर्वक कर रहीं हैं और दोनों ही क्षेत्रों में उनकी उनके बेहतरीन काम के लिए सराहना भी हो रही है।

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अमृतसर में पली-बड़ी ख्याति पेशे से आईटी प्रोफेश्नल हैं उ्न्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक था, पढ़ाई में वे काफी अच्छी थीं और गणित व विज्ञान उनके प्रिय विषय थे इसी के चलते उन्होंने विज्ञान में अपने कैरियर को आगे बढ़ाने की सोची। 2004 में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने आईटी कंपनी में काम करना शुरू किया और आज वे बतौर टेक्निकल मैनेजर के तौर पर काम कर रहीं हैं। कला की बात की जाए तो जब वे मात्र 6 साल की थीं तो एक बार उन्होंने एक भरतनाट्यम डांसर की फोटो का इतना बेहतरीन स्केच बनाया कि उनके माता पिता को यकीन ही नहीं हुआ कि ये उनकी इतनी छोटी बेटी ने बनाया है। ख्याति ने स्कूल टाइम में भी लगातार ड्राइंग करनी जारी रखी। कला के प्रति उनका प्रेम लगातार बढ़ता चला गया। कैलीग्राफी आर्ट की तरफ भी उनका काफी रुझान था उन्होंने ज्यादातर चीजें खुद ही सीखीं किसी टीचर से नहीं वे स्वयं लगी रहती और अपनी कला को निखारती। कलाकृतियों में रंग भरना भी उन्हें बेहद पसंद था और वे हमेशा अपने साथ स्केच पेन रखतीं।

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2009 में उनकी शादी हुई और उसके बाद ही सफर शुरू हुआ ख्यातिवर्क्स का । एक बार वे इंटरनेट में सर्फ कर रही थी उसी दौरान उनकी नजर साइडलिक अार्टवर्क पर पढ़ी और जिस तरह से आर्टिस्ट ने स्केच पेन, क्रेयोन्स और विभिन्न तरह के कलरिंग मैटीरियल का प्रयोग किया था वो उन्हें बहुत आकर्षक लगा और उन्हें प्रेरणा मिली। उसके बाद ख्याति ने तय किया कि वे अपनी कला को भी लोगों तक पहुंचाएंगी और ख्यातिवर्क्स की उन्होंने शुरूआत की । काम आसान नहीं था क्योंकि उन्हें घर की जिम्मेदारियों को भी निभाना था नौकरी भी करनी थी और अपना नये काम को भी अंजाम देना था। लेकिन ख्याति ने सब कुछ बड़ी बखूबी से निभाया । उन्होंने खुद ही मग्स , नोटबुक्स , बुकमार्क्स, ग्रीटिंग कार्ड्स को डिजाइन किया जिसको लोगों ने खूब सराहा। इसके अलावा उन्होंने कई नई तरह की कलाकृतियां बनाई और लोगों के सामने उन्हें रखा। ख्यातिवर्क्स कहीं भीड़ में गुम न हो जाए इसके लिए ख्याति ने प्रोड़क्ट क्रियेटिंग तकनीक पर काम करना शुरू किया। वे खुद अकेली ही अपने काम को करती हैं इस काम को पूरा करने में वो किसी की सहायता नहीं लेती, वो हर काम को खुद अपने अंदाज में और अपनी तरह से करना चाहतीं हैं।

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ख्यातिवर्क्स की हर वस्तु हैंडमेड है।

2012 में दिल्ली हाट में लगी उनकी पहली प्रदर्शनी को काफी सराहना मिली 3 दिन चली इस प्रदर्शनी में उनके काम की काफी तारीफ हुई। कई चीजों को एकसाथ मैनेज करना इतना आसान काम नहीं होता लेकिन ख्याति पूरी मेहनत के साथ अपने काम में लगी हुई हैं और अपने काम के बल पर वे अपनी एक अलग पहचान बना रहीं हैं। उन्हें उनके काम में उनके परिवार का पूरा सहयोग मिलता है और यही उन्हें हर दिक्कत का सामना करने की शक्ति देता है।

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