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'हम पांच' स्टिकर्स डिजाइन की दुनिया के पांच रत्न...

20th Mar 2015
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'आगे बढ़ने के लिए थोड़ा रिस्क तो लेना पड़ता है'

अगर आपने कभी वीचैट, निम्बुज़ और लाइन जैसे मैसेजिंग एप्स चलाते वक्त वर्चुअल स्टिकर्स इस्तेमाल किए हैं तो बहुत संभव है कि वो स्टिकर परडिक्स बिजनेस सॉल्यूशन्स ने डिजाइन किए हों। आईआईटी गुवाहाटी के कुछ लड़कों ने 2012 में करीब तीन लाख रुपये से इस कंपनी को शुरु किया था और इस फाइनेंशियल इयर में ये कंपनी आठ अंकों की आमदनी की आंकडा छू लेगी।

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कम्पनी के को-फाउंडर दुष्यंत पालरिवाल ने बताया,"परडिक्स एक डिजाइन सॉल्यूशन फर्म है। लोग हमारे डिजाइन का इस्तेमाल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए करते हैं।"

को-फाउंडर मनीष ने बताया, "IIT गुवाहाटी में हम लोगों ने डिजाइन की पढ़ाई की है तो कुछ ऐसा ही करना था। पांच यार मिले और कंपनी बना ली। हमें लगता है कि भारत में अभी इस काम का बहुत स्कोप है।"

मनीष बताते हैं,"10 साल पहले लोग डिजाइन को लेकर गंभीर नहीं थे लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। दरअसल, डिजाइन बहुत सारी बातें बिन बोले ही कह देता है। अभी तक हम लोग 50 से ज्यादा क्लाइंट्स को सेवाएं दे चुके हैं और अब हमें लगता है कि हमारा फ्यूचर ब्राइट है।"

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फिलहाल परडिक्स, बिजनेस के लिए मोबाइल एप्लीकेशन, वेबसाइट, डिजिटल ग्राफिक्स, एनीमेशन आदि बनाते हैं। यानि परडिक्स ग्राहक को लुभाने की, उन्हें आकर्षित करने की हर कोशिश में मदद करता है।

टीम परडिक्स ने देखा कि मोबाइल मैसेजिंग के लिए स्टिकर्स बनाने वाली डिजाइन फर्म्स बहुत कम हैं और जो हैं वो भारतीय संदर्भ में स्टिकर नहीं बनातीं। ऐसे में टीम परडिक्स ने इस बाजार में उतरने के लिए सोचा।

मनीष ने बताया,"अपनी भावनाएं बताने के लिए लिखने से ज्यादा स्टिकर बेहतर हैं। एक स्टिकर शायद सैंकड़ों शब्दों का काम करता है।"

युवा टीम

परडिक्स की शुरुआत करने वाली टीम है- दुष्यंत पालरिवाल, मनीष सुगंधी, शुभम जैन, रन्जू रविंद्रन और सृजन मौलिक। ये सभी लोग आईआईटी गोहाटी से ग्रेजुएट हैं। फिलहाल टीम परडिक्स में 25 लोग हैं।

परडिक्स के दो ऑफिस हैं- बैंगलौर और कोलकाता में। मनीष बताते हैं,"पांच लोगों ने मिल कर जब इस बिजनेस को शुरु किया था तो भरोसा था कि सफलता मिलेगी क्योंकि हम लोग एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं।"

टीम में डिजाइनर हैं, डवलपर हैं, बिजनेस डवलपमेंट और फाइनेंस के भी लोग हैं। फाइनेंस की टीम में दिलीप केजरीवाल और साकेत मारोदिया हैं जो टीम के मेन्टर्स भी हैं।

इस सोच से मिली सफलता

मनीष बताते हैं,"हम फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, निम्बूज़, लाइन, वाइबर आदि के लिए काम कर चुके हैं। हमने हाल फिलहाल में 'शमिताभ' और सब टीवी के लिए स्टिकर्स बनाए हैं। मोबाइल रिचार्ज वेबसाइट फ्रीचार्ज के लिए भी काम किया है।"

