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प्रेरणा ली पिता से, मेहनत की और मिसाल बनीं दूसरों के लिए

2000 हजार करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया1 लैबोरेटरी से शुरू किया था कारोबार7 देशों में Metropolis के 800 सेंटर और 125 लैबोरेटरी महिला होने के नाते ज्यादा मेहनत की अमीरा ने

Harish Bisht
20th Jul 2015
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किसी काम में संतुष्टि बहुत जरूरी होती है लेकिन अगर कोई अपने काम से संतुष्ट ना हो तो वो ऐसा रास्ता तलाशता है जो कई बार दूसरों को भी रास्ता दिखा जाता है। डॉक्टर सुशील शाह ने 1980 में मेडिकल स्कूल से ग्रेजुएट किया लेकिन वो देश की अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट नहीं थे। तो उन्होने तय कर लिया कि वो अपने मरीजों का इलाज नई तकनीक के सहारे करेंगे जो बाजार में उपलब्ध होंगी। इसके लिए उन्होने अमेरिका का रूख किया ताकि वो वहां जाकर फैलोशिप के साथ विभिन्न तरीकों और प्रक्रियाओं को पढ़ाई के जरिये समझ सकें। जब वो वापस लौटे तो उन्होने पैथोलॉजी लैबोरेटरी की स्थापना की और उसका नाम रखा ‘डॉ. सुशील शाह लैबोरेटरी’। ये काम उन्होने अपने गैराज से शुरू किया और रसोईघर को उन्होने क्लिनिक के तौर पर इस्तेमाल किया।

अमीरा शाह

अमीरा शाह


आज के दौर में हम भले ही थायराइड परीक्षण, फर्टिलिटी परीक्षण और विभिन्न हार्मोनल परीक्षण के बारे में जान गए हों लेकिन 80 के दशक में लोगों को इनकी कम जानकारी थी। वो पहले व्यक्ति हैं जिन्होने इस तरह के परीक्षण को शुरू किया। उन्होने इस काम की शुरूआत बहुत ही छोटे स्तर से की और अपना ध्यान अपनी सेवाओं को देने में लगाया। आज उनके इस काम को 35 साल की उनकी बेटी अमीरा संभाल रही हैं। वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुकी उनकी ये कंपनी जो एक पैथोलॉजी लैबोरेटरी से शुरू हुई थी आज ये 2000 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी है। अमीरा जब 21 साल की थी तो उनको ये नहीं पता था कि उनको आगे जिंदगी कैसे बितानी है वो अनुभवहीन थीं।

अमीरा ने न्यूयॉर्क में गोल्डमैन साक्स के लिए काम किया। हालांकि ये प्रतिष्ठित जगह थी और उनके दोस्त भी उनकी इस उपलब्धि से ईर्ष्या करने लगे थे लेकिन उनको इस काम में मजा नहीं आ रहा था। हालांकि न्यूयॉर्क में रहना उनको पसंद आ रहा था लेकिन वित्तिय सेवाओं वाला ये क्षेत्र शायद उनके लिये था ही नहीं। इसलिए उन्होने बिना सोचे समझे अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होने एक स्टार्टअप पर काम शुरू कर दिया जिसमें सिर्फ 5 कर्मचारी थे। यहां उन्होने कई तरह के अनुभव हासिल किये। धीरे धीरे अमीरा का रूझान कुछ सार्थक काम करने के लिए होने लगा। इस सब के बावजूद अमीरा संतुष्ट नहीं थी तब उन्होने अपने पिता से सलाह लेने का फैसला लिया।

