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42 देशों में दस्तक दे रहा दुनिया को बेहतर बनाने का अभियान

19th Nov 2018
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मुंबई के हीरा व्यापारी रुषभ तुरखिया अदभुत मोटिवेटर हैं। दुनिया को बेहतर बनाने का उनका 'योर टर्न नाउ' अभियान बयालीस देशों में दस्तक दे रहा है। लोगों को जिंदगी का पाठ पढ़ा रहा यह अभियान अब तो अंतहीन श्रृंखला का रूप ले चुका है। वह अब तक 636000 लोगों को अपना 'योर टर्न नाउ' ब्ल्यू कार्ड बांट चुके हैं।

रुषभ तुरखिया

रुषभ तुरखिया


रुषभ ने एक और अनोखा अभियान अक्टूबर 2016 से शुरू किया है, जिसमें उनका सबसे ज्यादा साथ दिया, उनके 12 साल के बेटे विवान ने। इस अभियान के तहत अपने कामों से लोगों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने सभी का एक विडियो भी प्रसारित कर दिया।

करियर और भविष्य का प्रश्न आज हर युवा के सामने डरावने दैत्य की तरह मुंह फैलाए खड़ा है। स्टार्टअप की दुनिया ने राह कुछ आसान जरूर की है लेकिन उसके भी अपने रिस्क हैं, चुनौतियां हैं। जब आने वाले15 दिसम्बर 2018 को भागलपुर (बिहार) के सैंडिश कंपाउंड में प्रदेश के 13 ज़िलों के लगभग पचीस हज़ार युवकों और युवतियों के एक विशेष उद्देश्य से जमा होने की तैयारी चल रही होती है, इस सूचना से मन में दो सवालों के साथ एक स्वाभाविक जिज्ञासा पैदा होती है कि वे इतनी बड़ी संख्या में 'क्यों' और 'किसलिए' इकट्ठे हो रहे हैं? तो पता चलता है कि युवा शक्ति का वह विराट कुम्भ 'अंग युवा महोत्सव' में किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि अपने जीवन में खुशहाली के सपने देखते हुए मोटिवेटर देबज्योति मुखर्जी से मुफ्त में वे टिप्स लेने के लिए जुट रहा है, जिससे अपने लंबे और जोखिम भरे भविष्य की राह आसान कर सके। 

युवाओं को आज रहा दिखाने वालो में कुछ बिहार के प्रो. मुखर्जी जैसे लोग हैं तो मुंबई के रुषभ तुरखिया सरीखे शख्सियत भी, जो अपनी जीवन शैली से, तौर-तरीकों से खुद-ब-खुद रियल हीरो में शुमार हो रहे हैं।, जो एक कम्पलीट पर्सनल्टी, राइटर, बिजनेसमैन, मोटिवेटर, ट्रेनर, लाइफ कोच यानी बहुत कुछ हैं। उनके सबक साफ-साफ दस्तक दे रहे हैं कि हमारे जीवन का हर दिन हमें कुछ सिखाता है। इसलिए अपने लक्ष्य के लिए - 'योर टर्न नाउ'। इस नाम से ही प्रेरक रुषभ की यात्रा दिसंबर 2009 में मुंबई से शुरू हुई थी, जो आज दुनिया के 42 देशों में फैल चुकी है।

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हीरा व्यापारी रुषभ तुरखिया कहते हैं कि आज लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं, चारों ओर दौड़ रहे हैं कि अपने परेशान साथी, पड़ोसी, राहगीर को, जो गिर रहा है, संभालने के लिए एक मिनट का भी वक्त नहीं देना चाहते हैं। MANKIND में से 'मैन' और 'काइंड' शब्द अलग-अलग हो गए हैं। इसे जोड़ना होगा। यह एक बहुत सरल अवधारणा है, जहां आपको अपने वॉलेट या पर्स में वाईटीएन कार्ड के ढेर में से दूसरे मनुष्यों की जरूरतों के हिसाब से भी कुछ छांट लेना होगा। इस लक्ष्य की ओर लगातार अग्रसर रुषभ अब तक 'योर टर्न नाउ' (अब आपकी बारी) के लगभग बयालीस हजार कार्ड दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाने के साथ ही अपनी बेवसाइट 'योरटर्ननाउ डॉट इन', फेसबुक समूह आदि के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंच चुके हैं। 

