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Englishbolega के आसान और अनोखे तरीकों से ग्रामीण क्षेत्र के लोग बन रहे है अंग्रेजी में मास्टर

 राजस्थान के छोटे शहर के ये युवा गांव के बच्चों को बना रहे हैं अंग्रेजी में मास्टर

22nd Jan 2018
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राजस्थान के अलवर जिले में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को अंग्रेजी सिखाने के लिए एक स्टार्टअप है 'इंग्लिशबोलेगा।' अपने गहन शोध से इस स्टार्टअप ने काफी प्रभावी तरीके से अंग्रेजी सिखाना शुरू कर दिया है। 'इंग्लिशबोलेगा' ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आइए जानते हैं इस स्टार्ट अप के बारे में।

इंग्लिशबोलेगा की टीम

इंग्लिशबोलेगा की टीम


Englishbolega की पूरे राजस्थान में 111 फ्रैंचाइजी हैं। स्टार्टअप फाउंडर रवि बताते हैं कि हर दो दिन के हिसाब से एक नई फ्रैंचाइजी खुल रही हैं। रवि पिछले 10 सालों से अपने कस्बे शाहजहांपुर में कोचिंग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं।

राजस्थान के अलवर जिले के शाहजहांपुर कस्बे के रहने वाले रवि टीचर के साथ-साथ उद्यमी भी हैं। उन्होंने तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए 'इंग्लिशबोलेगा' की शुरुआत की थी। रवि कुमार यादव बताते हैं, 'ऐसा कई बार हुआ कि मेरे अंदर हार मानने जैसे ख्याल आए, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि बीते 13 सालों से अपने स्टूडेंट्स को यही तो सिखा रहा हूं कि परिस्थिति कैसी भी हो, हार नहीं माननी चाहिए। मैं अपने दिमाग में हमेशा ये बात दोहराता रहा कि मुझे इस देश के एजुकेशन सिस्टम को सुधारना है ताकि गरीब के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिल सके और वे भी बाकी लोगों की तरह अच्छा रहन-सहन और अच्छी जिंदगी हासिल कर सकें।'

रवि बताते हैं कि 2010 में इंटरनेट के जरिए उन्होंने मालूम चला कि भारत की 94 फीसदी अंग्रेजी नहीं जानती। उन्होंने अपने आसपास भी देखा कि ग्रामीण इलाकों में युवाओं को सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेजी से मिलती है। इस स्थिति को बदलने के लिए रवि ने 6 सालों तक रिसर्च किया और अंग्रेजी सिखाने का एक अपना मेथड तैयार किया। उन्हें भी पहले बहुत अच्छी अंग्रेजी नहीं आती थी, लेकिन उन्होंने इस तरीके से खुद अंग्रेजी सीखी और फिर दूसरों को सिखाने के बारे में सोचा।

उन्होंने तीन महीने का इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स डिजाइन किया और उसे तीन बेसिक मॉड्यूल में ट्रेनिंग और प्रैक्टिस में बांट दिया। इससे क्लासरूम में भी आसानी हुई। इसके बाद उन्होंने इसे प्रयोग के तौर पर अपने कोचिंग सेंटर में ही स्टार्ट कर दिया। कोचिंग में मिले परिणाम से वे काफी अचंभे थे। उन्होंने बताया, 'कुछ ही महीने में ही गांव के बच्चों ने इंग्लिश बोलनी शुरू कर दी। इसके बाद मुझे लगा कि मेरा मेथड कारगर है। मुझे लगने लगा कि इस कोर्स को बाकी लोगों के लिए भी डेवलप किया जा सकता है।'

आज इस प्लेटफॉर्म की पूरे राजस्थान में 111 फ्रैंचाइजी हैं। रवि बताते हैं कि हर दो दिन के हिसाब से एक नई फ्रैंचाइजी खुल रही हैं। रवि पिछले 10 सालों से अपने कस्बे शाहजहांपुर में कोचिंग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं। जब उन्होंने इंग्लिशबोलेगा की शुरुआत करने का प्लान किया था तो कोई भी उन पर यकीन ही नहीं कर रहा था। लेकिन उन्हें खुद पर भरोसा था। उनकी एक स्टूडेंट प्रियंका यादव ने 2014 में उन्हें जॉइन किया। एक साल बाद उनके चचेरे भाई राहुल यादव ने भी उनका साथ दिया। अभी हाल ही में रवि ने सेल्स की टीम के लिए सुमित को नौकरी पर रखा है।

शुरू में रवि ने बच्चों से काफी कम फीस ली थी। वे इस फीस से मिले पैसों से इंग्लिशबोलेगा डॉट कॉम की स्थापना करना चाहते थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने ऑफलाइन कोचिंग शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने कई सारी कोचिंगों से पार्टनरशिप की। अपने तीसरे प्रयास में वे सफल हुए और सिर्फ 90 दिनों में उनके साथ 100 फ्रेंचाइजी जुड़ गए। इंग्लिशबोलेगा डॉट कॉम पर जाकर कोई भी स्टूडेंट काउंसिलिंग और डेमो क्लास के लिए अप्लाई कर सकता है। एक बार रजिस्टर्ड होने के बाद उसे तीन महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग में क्लास वर्क, होमवर्क और डेली प्रैक्टिस के सेशन भी चलते हैं।

रवि बताते हैं कि वे अपने पार्टनर इंस्टीट्यूट्स में अंग्रेजी सिखाने वालों को ट्रेनिंग देते हैं। एक बार प्रॉपर ट्रेनिंग देने के बाद वे ट्रेनर की परफॉर्मेंस से संतुष्ट हो जाते हैं तो ही उसे सर्टिफिकेट मिलता है और वह फिर अंग्रेजी सिखाने के काबिल हो जाता है। रवि बच्चों पर काफी रिसर्च करते हैं और फिर उनके माइंडसेट को समझने की कोशिश करते हैं। क्योंकि गांव के बच्चों का सीखने का तरीका शहरी बच्चों से थोड़ा अलग होता है। जितनी भी अंग्रेजी सिखाने वाली कोचिंग हैं वे बड़े-बड़े शहरों में ही हैं। लेकिन रवि छोटे कस्बों और गांवों में अपनी कोचिंग खोल रहे हैं। इससे युवा अंग्रेजी सीखने के साथ ही सशक्त भी हो रहे हैं।

आगे की योजना के बारे में बताते हुए रवि कहते हैं कि वे आने वाले समय में उत्तर भारत में 400 नए फ्रेंचाइजी खोलना चाहते हैं। अब वे एक ऐप बनाने पर भी काम कर रहे हैं जिससे कि आने वाले समय में बच्चे घर बैठे प्रैक्टिस कर सकें। अभी ये कंपनी सिर्फ 4 लोगों से चल रही हैं। वे इन्वेस्टमेंट के लिए भी बात कर रहे हैं। कंपनी हर फ्रैंचाइजी से हर बच्चे पर 500 रुपये की फीस लेती है। जिसमें स्टूडेंट किट, एग्जाम्स और सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। इसके अलावा ऑनलाइन लर्निंग कोर्स के लिए 1,999 रुपये लेते हैं। राजस्थान के छोटे से कस्बे से अपनी कोचिंग संचालित कर रहे इन लोगों ने पिछले 6 महीनों में 3 लाख का रेवेन्यू जुटा लिया है।

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