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अपनी मेहनत से 17 वर्षीय तुषार ने नाम दर्ज किया गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड में

Pooja Goel
23rd Nov 2015
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दुनियाभर में कई लोगों को विभिन्न प्रकार की वस्तुओं, जैसे पुराने सिक्के, नोट, डाकटिकट या फिर हस्ताक्षर इत्यादि को संग्रह करने का शौक होता है लेकिन जब यह शौक कुछ अलग तरह के जुनून में तब्दील हो जाता है तो संग्रहकर्ता को शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगता है। शौक-शौक में शुरू किये गए ऐसे ही एक संग्रह के संग्रहकर्ता आज अपने पेंसिलों के संग्रह के चलते गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकाॅर्डस में अपना नाम लिखवाने में कामयाब हुए हैं। हम बात कर रहे हैं दिल्ली के 17 वर्षीय किशोर तुषार लखनपाल की जो अपने करीब 20 हजार पेंसिलों के संग्रह के चलते आज दुनियाभर में मशहूर हो गए हैं। इसके अलावा एक और रोचक बात यह है कि उनके इस संग्रह में सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि दुनियाभर के करीब 60 से भी अधिक देशों में निर्मित पेंसिल मौजूद हैं।

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दिल्ली के वसंत कुंज स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) के 12वीं कक्षा के छात्र तुषार लखनपाल ने हाल ही में उरुग्वे के एमिलियो अरीनास के 72 देशों की 16260 पेंसिलों के विश्व रिकाॅर्ड को तोड़ते हुए 19824 पेंसिलों के अपने संग्रह के साथ शीर्षस्थान पर अपना नाम लिखवाने में सफलता पाई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 14 अप्रैल 1998 को जन्मे 17 वर्षीय तुषार को संग्रह प्रारंभ किए हुए अभी सिर्फ 14 वर्ष ही हुए हैं और एमिलियों वर्ष 1956 से पेंसिलों के संग्रहण के कार्य में लगे हुए थे। इसके अलावा तुषार के संग्रह में कोई भी दो पेंसिलें एक जैसी नहीं हैं।

योरस्टोरी से हुई बातचीत में तुषार बताते हैं कि उन्होंने करीब तीन वर्ष की आयु में पेंसिलों को जमा करना प्रारंभ किया था। तुषार बताते हैं, ‘‘जब मैं छोटा बच्चा था तब भी मैं विभिन्न प्रकार की पेंसिलों को लेकर काफी सतर्क रहता था और मुझे कहीं से भी उपहार आदि में कोई पेंसिल मिलती थी तो मैं उसे लिखने में इस्तेमाल न करके अलग से उठाकर रख लेता था। समय के साथ मेरा यह शौक एक जुनून में बदल गया और मैं पेंसिलों को इकट्ठा करने लगा। यह उसी जुनून का नतीजा है कि आज मैं इस मुकाम पर हूँ।’’

तुषार वर्ष 2009 से लगातार बीते 6 वर्षों से भारत में पेंसिलों का सबसे बड़ा संग्रह करने वाले व्यक्ति के रूप में लिम्का बुक आॅफ रिकाॅर्डस में अपना नाम दर्ज करवाते आ रहे हैं। तुषार बताते हैं, ‘‘30 जून 2014 को मेरे संग्रह में 60 से भी अधिक देशों की 14279 पेंसिलें मौजूद थीं जो भारत में सबसे अधिक संख्या थी। सबसे पहले लिम्का बुक आॅफ रिकाॅर्डस ने वर्ष 2009 में मेरे संग्रह को मान्यता देते हुए अपनी किताब में स्थान दिया और इसके बाद से वर्ष 2010, 2012, 2013, 2014 और इसी वर्ष 2015 में मेरा नाम लिम्का बुक आॅफ रिकाॅर्डस में दर्ज किया गया है।’’ तुषार के इस संग्रह में एशियाई, अफ्रीकी, कैरिबियन, यूरोपीय, मध्य-पूर्व के देशों और उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के अलावा पैसिफिक देशों में निर्मित पेंसिलें भी शामिल हैं।

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तुषार के इस संग्रह में बिल्कुल सामान्य से लेकर बहुत ही असामान्य पेंसिलें भी मौजूद हैं। इनमें से कई पेंसिलें तो ऐसी हैं जिनके बारे में हम कल्पना ही नहीं कर सकते और येे अविश्वसनीय आकार और माप की हैं। इनके पास मौजूद सबसे छोटी पेंसिल सिर्फ 25 मिलीमीटर है जिसका व्यास मात्र 2 मिलीमीटर का है और सबसे बड़ी पेंसिल की लंबाई 548 सेंटीमीटर यानी कि करीब 18 फिट की है और इसका व्यास 29 सेंटीमीटर का है। अपने संग्रह के बारे में बताते हुए तुषार कहते हैं, ‘‘मेरे इस संग्रह में विभिन्न रंगों और आकार की पेंसिलों के अलावा रत्न जडि़त पेंसिलें, विभिन्न तरह की खुशबू वाली पेंसिलें, कई मशहूर व्यक्तित्वों का आभास करवाती पेंसिलें, कई पुरानी इमारतों के आकार की पेंसिल, विभिन्न झंडों का आभास करवाती पेंसिलें मौजूद हैं। इसके अलावा मेरे संग्रह में तापमान में होने वाले परिवर्तन को दर्शाने वाली पेंसिल, आॅस्ट्रिया के विभिन्न साम्राज्यों के मुकुटों के आकार की पेंसिल के अलावा स्पाइडरमैन, बार्बी, टाॅम एंड जैरी इत्यादि जैसे कार्टून चरित्रों की भी पेंसिल मौजूद हैं।’’