रुषभ अपना हर दिन किसी न किसी खास मकसद से देखते हैं, आजमाते हैं। मसलन, वह आम लोगों की तरह अपना जन्मदिन किसी बड़ी-सी पार्टी, डेस्टिनेशन पिकनिक के रूप में नहीं मनाते, बल्कि ‘योर टर्न नाउ’ अभियान को वैश्विक बनाने के लिए किसी एक और नए प्रयोग के साथ, किसी एक और देश तक अपनी पहुंच बनाने की ओर मोड़ देते हैं। पिछले साल उनका चालीसवां जन्मदिन 8 मार्च 2017 को था, जिसके लिए उन्होंने चालीस अच्छे काम करने का फैसला किया। उन्होंने योजना बनाई कि उन सभी कामों में वह अपने और भी दोस्तों को जोड़ेंगे।

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रुषभ बताते हैं कि उनकी जिंदगी जब बिना किसी खास गतिविधि के एक दम सामान्य रूप से कट रही थी, एक दिन उन्होंने हेलेन हंट और केविन स्पेसी की हॉलीवुड फिल्म देखी। उस फिल्म में एक ऐसा शिक्षक होता है, जो अपने छात्रों को दुनिया को बेहतर बनाने के बारे में तरह तरह के पाठ पढ़ाता है। 

उस फिल्म का सबक था कि हम किसी की मदद कर, उसे अपनी तरह से ही किसी और को मदद के लिए प्रेरित करें। शिक्षक और छात्रों की वह पहल एक दिन उस देश का सबसे बड़ा वाकया बन जाती है। 

किसी के लिए कुछ कीजिये और ये कार्ड उन्हें दीजिये

किसी के लिए कुछ कीजिये और ये कार्ड उन्हें दीजिये


इस फिल्म ने रुषभ के मन-मस्तिष्क पर चमत्कारिक असर किया। तभी उन्होंने संकल्प लिया कि वह भी दुनिया को बेहतर बनाने की पहल करेंगे, और चल पड़े अपने 'योर टर्न नाउ' अभियान पर।

यह पहल शुरू करते समय वर्ष 2009 में उनका लक्ष्य पांच हजार लोगों तक पहुंचने का था, जो आश्चर्यजनक रूप से पचीस हजार लोगों तक पहुंच गया। वह कहते हैं कि किसी बच्चे या बूढ़े को सड़क पार कराना हो, किसी बेरोजगार को नौकरी में मदद देनी हो, किसी प्यासे को पानी पिलाना हो, हम ऐसा कोई भी काम कर दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।

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रुषभ ने एक और यह अनोखा अभियान अक्टूबर 2016 से शुरू किया है। इसमें उनका सबसे ज्यादा साथ दिया, उनके 12 साल के बेटे विवान ने। अपने उन अच्छे कामों से लोगों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने उस सबका एक विडियो भी प्रसारित कर दिया। इसके अलावा वह देश भर में 'योर टर्न नाउ' के वर्कशॉप, सेमीनार आदि भी करते रहते हैं। रुषभ की रोजमर्रा की कार्यशैली कोई बैठे-बिठाए ही नज़ीर नहीं बन जाती है। कभी सवेरे तड़के उठकर वह घरों के सामने खड़ी कारें साफ कर रहे अथवा सड़कों पर झाड़ू लगा रहे लोगों को चाय-बिस्किट बांटने पहुंच जाते हैं तो कभी धूप में तपते, ठंड में कांपते, बारिश में भीगते ट्रैफिक पुलिस वालों की मदद करने लगते हैं। अब तो उनकी खुद की जीवन पद्धति हजारों लोगों की सीख बन चुकी है।

रुषभ लोगों को जिंदगी के नए-नए पाठ पढ़ाने के लिए 'योर टर्न नाउ' पुस्तक भी लिख चुके हैं, जिसे दुनिया भर के लोग पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही वह लोगों को 'योर टर्न नाउ' ब्लू कार्ड्स भी बांटते रहते हैं। उनका अभियान एक अंतहीन श्रृंखला का रूप ले चुका है। अब तक ये कार्ड वह 636000 लोगों को बांट चुके हैं।

रुषभ के इस अभियान से जुड़ने के लिए, +919029602897 इस नंबर पर कॉल करके पूरी जानकारी ले सकते हैं।


यह भी पढ़ें: जानिए कैसे 10 रुपए के फिल्टर से प्रदूषण के खिलाफ जंग जीत रहे उद्यमी प्रतीक शर्मा

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