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कॉलेज में पहली बार देखा था कम्प्यूटर, आज हैं एक ग्लोबल कंपनी के सीटीओ

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का लड़का इस तरह बन गया एक ग्लोबल प्रोडक्ट सर्विस कंपनी का सीटीओ...

25th Jan 2018
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प्रशांत उत्तर प्रदेश में उरई के पास एक गांव के रहने वाले हैं। प्रशांत के पिता एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उनके गांव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल था, इसलिए आगे पढ़ने के लिए वह उरई आ गए। उनके परिवार की आर्थिक हालत सामान्य थी, इसलिए उनकी पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। 

ग्लोबल प्रोडक्ट सर्विस कंपनी Zomato के CTO प्रशांत पराशर

ग्लोबल प्रोडक्ट सर्विस कंपनी Zomato के CTO प्रशांत पराशर


स्नैपडील में काम करने के बाद प्रशांत ने अपने स्टार्टअप पर काम करने के बारे में सोचा। उन्होंने 2012 में 'कार्टमैजिक' नाम के स्टार्टअप पर काम शुरू किया। प्रशांत कहते हैं कि स्टार्टअप में आप रोज कुछ नया सीखते हो और यही प्रॉफिट है।

क्या कोई सोच सकता था कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का लड़का, जिसकी तालीम हिंदी माध्यम में हुई हो, वह एक ग्लोबल प्रोडक्ट सर्विस कंपनी का सीटीओ बन जाएगा। जिसने 12वीं के बाद पहली बार कम्प्यूटर देखा हो, वह कम्प्यूटर साइंस में इतना बड़ा नाम कमा लेगा। इन सब बातों को सच कर दिखाने वाली शख्सियत का नाम है, प्रशांत पराशर। हाल में, प्रशांत जोमेटो कंपनी के सीटीओ हैं। आइए जानते हैं कि कैसे प्रशांत ने तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी सफलता की कहानी गढ़ी।

प्रशांत कहते हैं कि गांवों की जीवनशैली ऐसी होती है, जहां किसी को जल्दबाजी नहीं होती। लोगों के पास अपनी जिंदगी के बारे में बैठकर सोचनी की फुर्सत होती है। प्रशांत को गांव के इस माहौल से हमेशा से लगाव था। गर्मी की छुट्टियों में प्रशांत अपने परिवार से मिलने गांव जाते थे और उन्हें वहां समय बितान पसंद था।

न्यूजेन कंपनी में काम के दौरान प्रशांत

न्यूजेन कंपनी में काम के दौरान प्रशांत


प्रशांत उत्तर प्रदेश में उरई के पास एक गांव के रहने वाले हैं। प्रशांत के पिता एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उनके गांव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल था, इसलिए आगे पढ़ने के लिए वह उरई आ गए। उनके परिवार की आर्थिक हालत सामान्य थी, इसलिए उनकी पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। प्रशांत हमेशा से ही गणित और विज्ञान में अच्छे रहे। 

प्रशांत की मां, बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक थीं और इसलिए उन्होंने हमेशा ख्याल रखा कि प्रशांत को एक अच्छे स्तर की शिक्षा मिल सके। प्रशांत एक होनहार छात्र के रूप में पूरे स्कूल में लोकप्रिय भी थे। 12वीं के बाद ही प्रशांत को आईआईटी-जेईई के बारे में पता चला। उन्हें यह तक नहीं पता था कि इंजीनियर कैसे बनते हैं? प्रशांत ने अपने माता-पिता को मनाया और आईआईटी के लिए तैयारी शुरू की।

बचपन में अपने माता-पिता के साथ प्रशांत

बचपन में अपने माता-पिता के साथ प्रशांत


हालांकि, प्रशांत आईआईटी में तो नहीं पढ़ सके, लेकिन 1998 में प्रशांत ने झांसी के एक इंजीनियिरिंग कॉलेज में दाखिला लेकर कम्प्यूटर साइंस का कोर्स चुना। कॉलेज का माहौल प्रशांत के लिए बिल्कुल अगल था। प्रशांत ग्रामीण क्षेत्र से आते थे और उनकी शुरूआती पढ़ाई हिंदी माध्यम में हुई थी और कॉलेज के अंग्रेजी से भरे माहौल से तालमेल बिठाना उनकी पहली चुनौती थी। यहां तक कि कॉलेज आकर ही उन्होंने पहली बार कम्प्यूटर देखा था। प्रशांत ने बेहिसाब मेहनत की और कम्प्यूटर लैंग्वेज सीखी। तीसरे सेमेस्टर में उन्होंने कम्प्यूटर लैंग्वेज की एक प्रतियोगिता भी जीती।