अपने इस संग्रह की अन्य विशेषताओं के बारे में याॅरस्टोरी को बताते हुए तुषार कहते हैं, ‘‘मेरे पास बेशकीमती गोल्ड प्लेटेड पेंसिल के साथ-साथ स्वरोवस्की जडि़त पेंसिल भी है जो अपने आप में बिल्कुल अनूठी है। मेरे माता-पिता ने मुझे पेंसिलों की इस जोड़ी को खरीदने पर 400 पाउंड खर्च करे हैं। इसके अलावा मेरे पास अखबार और हैंडमेड पेपर से बनी हुई पेंसिल भी मौजूद है।’’ इन सबके अलावा तुषार के पास लिखने में अक्षम बच्चों के लिये विशेष रूप से तैयार की गई कुछ बेहद विशेष पेंसिल भी मौजूद हैं।

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लेकिन इस पूरे संग्रह में से दो पेंसिल ऐसी हैं जो तुषार के दिल के सबसे करीब हैं और जिनकी एक बिल्कुल ही जुदा कहानी है। इन पेंसिलों के बारे में तुषार बताते हैं, ‘‘किसी समय इन दो पेंसिलों को ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलीजाबेथ द्वितीय अपने लिखने के लिये इस्तेमाल किया करती थी। इसी वजह से ये दो पेंसिल मेरे दिल के सबसे करीब हैं और मेरे इस संग्रह की सबसे कीमती पेंसिलों में से हैं।’’

फिलहाल तुषार के पास अपने संग्रह में दुनिया के करीब 67 देशों में निर्मित पेंसिलों का खजाना है और वे इसे और भी अधिक विस्तार देना चाहते हैं। तुषार कहते हैं, ‘‘मेरा सपना है कि एक दिन मेरे पास दुनिया के नक्शे में मौजूद प्रत्येक देश में बनी हुई पेंसिल मौजूद हो और मुझे उम्मीद है कि अपने परिजनों और शुभचिंतकों की बदौलत मैं ऐसा करने में सफल रहूंगा।’’ एक काॅमर्शियल पायलट आशीष लखनपाल के पुत्र तुषार रोजाना इंटरनेट पर घंटों अजूबी पेंसिलों को तलाशने में व्यतीत करते हैं और फिर अपने माता-पिता के सहयोग से वे उन्हें अपने संग्रह का हिस्सा बनाते हैं। तुषार आगे कहते हैं, ‘‘मेरे पिता जब भी कभी बाहर जाते थे तो वे लौटते हुए मेरे संग्रह के लिये पेंसिल जरूर लाते थे। इसके अलावा मेरे कई दोस्त और मिलनेवाले मेरे इस सपने को पूरा करने में अपनी तरफ से पूरी मदद कर रहे हैं और उनमें से कोई भी जब भी किसी विदेश यात्रा पर जाता है तो वह मेरे संग्रह के लिये वहां से नई पेंसिल जरूर लेकर आता है।’’

अपने इस संग्रह के दम पर तुषार ने कुछ दिन पूर्व 14 अक्टूबर को उरुग्वे के एमिलियो अरीनास के 16260 पेंसिलों के विश्व रिकाॅर्ड को तोड़ते हुए गिनीज बुक में अपना नाम करवाया है। तुषार बताते हैं, ‘‘गिनीज वर्ल्ड रिकाॅर्ड के लंदन स्थित कार्यालय ने मेरे इस संग्रह को विश्व में पेंसिलों के सबसे बड़े संग्रह के रूप में अपनी मान्यता दे दी है। उन्होंने अपने बेहद सख्त मानदंडों के आधार पर मेरे समूचे संग्रह की विस्तृत गिनती करने के अलावा पूरी कार्रवाई की एक पेंसिल बनाने वाली कंपनी के प्रतिनिधि, एक सरकारी अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े एक वरिष्ठ नागरिक की देखरेख में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्होंने अपनी वेबसाइट पर भी मेरे इस संग्रह को ‘पेंसिलों के विश्व के सबसे बड़े संग्रह’’ के रूप में स्थान दिया है।’’

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17 वर्षीय यह किशोर भविष्य में अपने इस जुनून को और अधिक विस्तार देना चाहता है और इसका सपना किसी दिन एक पेंसिल म्यूजि़यम की स्थापना करने का है। तुषार याॅरस्टोरी से कहते हैं, ‘‘मैं एक दिन अपने इस संग्रह को एक म्यूजि़यम का रूप देना चाहता हूँ। इससे पहले सिर्फ यूके में एक पेंसिल म्यूजियम मौजूद है और यह दुनिया में अपनी तरह का दूसरा म्यूजि़यम होगा जहां बच्चे विभिन्न प्रकार की पेंसिलों को देख और महसूस कर सकेंगे।’’


वेबसाइट: http://tusharlakhanpal.com

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