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किताबें और रक्तदान के लिए लोगों को जागरूक करने में जुटे एक प्रोफेसर का अनोखा प्रयास

Pooja Goel
4th Dec 2015
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बुक क्लब के माध्यम से दूसरों को अपनी पुरानी किताबों को देने के लिये प्रेरित करने का करते हैं काम....

किताबों को तैयार करने के लिये कटने वाले लाखों पेड़ों को बचाने में करते हैं मदद और कर रहे हैं पर्यावरण संरक्षण....

ब्लडआॅनडिमांड वेबसाइट के माध्यम से 2500 ब्लड डोनरों को आपातकाल में रक्तदान के लिये किया है तैयार....


आज के इस व्यस्तता के दौर में जहां लोग अपनी ही रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ती करने में खुद को असफल पा रहे हैं वहीं एक शख्स ऐसे भी हैं जो अपनी बेहद व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर दूसरों का जीवन रोशन करने और उनकी जान बचाने के काम में पूरी तल्लीनता से लगे हुए हैं। इनका नाम है डा. राजीव कुमार गुप्ता। शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम होने के अलावा डा. गुप्ता नोएडा और आसपास के छात्रों के बीच अपनी अनोखी पहल फेसबुक पेज ‘‘नोएडा बुक डोनर्स क्लब’’ और एक वेबसाइट ‘‘ब्लडआॅनडिमांडडाॅटकाॅम (bloodondemand.com)’’ के चलते खासे लोकप्रिय हैं।

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मूल रूप से मथुरा के रहने वाले और वर्तमान में नोएडा के राजकीय डिग्री काॅलेज में फैकेल्टी आॅफ काॅमर्स एंड बिनजस एडमिनिस्ट्रेशन में एकाउंट और लाॅ के प्रोफेसर डा. गुप्ता का मानना है कि अधिकतर छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद किताबों और अन्य पाठ्य सामग्री को या तो कबाड़ी को बेच देते हैं या फिर वे पड़ी-पड़ी धूल फांकती रहती हैं। ऐसे में दोहरा नुकसान होता है। एक तरफ तो यह किताबें जरूरतमंदों की पहुंच से दूर रह जाती हैं और दूसरी तरफ इन्हें दोबारा तैयार करने में पर्यावरण का बहुत अधिक नुकसान होता है।

डा. गुप्ता कहते हैं, ‘‘किताबें तैयार करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिये प्रतिवर्ष असंख्य पेड़ों की बलि दी जाती है और इसके बावजूद ये एक बड़े तबके की पहुंच से दूर ही रहती हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे और विभिन्न विषयों का अध्ययन कर रहे छात्र प्रतिवर्ष एक मोटी रकम खर्च करके पुस्तकें खरीदते हैं और बाद में ये हजारों के मूल्य की पुस्तकें रद्दी हो जाती हैं। यह सिर्फ विद्या का ही अपमान नहीं हैं बल्कि इसके चलते पर्यावरण पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि इन्हें तैयार करने के लिये बहुत बड़े पैमाने पर पेडों को काटा जाता है।’’

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छात्र ऐसी ही किताबों का आपस में आदान-प्रदान कर सकें और धनाभाव के चलते इनसे महरूम छात्र इन किताबों को अपना ज्ञानवर्धन करने में प्रयोग कर सकें इसी क्रम में इन्होंने वर्ष 2009 में एक वेबसाइट usedbooksandgoods.com की स्थापना की। हालांकि उन्हें प्रारंभ में अपनी इस पहल के चलते दूसरों की काफी बातें सुननी पड़ीं और कुछ समय बाद ही उन्हें इस वेबसाइट को बंद करना पड़ा। डा. गुप्ता बताते हैं, ‘‘मैंने यह वेबसाइट यह सोचकर प्रारंभ की थी कि लोग अपनी पुरानी किताबों को हमें देंगे और हम इन्हें जरूरतमंदों को उपलब्ध करवाएंगे। कुछ समय तक तो सब ठीक चला लेकिन जल्द ही मेरे मिलने वालों में मुझे कबाड़ी कहना प्रारंभ कर दिया और मेरे पास भी इन किताबों को रखने के लिये स्थान की कमी पड़ने लगी जिसके चलते मुझे इसे विराम देना पड़ा।’’