वे बताते हैं,"हमने कुछ सरकारी काम भी किए हैं जैसे NHAI और MRTH के लिए। हम काम को सिर्फ काम नहीं समझते, हम उसे अपना काम समझ कर करते हैं।"

सृजन मौलिक बताते हैं," हम लोग 'कुछ करते हैं' की जगह पर 'कुछ अच्छा करते हैं' सोचते हैं। समस्याओं को सिर्फ समाधान नहीं चाहिए, उन्हें ईजी, इफेक्टिव और एफिशिएंट समाधान चाहिए। जब आप कुछ डिजाइन कर रहे होते हैं तो आप सिर्फ कस्टमर की ज़रूरत पूरी नहीं कर रहे होते, आप एक अनुभव बना रहे होते हैं।"

ग्लोबल हो रहा है कारोबार

कंपनी ने कई ग्लोबल काम भी किए हैं और सबसे बड़ी मैसेजिंग एप्स के साथ भी काम किया है। दुष्यन्त बताते हैं," सबकी जरूरतें अलग अलग होती हैं। लाइन को स्टेटिक स्टिकर्स चाहिए थे और वीचैट को एनीमेटिड़। हम उनकी ज़रूरतों को समझतें हैं और उसी हिसाब से काम करते हैं।"

कंपनी ने कॉल ऑफ कल्चर के साथ मिलकर एक एप लॉन्च किया जिसका नाम है कुरानी। इस एप पर ना सिर्फ कुरान को पढ़ा जा सकता है बल्कि सुना भी जा सकता है। ये इस्तेमालकर्ताओं को नमाज का टाइम भी बताती है।

मनीष बताते हैं कि फिलहाल मिडिल ईस्ट से काफी अच्छा रेसपॉन्स मिल रहा है और आने वाले वक्त में अमेरिकी बाजार में भी कारोबार को फैलाने की योजना है।

'काम की तारीफ होती है तो अच्छा लगता है'

मनीष बताते हैं,"वक्त के साथ हमने काफी ग्रो किया है, काफी कुछ नया भी सीखा है। हमारे बनाए डिजाइन को जब तारीफ मिलती है तो बहुत अच्छा लगता है। हमने 'एंग्री आन्टी' को बनाया, इसको काफी तारीफ मिली, 25-30 देशों में इसे देखा गया। हमने इसे थ्री डी में भी बनाया, अब हम इसका नया वर्जन बना रहे हैं।"

"आर्ट ऑफ लिविंग के लिए भी हम काम कर रहे हैं। इनकी वेबसाइट, एप्लीकेशन, स्टीकर्स पर हम काम कर रहे हैं। एक नया काम भी अभी शुकु किया है। पहले लोग पावरपाइन्ट प्रजेन्टेशन देते थे लेकिन अब एनीमेशन दिखाया जाता है, अभी इस पर हम काम कर रहे हैं।"

वे बताते हैं,"इरोज़ इंटरटेन्मेंट के साथ भी हमने काम किया है। मिडिल ईस्ट के भी कुछ काम किए हैं। बात बस इतनी है कि काम दिल से करो तो अच्छा हो ही जाता है, डिजाइन हमारा पैशन है।"

परेशानियां नहीं रोक पाईं रास्ता

मनीष बताते हैं,"ऐसा नहीं है कि हमारे सामने परेशानियां नहीं आई लेकिन ये परेशानियां हमारा रास्ता नहीं रोक पाईं। हमारे सीनियर्स और मेन्टर्स ने हमारी बहुत मदद की।"

"अगर दिल में कुछ करने की चाह हो तो फिर परेशानियां आपका रास्ता नहीं रोक पातीं। कभी कभी कुछ वक्त के लिए रुकावट आ सकती है लेकिन वह आपको आगे बढने से नहीं रोक सकती।"

बकौल मनीष,"हम सिर्फ पैसा कमाने के बारे में नहीं सोचते बल्कि यूज़र एक्सपीरिएंस को बेहतर बनाना हमारा लक्ष्य है।"

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