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ये दस बातें फेसबुक के CEO मार्क ज़ुकरबर्ग को बनाती हैं खास

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17th Apr 2017
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फेसबुक के शुरू होने से पहले किसी ने ये सोचा भी नहीं होगा कि चेहरों और तस्वीरों की ये आभासी दुनिया इतनी तेज़ी से सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए नंबर वन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में खड़ी हो जायेगी। लेकिन इसके खड़े होने के पीछे मार्क ज़ुकरबर्ग की वो मेहनत है, जिसकी वजह से आज वे अपनी उम्र के तमाम लोगों के बीच सबसे खास नज़र आते हैं।

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मार्क ज़ुकरबर्ग बहुत कम उम्र में अरबपति बन गये थे और आज की तारीख में उनके नाम पर 50 के आसपास पेटेंट्स हैं, जो कि अपने आप में एक बड़ी बात है।

फेसबुक यानि की चेहरों की किताब, एक ऐसी जगह जहां पर होना या न होना अब इंसान की पहचान बन गया है। कोई भी कंपनी अपने यहां एम्प्लॉई अपॉइंट करने से पहले उसका फेसबुक प्रोफाइल चैक करती है। फेसबुक एक ऐसी जगह है, जिसने नजाने कितने बिछड़े दिलों को मिलवाते हुए कई पुरानी यादों को ताज़ा किया है।

पहले ज़माने में यदि फेसबुक होता तो वे दो भाई जो कुंभ के मेले खो गये थे, वे कभी न खोते। फेसबुक ने ऐसे कई लोगों को पहचना दी है, जिन्हें कोई जानता भी नहीं था। फेसबुक पर रहते हुए आज की तारीख में हर व्यक्ति अपने आप में सेलेब्रिटी है। वो क्या खा रहा है, क्या पहन रहा है, कहां घूम रहा है, इन सबकी खबर वो अपने जानने वालों को एक साथ दे पाता है और इन सभी का सबसे बड़ा श्रेय दिया जा सकता है फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग को। मार्क के नाम पर आज की तारीख में 50 के आसपास पेटेंट्स हैं, जो कि अपने आप में एक बड़ी बात है। आईये जानते हैं वो दस बातें, जो मार्क ज़ुकरबर्ग को बनाती हैं खास...

फेसबुक के सीइओ मार्क ज़ुकरबर्ग अपनी मेहनत के बल पर 23 साल की कम उम्र में ही बन गये थे अरबपति।

ज़ुकरबर्ग की ये रणनीति रहती है, कि वे जिन कंपनियों को पसंद करते हैं उन्हें एक्वायर कर लेते हैं।

ज़ुकरबर्ग ने दोस्तों के साथ मिलकर 17 साल की उम्र में बनाया था सिनेप्स मीडिया प्लेयर, जो यूज़र्स की पसंद के गानों को करता था स्टोर।

वे जब भी किसी कंपनी को एक्वायर करते हैं, तो कंपनी के फाउंडर को भरोसे में रखते हुए कंपनी का अधिग्रहण करते हैं और ये वादा करते हैं वे कंपनी के साथ मिलकर कंपनी को और बेहतर बनायेंगे।

वे जिस कंपनी का अधिग्रहण करते हैं, पहले उसके फाउंडर के साथ दोस्ताना रिलेशन डेवलप करते हैं उसके बाद फाउंडर के सामने अधिग्रहण की बात रखते हैं।

ज़ुकरबर्ग का मानना है कि जब तक ज़िंदगी में रिस्क नहीं होगा, तब तक सफलता नहीं मिल सकती।

ज़ुकरबर्ग को बारस साल की कम उम्र से ही कंप्यूटर से मोहब्बत थी और इस उम्र में ही उन्होंने अपने पिता के लिए एक ऐसा प्रोग्राम बनाया था जिसका इस्तेमाल पिता अपने अॉफिस के कामों में करते थे।

ज़ुकरबर्ग हमेशा से अपनी मेहनत पर भरोसा करते हैं। उनका मानना है, कि जो मेहनत करते हैं वे ज़िंदगी में हमेशा आगे बढ़ते हैं।

अपने दोस्तों के साथ मिलकर ज़ुकरबर्ग ने 2004 में फेसबुक की नींव रखी और 2004 के अंत तक फेसबुक के 1 मिलियन यूज़र्स हो गये। आज की तारीख में तो सोचना ही क्या, फेसबुक एक क्रांति की तरह उभर कर दुनिया के सामने आया है।

28 साल की कम उम्र में फॉर्च्यून 2013 की लिस्ट में मार्क ज़ुकरबर्ग ने अपनी जगह बनाई और इस लिस्ट की सबसे खास बात ये थी कि इसमें ज़ुकरबर्ग सबसे कम उम्र के सीइओ थे।


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