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जब अमीरा ने अपने पिता से बात की तो उन्होने उनसे एक सवाल किया कि वो क्या बनना चाहती हैं एक अच्छा प्रबंधक या फिर एक उद्यमी। जिसका अमीरा के पास कोई जवाब नहीं था क्योंकि वो नहीं जानती थी दोनों में अंतर क्या होता है। इसके बाद उनके पिता ने उनको समझाया कि अगर उनको बढ़िया करियर, प्रतिष्ठा और पैसा चाहिए तो उनको अमेरिका में ही रहना चाहिए क्योंकि वहां पर इन चीजों के लिए बेहतर मौके हैं लेकिन अगर वो अपनी छाप दूसरों पर छोड़ना चाहती हैं और उनका दिल और दिमाग दोनों कंपनी के लिए धड़कते हैं जहां पर सिर्फ काम ही महत्व रखता है तो उनको उद्यमी बनना चाहिए। इसके लिए उनको भारत लौट आना चाहिए। अमीरा ने अपने पिता की बात सुनी और उद्यमी बनने की चाहत में साल 2001 में भारत लौट आईं।

अमीरा भारत तो लौट आई थी लेकिन उनको ये फैसला विवादित लगने लगा था। क्योंकि उस वक्त भारत को उभरता हुआ बाजार नहीं माना जा रहा था, उद्यमियता ना के बराबर थी ये उनके लिए सांस्कृतिक धक्का भी था। क्योंकि उन्होने कभी भी भारत में काम नहीं किया था। उनके पिता कि पैथोलॉजी लैबोरेटरी में होने वाले कोई भी फैसले उनके पिता लेते या फिर उनका कोई विश्वासपात्र लेता था। सभी चीजें केंद्रीत थीं। जहां पर कोई भी कंप्यूटर, ई-मेल सिस्टम जैसी कई चीजें नहीं थीं। यहां पर सिर्फ एक आदमी बैठता जो फोन पर सभी जवाब देता था। तभी अमीरा को लग गया था कि इस तरह विस्तार नहीं हो सकता। कोई एक व्यक्ति ही अकेले सारे फैसले नहीं ले सकता। तब वहां कोई व्यवस्था नहीं थी और सब कुछ मनमाने तरीके से चल रहा था।

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डॉ. सुशील शॉह लैबोरेटरी दक्षिण मुंबई में 1500 वर्ग फीट में चलाया जा रहा था। जहां पर उसके तय ग्राहक थे और उसकी अपनी एक प्रतिष्ठा भी थी। दक्षिण मुंबई में ये अकेली लैबोरेटरी थी। अमीरा के पिता चाहते थे कि पूरे भारत में वो अपनी लैबोरेटरी की एक श्रृंखला बनाएं लेकिन इसको जमीनी स्तर पर कैसे किया जाए वो ये नहीं जानते थे। तब अमीरा ने इस काम में बदलाव लाने का फैसला लिया। सबसे पहले उन्होने तय किया कि वो अपने पिता के इस कारोबार को कंपनी के ढर्रे पर चलाएंगी। इसके लिए उन्होने नई प्रतिभा, नये विभाग और डिजीटल संचार के साधनों का इस्तेमाल के बारे में सोचा। हालांकि ये सब अमीरा के लिए नया था। लेकिन इन सब बदलाव के लिए उनके पिता की सहमति जरूरी थी। इसके लिए उन्होने सबसे पहले ग्राहक सेवा केंद्र में काम करना शुरू किया जहां पर उन्होने मरीजों की दिक्कतों को समझा हर दिन अलग अलग मुद्दों का सामना करना सीखा। इसके साथ साथ उन्होने धीरे धीरे अपने विचारों को हकीकत में बदलने का काम भी जारी रखा। क्योंकि एक ओर वो जमीनी हकीकत से रूबरू हो रही थीं तो दूसरी ओर वो उन जरूरतों को पूरा करने के रास्ते भी तलाश रही थीं।

