महीनों की सीख दे घंटों में, ‘अर्थ विद्या’, बनाये समझदार एकाउंटेंट

    By Harish Bisht
    July 04, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
    महीनों की सीख दे घंटों में, ‘अर्थ विद्या’, बनाये समझदार एकाउंटेंट
    45 कॉलेज के 45सौ छात्र उठा चुके हैं फायदाअगस्त, 2011 में शुरू हुई ‘अर्थ विद्या’
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    किसी आम आदमी के लिए बिजनेस एकाउंटिंग बड़ा मुश्किल काम होता है, लेकिन कॉमर्स के छात्र ‘अर्थ विद्या’ कौशल निखार कोर्स कर रहे हैं जिसे बिजनेस एकाउंटिंग प्रोसेस भी कहते हैं। ये वर्ल्ड ऑफ वारक्रॉफ्ट का मजेदार खेल है। इसमें एक वर्चुअल ऑफिस होता है जिसमें छात्रों को कई तरह के काम करने होते हैं। इसमें 60 से ज्यादा एकाउंटिंग ट्राजेंक्शन करनी होती हैं और कोर्स के अंत में किसी भी छात्र को उतना ही तजुर्बा हासिल होता है जितना वो छह महीने असल जिंदगी में काम कर हासिल कर सकता है। छात्र ये सब सिर्फ 120 घंटों में सीख जाता है। इस खास कोर्स ‘अर्थ विद्या’ को इजाद किया है नागराजन जी ने।

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    थ्योरी सेशन को चार्टर्ड एकाउंटेंट पढ़ा कर छात्रों का समझा सकते हैं जबकि उसका अनुभव जानने के लिए एक खास सॉफ्टवेयर की मदद ली जाती है। उदाहरण के लिए छात्र पढ़ाई के जरिये ये तो जान जाता है कि टैक्स की गणना कैसे की जाती है और उसे घटाया कैसे जा सकता है लेकिन वो इस प्रक्रिया से कोसो दूर रहता है। जब वो ये खेल खेलता है तो उसे सीढ़ी दर सीढ़ी इस प्रक्रिया को पार करना होता है इस दौरान उसके सामने कई चुनौतियां भी आती हैं।

    नागराजन के मुताबिक उनका मंत्र प्रदर्शन करना है इसमें मूल्यांकन, परामर्श और प्रशिक्षण का समावेश होता है। इस दौरान छात्रों का मूल्यांकन शैक्षिक ज्ञान, प्रकिया की जानकारी, विश्लेषणात्मक कौशल और सॉफ्टवेयर की जानकारी पर होता है। इन सॉफ्टवेयर में टैली और एक्सल की जानकारी जरूर होनी चाहिए। परीक्षा पूरी करने के बाद हर छात्र को एक रिपोर्ट मिलती है। इस रिपोर्ट के जरिये छात्र ये जान पाता है कि वो ज्ञान और कौशल के मामले में कॉलेज के दूसरे छात्रों के मुकाबले इस क्षेत्र में कहां पर खड़ा है। अब तक 45 कॉलेज के 4500 छात्रों का इस तरह मूल्यांकन किया गया है। ये छात्र बेंगलौर, हैदराबाद, चेन्नई और कोयंबत्तूर के थे।

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    जबकि इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ और काम कर रहे पेशेवर इस बात को मानते हैं कि कॉलेजों में जो पढ़ाई होती है वो कार्यस्थल की जरूरत के मुताबिक नहीं होती और इस बात को कॉलेज और छात्र दोनों ही नहीं देख पाते। अर्थ विद्या के सामने ये एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इस कारण अर्थ विद्या में परामर्श को एक मुख्य गतिविधि के तौर पर शामिल किया गया है। ये छात्रों को व्यक्तिगत आकलन रिपोर्ट के दौरान पढ़ाई और जमीनी हकीकत के इस फासले के बारे में जानकारी देती हैं। ताकि वो सही रास्ते में चल सकें और जरूरत के मुताबिक अपने कौशल में निखार लाएं। इस दौरान छात्रों को एक डेमो के माध्यम से मुख्य प्रशिक्षण उत्पाद के बारे में बताया जाता है।

    नागराजन  जी

    नागराजन जी


    अर्थ विद्या को चार्टड एकाउंटेंट और पेशेवर साफ्टवेयर के समूह की मदद से नागराजन ने बेंगलौर में अगस्त 2011 में इसे शुरू किया था। नागराजन खुद एक सीनियर सीए हैं और उनके पास सूचना और तकनीक के क्षेत्र में 30 सालों का अनुभव है। उन्होने अपने करियर की शुरूआत एनफिल्ड इंडिया से की थी। इसके बाद उन्होने 13 साल विप्रो में काम किया। अर्थ विद्या कौशल विकास के सहयोगी के तौर पर राष्ट्रीय कौशल विकास निगम भी जुड़ा है। खासतौर से इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और इंश्योरेंश क्षेत्र शामिल है। इस प्रोजेक्ट को एनएसडीसी से अनुदान मिला हुआ है इसके अलावा नागराजन के दोस्तों ने भी इसमें निवेश किया हुआ है।

    अर्थ विद्या का लक्ष्य कॉमर्स ग्रेजुएट छात्रों या जो बी-कॉम, एम-कॉम, बीबीए, बीबीएम या एमबीए कर रहे हैं और जिन्होने आईसीडब्लूए, सीए या एसीएस के लिए आवेदन किया है उनको तैयार करना है। फिलहाल नागराजन की ये टीम कोयंबत्तूर और बेंगलौर के विभिन्न कॉलेजों में काम कर रही है।

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