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अब फ्लाइट की तरह बढ़ेगा लोकल ट्रेनों का किराया, फ्लेक्सी फेयर सिस्टम पर हो रहा है विचार

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2nd Sep 2017
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इस प्रक्रिया के तहत परिवहन के दूसरे साधनों की मौजूदगी को देखते हुए किराये की दर तय की जा सकती है। लोगों को दूसरे साधनों से ट्रेनों की ओर आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी किराया तय करने की जरूरत है।

फोटो साभार (सोशल मीडिया)

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यात्रियों को आर्किषत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों और मंडलों के महाप्रबंधकों और संभागीय रेल प्रबंधकों (डीआरएम) को अधिक शक्तियां देने पर विचार किया जा रहा, ताकि वे किराया के ढांचे को लचीला बना सकें।

क्षेत्र के वरिष्ठ रेल अधिकारियों को अलग किराया तय करने का मौका मिलेगा। इसका उद्देश्य सख्त वित्तीय नियमों को आसान करना और उन्हें अधिक लचीला बनाना है।

अगर सब कुछ सही रहा तो देशभर में उपनगरीय यानी लोकल ट्रेनों का किराया भी फ्लाइट की तरह बढ़ा और घटा करेंगे। दरअसल रेलवे की एक कमिटी अब उपनगरीय ट्रेनों में भी डिमांड और कॉम्पिटीशन के मुताबिक फ्लेक्सी फेयर सिस्टम पर विचार कर रही है। न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन अभियान के तहत रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस कमिटी का गठन किया था। कमिटी को मौजूदा टैरिफ व्यवस्था पर विचार करना है जो उपनगरीय और कम दूरी की सेवाओं पर भी देशभर में लागू है।

संभावना है कि अगले महीने तक कमिटी रेलमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। इसमें शामिल प्रस्तावों में कहा गया है कि सभी उपनगरीय सेवाओं के लिए डिमांड और प्रतिस्पर्धी सेवाओं के मुताबिक अलग किराया हो। इसके अलावा व्यस्त और सामान्य समय में भी किराये की दर अलग हो सकती है। यात्रियों को आर्किषत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों और मंडलों के महाप्रबंधकों और संभागीय रेल प्रबंधकों (डीआरएम) को अधिक शक्तियां देने पर विचार किया जा रहा, ताकि वे किराया के ढांचे को लचीला बना सकें।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरीके से क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों को अलग किराया तय करने का मौका मिलेगा। इसका उद्देश्य सख्त वित्तीय नियमों को आसान करना और उन्हें अधिक लचीला बनाना है। उन्होंने कहा कि रेलवे को प्रतिस्पर्धी टिकट दर अपनाने की जरूरत है ताकि लोग अन्य विकल्पों की बजाय ट्रेनें चुन सकें। रेलवे पर्सनल के डायरेक्टर जनरल की अगुआई वाली कमिटी किराये के ढांचे को लचीला बनाने के लिए जनरल मैनेजर्स और अलग-अलग जोन्स व डिवीजन के डिवीजनल रेलवे मैनेजर्स को अधिक अधिकार देने की तैयारी में है।

एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इस तरीके से जोनल स्तर के अधिकारी अलग तरीके से किराया तय कर सकेंगे। यह विचार कठोर वित्तीय नियमों को आसान और अधिक लचीला बनाने के लिए है। अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की इच्छा जाहिर करते हुए बताया कि इस प्रक्रिया के तहत परिवहन के दूसरे साधनों की मौजूदगी को देखते हुए किराये की दर तय की जा सकती है। लोगों को दूसरे साधनों से ट्रेनों की ओर आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी किराया तय करने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें: 2 अक्टूबर से इन सेवाओं के लिए डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य कर सकती है सरकार

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