वक्त के साथ अमीरा अपने काम को लेकर काफी गंभीर हो गई और उन्होने तय किया कि विकास के लिए अब गंभीरता से प्रयास करने होंगे। दक्षिण मुंबई में 25 सालों के दौरान उनके पिता ने लैबोरेटरी के क्षेत्र में अपनी एक प्रतिष्ठा बनाई थी। इन लोगों को मालूम था कि शहर में और भी दूसरी कई जानी मानी लैबोरेटरी हैं इसलिए उन्होने सबसे पहले अपनी लैबोरेटरी ‘डॉ. सुशील शाह लैबोरेटरी’ का नाम बदल कर Metropolis रखा। क्योंकि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस क्षेत्र में उतर गई थीं। जिसके बाद अमीरा की कंपनी ने ऐसी लैबोरेटरी की तलाश शुरू कर दी जो इनके साथ काम कर सके और वो उसे Metropolis के नाम से चलायें। साल 2004 में उनकी ये खोज पूरी हुई और सबसे पहले उन्होने चैन्नई की एक लैबोरेटरी के साथ ऐसा समझौता किया। डॉ. श्रीनिवासन उनके तय किये मानदंड पर सही बैठते थे। उसके बाद ये सिलसिला चल निकला और आज Metropolis ने 25 ऐसी भागीदारियां की हैं।

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Metropolis ने सबसे पहले साल 2006 में निवेश प्राप्त किया। ये निवेश किया था आईसीआईसीआई ने। इसके बाद साल 2010 में अमेरिकी कंपनियों ने Metropolis में बड़ा निवेश किया। अमीरा के मुताबिक उनको पैसे की सख्त जरूरत थी क्योंकि उनको दूसरी कंपनियों के शेयरों का अधिग्रहण करना था जो कर्ज जुटा कर संभव नहीं था। अमीरा के मुताबिक वो किसी कारोबारी परिवार से ताल्लुक नहीं रखती थी जिनके पास निवेश के लिए खूब पैसा हो। इन लोगों ने अपने मुनाफे को निवेश में लगाया ताकि उनके लैबोरेटरी का कारोबार यूं ही आगे बढ़ता रहे। ये आज के दौर में स्टार्टअप की तरह नहीं था कि कंपनी की आय 2 करोड़ की है जबकि वो खर्च 100 करोड़ रुपये कर रही है। इन लोगों ने सिर्फ अपने पैसे का ही इस्तेमाल किया। Metropolis ने हाल ही में वारबर्ग पिंकस में हिस्सेदारी हासिल की है।

दरअसल Metropolis की अभूतपूर्व वृद्धि के लिए नींव साल 2006 से पहले ही पड़ गई थी। साल 2002 में कंपनी की आय सिर्फ एक लैब से 7 करोड़ रुपये थी उस वक्त उस लैब में 40 से 50 लोग काम करते थे। लेकिन पिछले 13 सालों के सफर के दौरान Metropolis के 800 सेंटर और 125 लैबोरेटरी सात देशों में हैं। कंपनी की वैल्यू 2000 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की हो गई है। जबकि कंपनी की सलाना आय 500 करोड़ रुपये है। आज Metropolis का कारोबार मुंबई, चेन्नई और केरल में मुख्य रूप से चल रहा है। इसके अलावा श्रीलंका में साल 2005 से, मध्य पूर्व एशिया में साल 2006 से और अफ्रीका में साल 2007 से ये अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

अमीरा के मुताबिक Metropolis के साथ काम कर उनको कई तरह के अनुभव हासिल हुए हैं। क्योंकि जितने भी देशों में उनका कारोबार है वहां अलग और कुछ हट कर काम करना होता है। श्रीलंका बड़ी आरामदायक जगह है यहां पर भारत की तरह कई सार्वजनिक छुट्टियां होती हैं। लेकिन मध्य पूर्व का बाजार छवि पर ध्यान केंद्रित रखता है और वहां पर काम करने का माहौल कॉरपोरेट जगत से मिलता जुलता है। जबकि दक्षिण अफ्रीका का माहौल काफी पेशेवर है। वहां पर लोग सिर्फ 9 से 5 के बीच काम करते हैं। लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ता Metropolis को कई निराशाजनक विफलताओं का भी सामाना करना पड़ा है। अमीरा के मुताबिक ज्यादातर साझेदारी सफल हुई हैं जबकि कुछ में इनको विफलता भी मिली है। इन्ही विफलताओं को देखते हुए वो अपने काम में बदलाव लाते रहती हैं ताकि दोबारा उस स्थिति का सामना ना करना पड़े।