कैंपस प्लेसमेंट में नौकरी न मिलने के बाद प्रशांत काफी निराश हुए। वह बिना नौकरी के घर नहीं लौटना चाहते थे, इसलिए वह दिल्ली आ गए और अपने सीनियरों के स्टार्टअप्स से जुड़कर काम करने लगे। कुछ वक्त बाद उनकी नौकरी न्यूजेन सॉफ्टवेयर कपंनी में लगी और प्रशांत के मुताबिक, यह उनकी जिंदगी के सबसे खुशनुमा पलों में से एक था।

जोमैटो में प्रशांत

जोमैटो में प्रशांत


न्यूजेन से पहले प्रशांत ने डिफेंस रिसर्च डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) में अप्लाई किया था और न्यूजेन में कुछ महीने काम करने के बाद उन्हें डीआरडीओ से ऑफर मिला और उन्होंने न्यूजेन की नौकरी छोड़ दी। डीआरडीओ में वह बतौर गैजेटेड ऑफिसर नियुक्त हुए। प्रशांत कहते हैं कि किसी भी मध्यम वर्ग के आदमी के लिए इस तरह की नौकरी, एक सपने की तरह होती है। हालांकि, तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद प्रशांत को नौकरी रास नहीं आई और वह वापस न्यूजेन में आ गए। नौकरी और फील्ड बदलने का यह सिलसिला जारी रहा और प्रशांत ने काफी अनुभव हासिल किया।

2011 में प्रशांत स्नैपडील का हिस्सा बने। उस वक्त स्नैपडील काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था। प्रशांत बताते हैं कि उस समय तक कंपनी में सिर्फ दो ही सीनियर लेवल के तकनीक विशेषज्ञ थे, जिनमें से एक प्रशांत थे। प्रशांत कहते हैं कि स्नैपडील में काम करने के दौरान ही उन्हें इंटरनेट की असली ताकत का अहसास हुआ। यहीं पर उन्होंने ई-कॉमर्स की बारीकियां सीखीं।

स्नैपडील में काम करने के बाद प्रशांत ने अपने स्टार्टअप पर काम करने के बारे में सोचा। उन्होंने 2012 में 'कार्टमैजिक' नाम के स्टार्टअप पर काम शुरू किया। प्रशांत कहते हैं कि स्टार्टअप में आप रोज कुछ नया सीखते हो और यही प्रॉफिट है। प्रशांत का यह स्टार्टअप प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ। स्नैपडील के सीईओ अमिताभ मिश्रा को इस बारे में पता चला और उन्होंने प्रशांत को स्नैपडील में वापस आने का ऑफर दिया। प्रशांत ने ऑफर स्वीकार कर लिया। 2015 में प्रशांत ने आगे बढ़ने के बारे में सोचा और उन्होंने 'जोमेटो' के फाउंडर और सीईओ दीपेंद्र गोयल से बात की।

अपनी फैमिली के साथ प्रशांत

अपनी फैमिली के साथ प्रशांत


दीपेंद्र और प्रशांत की मुलाकात पहले भी हो चुकी थी। प्रशांत को कंपनी में सीटीओ के पद के लिए ऑफर मिला। प्रशांत कहते हैं कि जोमेटो, एक ग्लोबल प्रोडक्ट कंपनी थी, जो बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी। प्रशांत ने बताया कि जोमेटो में काम का माहौल बहुत अच्छा था और इसलिए ही वह अपना बेहतरीन योगदान दे पाए। आज जोमेटो का मार्केट में और प्रशांत का इंडस्ट्री में एक ऊंचा मुकाम है। प्रशांत कहते हैं कि अब अगर वह एक नई शुरूआत करेंगे तो वह सामाजिक क्षेत्र के किसी काम के लिए होगी। प्रशांत मानते हैं कि तकनीक एक ऐसी चीज है, जो मानवता के विकास में मददगार होती है।

यह भी पढ़ें: IIT में पढ़ते हैं ये आदिवासी बच्चे, कलेक्टर की मदद से हासिल किया मुकाम

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