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एक पैर वाले इस क्रिकेटर की कहानी भर देगी आपके भीतर प्रेरणा

सलाम इस एक पैर के खिलाड़ी को...

25th Jan 2018
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एक शब्द होता है जुनून। ये वो शक्ति है, जो दुनिया चला रही है। वो लोग, जिन्हें दुनिया कमजोर मानती है, अशक्त समझती है, अपने जुनून से वो सब हासिल कर लेते हैं, जिसकी उन्हें चाह होती है।

क्रोडिट: जीकेवी

क्रोडिट: जीकेवी


ऐसी ही एक कहानी है एक पैर से क्रिकेट खेलने वाले शबीर अहमद भट्ट की। सोशल मीडिया पर उनकी ये अविश्वसनीय कहानी तेजी से वायरल हो रही है।

भट्ट तगड़े वाले क्रिकेट प्रशंसक हैं। उन्होंने बचपन में ही अपना पैर खो दिया था। वह कवर में फ़ील्ड पसंद करते हैं। भट्ट कहते हैं, यह अब मुश्किल नहीं लगता है। मैं अभ्यास कर रहा हूं और एक लंबे समय से खेल रहा हूं। 

एक शब्द होता है जुनून। ये वो शक्ति है, जो दुनिया चला रही है। वो लोग, जिन्हें दुनिया कमजोर मानती है, अशक्त समझती है, अपने जुनून से वो सब हासिल कर लेते हैं, जिसकी उन्हें चाह होती है। ऐसी ही एक कहानी है एक पैर से क्रिकेट खेलने वाले शबीर अहमद भट्ट की। सोशल मीडिया पर उनकी ये अविश्वसनीय कहानी तेजी से वायरल हो रही है। भट्ट तगड़े वाले क्रिकेट प्रशंसक हैं। उन्होंने बचपन में ही अपना पैर खो दिया था।

भट्ट ने ग्रेटर कश्मीर न्यूज़ को बताया, 'मैं सिर्फ एक ही पैर पर ही अपना जीवन जीता हूं, लेकिन मैंने इसे मेरी कमजोरी कभी नहीं बनने दी। इसके बजाय मैंने कड़ी मेहनत की और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं मैदान पर किसी से भी कमतर नहीं हूं। दुर्घटना के बाद मैं आसानी से निराशा में पड़ सकता था लेकिन इसके बजाय मैंने कठिन संघर्ष किया और इस मार्ग का चुनाव किया। समय के साथ क्रिकेट मेरे जुनून में बदल गया है और जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं इसे अपने पूरे जुनून के साथ खेलता हूं। इसी समय मैं सम्मानित तरीकों से अपनी आजीविका अर्जित करता हूं। मेरे पास एक सिलाई की दुकान है। मैं अपने सभी कामों को पूरा करने में सक्षम हूं। इसी बात ने मुझे क्रिकेट के लिए अपने जुनून जारी रखने में मदद की है।'

साभार: ट्विटर

साभार: ट्विटर


क्रिकेट ग्राउंड पर एक पैर से ही जलवे दिखाता वीडियो इंटरनेट पर जब से वायरल हुआ है, उसने भट्ट को सेलिब्रिटी की तरह बना दिया है। हर कोई अब उन्हें पहचानता है। भट्ट चाहते हैं कि जो संगठन राज्य के क्रिकेट और खेल के विकास के लिए काम कर रहे हैं और मेरे जैसे लोगों को आगे बढ़ने में सहायता करते हैं. उन तक उनकी बात पहुंचे। वो कहते हैं कि मेरे निजी लाभ के लिए मुझे कुछ भी ज़रूरत नहीं है, मुझे अपने क्रिकेट गतिविधियों और मेरे साथी खिलाड़ियों की गतिविधियों को जारी रखने में मदद की ज़रूरत है।

इस मुकाम तक आने से पहले भट्ट ने काफी संघर्ष देखा है। बकौल भट्ट, जब मैं डल झील में दूसरे बच्चों को तैराकी देखने को करता था, तो मैं रोता था। लेकिन मैंने खुद को समझा लिया था कि मैं अन्य बच्चों के समान नहीं था। एक बार की बात है, 12 साल की उम्र में भट्ट अपने दोस्तों और पड़ोसियों से सड़कों और सड़कों पर खेल रहे थे। अचानक से उन्हें लगा कि वो अच्छा क्रिकेट खेल सकते हैं, इसी के तुरंत बाद वह एक स्थानीय क्रिकेट टीम में शामिल हो गए। भट्ट बल्लेबाजी में उतने अच्छे नहीं है, वह एक सक्रिय और उत्साही क्षेत्ररक्षक हैं। वह कवर में फ़ील्ड पसंद करते हैं। भट्ट कहते हैं, यह अब मुश्किल नहीं लगता है। मैं अभ्यास कर रहा हूं और एक लंबे समय से खेल रहा हूं। उनका मानना है कि यह सिर्फ अपने जुनून की पूर्ति के लिए नहीं है , खेल उन्हें फिट, मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखता है।

साभार: इंस्टाग्राम

साभार: इंस्टाग्राम


भट्ट के फेवरेट क्रिकेटर हैं, पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर सय्यद अनवर। उन्हें लगता है कि वो शांत लेकिन ठोस व्यवहार के खिलाड़ी हैं। वह भारतीय कप्तान विराट कोहली को भी पसंद करते हैं। भट सरकार या जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन से कोई समर्थन न मिलने से काफी निराश हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि कई राजनेताओं और नौकरशाहों ने उनका खेल देखा है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया या आर्थिक रूप से उन्हें मदद की। 

ये भी पढ़ें: IIT में पढ़ते हैं ये आदिवासी बच्चे, कलेक्टर की मदद से हासिल किया मुकाम

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