स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्र काफी पुराना है और इसमें पुरूषों का एकाधिकार है। एक युवा महिला होने के नाते लोगों का अमीरा को गंभीरता से लेना एक मुश्किल बाधा के समान बात थी। जबकि उनके पास मेडिकल का कोई अनुभव भी नहीं था। महिला बॉस होने के कारण अमीरा को कई बार भयावह घटनाओं का सामना करना पड़ा। अमीरा के मुताबिक “कार्यक्षेत्र में महिलाओं को अक्सर अपने लिंग की लड़ाई लड़नी पड़ती है और अगर कोई महिला उद्यमी हो तो उसके लिए ये अलग मामला होता है। एक महिला होने के नाते आपने एक उद्यम को खड़ा किया होता है जहां पर संस्कृति और हालात अलग होते हैं। जहां पर आपको अपना ब्रांड बनाना होता है उसके लिए आपको खुद बाहर निकलना पड़ता है और अपनी कहानी बेचनी होती है। ये काम का काफी कठिन हिस्सा होता है और यहीं पर भेदभाव सामने दिखाई देता है।”

अमीरा के मुताबिक ज्यादातर लोग उनके तजुर्बे को देखते हुए उनके साथ जब बातचीत करते हैं तो वो असहज महसूस करते हैं। हालांकि ये उनकी गलती नहीं है क्योंकि पुरूषों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि कोई महिला सिर्फ दो ही चीजों के काबिल है या तो वो मां बन सकती है या फिर किसी की पत्नी लकिन कार्यक्षेत्र में उसकी कोई जगह नहीं होती। इसलिए महिलाओं को कई पुरूष अपने समान नहीं देख पाते। बावजूद इसके अमीरा का मानना है कि किसी भी महिला को अपनी ताकत का अहसास होना चाहिए और ऐसे हालात से निपटना आना चाहिए।

भविष्य के बारे में अमीरा का कहना है कि Metropolis ने पिछले 2-3 सालों के दौरान अपने कर्मचारियों, आधारभूत सुविधाओं, वितरण, नेटवर्क और सेल्स में निवेश किया है। जिसके बाद अब उनको उम्मीद है कि इसका परिणाम जल्द ही सामने आएगा। उनके मुताबिक ग्राहकों का बर्ताव भी पहले से बदला है, उनकी सोच बदली है और वो चाहती है कि अपने कारोबार को पेशेवर तरीके से चलायें ताकि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कारोबार में भी बदलाव लाया जा सके। अब वो Metropolis को दूसरे देशों में भी ले जाने का इरादा रखती हैं।

अमीरा हफ्ते में तीन दिन टेनिस खेलती हैं और दो दिन कसरत करती हैं। उनको एसी ऑफिस से नफरत है और जब भी मौका मिलता है तो वो बाहर रहना ज्यादा पसंद करती हैं। उनको नौकायन, कैंपिंग और ट्रेकिंग से प्यार है। उनका मानना है कि विफलता इंसान को बेहतर बनाती है। पिछले 14 साल के दौरान उतार चढ़ाव को देखने के बाद अमीरा की सलाह है कि आपको अपनी सीमाओं को लगातार बढ़ाना चाहिए। उनके मुताबिक ये मानव प्रकृति है कि वो आराम चाहता है और वो उसी के साथ जीना चाहता है। अनिश्चितता से इंसान को नफरत होती है लेकिन ऐसे हालात में ही इंसान अपना मुकाम बना सकता है। इसलिए अपनी सीमाओं को लगातार बढ़ाना जरूरी है।

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