लेकिन धुन के पक्के राजीव ने हार नहीं मानी। उन्होंने देखा कि आज के युवा फेसबुक का बहुत बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं। इन्होंने युवाओं की फेसबुक के प्रति बढ़ती हुई दिलचस्पी को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की सोची और युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिये एक फेसबुक पेज ‘‘नोएडा बुक डोनर्स क्लब’’ तैयार किया। डा. गुप्ता बताते हैं, ‘‘इस क्लब के माध्यम से जो भी अपनी पुरानी किताबें दूसरों को पढ़ने के लिये देना चाहते हैं या फिर अपनी किताबों को दूसरों के साथ अदला-बदली करके पढ़ना चाहते हैं वे इस पेज पर जाकर अपनी जानकारी डाल देते हैं। इसके बाद जरूरतमंद आपस में संपर्क करके किताबों इत्यादि का आदान-प्रदान कर लेते हैं।’’ इसके अलावा अगर कोई अपनी किताबों को किसी संस्था या पुस्तकालय इत्यादि को दान देना चाहता है तो भी वह इसपर जानकारी पोस्ट कर देता है और फिर लोग उनसे संपर्क कर लेते हैं।

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डा. गुप्ता आगे कहते हैं, ‘‘हमारे इस क्लब के माध्यम से सबसे अधिक सहायता उन छात्रों की होती है जो धनाभाव के चलते महंगी किताबों को खरीदने में अक्षम रहते हैं। इसके अलावा हमारा मकसद इस क्लब के माध्यम से शहर के सभी व्यवसायिक काॅलेजों, इग्नू, आर्मी सेक्टर और क्लबों के अलावा विभिन्न लाइब्रेरियों को आपस में जोड़ना है ताकि अधिक से अधिक लोग किताबों का उपयोग कर सकें।’’ इसके अलावा राजीव गुप्ता का मानना है कि उनके इस प्रयास के चलते बड़ी संख्या में पेड़ों को भी कटने से बचाया जा सकता है।

वर्तमान में करीब 250 लोग उनके इस क्लब के सदस्य हैं जिनमें शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कुछ नामचीन लोग भी हैं। डा. गुप्ता बताते हैं, ‘‘यहां तक कि हमारे काॅलेज के पूर्व प्रधानाचार्य श्री जेपी शर्मा भी हमारे इस क्लब के सदस्य हैं जिन्होंने अपनी वर्षों की मेहनत से जमा की हुई किताबों को इन जरूरतमंदों के उपयोग के लिये दे दिया है। साथ ही कई और लोग भी अपनी किताबों इत्यादि को पढ़ने के लिये देने के इरादे से आगे आ रहे हैं।’’

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किताबों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के अलावा डा. राजीव गुप्ता खून की कमी के चलते मौत से जूझ रहे लोगों के लिये भी एक मसीहा बनकर सामने आए हैं। उन्होंने दुर्घटना इत्यादि के या फिर आपदा के समय जरूरत के आधार पर खून का प्रबंध करने के इरादे से एक वेबसाइट bloodondemand.com प्रारंभ की जिसमें वर्तमान में 2500 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। डा. राजीव बताते हैं, ‘‘वर्ष 2009 में हमारे काॅलेज के प्रिंसिपल की माताजी को एक दुर्घटना के बाद रक्त की आवश्यकता थी लेकिन घर के सदस्य तक खून देने से कतरा रहे थे। उसी समय मैंने आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त उपलब्ध करवाने की ठानी और कई स्वयंसेवकों का एक आॅनलाइन समूह तैयार किया जो किसी भी समय और किसी भी परिस्थिति में रक्तदान करने के लिये तत्पर थे।’’ डा. राजीव कहते हैं कि हमारे समाज में आज भी रक्तदान करने को लेकर काफी भ्रांतियां फैली हुई हैं और अधिकतर लोग खून लेना तो चाहते हैं लेकिन कोई भी अपने शरीर से खून देने को तैयार नहीं है।

अपनी इस वेबसाइट के बारे में और बताते हुए डा. राजीव कहते हैं, ‘‘खून देने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति हमारी इस वेबसाइट पर आकर अपना एक लाॅगिन तैयार कर सकता है और उसे पंजीकरण के पश्चात एक पासवर्ड मुहैया करवाया जाता है जिसका उपयोग वह किसी भी समय कर सकता है। हम अपनी इस वेबसाइट पर डोनर का ब्लड ग्रुप उसके मोबाइल नंबर सहित उपलब्ध करवाते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति जरूरत के समय उनसे सीधा संपर्क कर सके।’’ अपने इस प्रयास के चलते वे अबतक नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में कई लोगों की जान बचा चुके हैं।

इसके अलावा डा. राजीव कुमार गुप्ता लोगों को एक दूसरे की मदद करने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से और एक सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल बनाने की पहल के चलते एक वेबसाइट निर्माण-नोएडा (www.nirman-noida.com) का भी सफल संचालन कर रहे हैं। इसके बारे में बताते हुए वे कहते हैं, ‘‘इस वेबसाइट के माध्यम से हमारा इरादा योग्य और पेशेवर लोगों को एक मंच पर लाकर उन्हें देश और समाज को मजबूत करने के लिये प्रेरित करना है। इस वेबसाइट के माध्यम से समान सोच और विचारों वाले लोग सामने आकर अपने विचार रखते हैं और एक बेहतर समाज को बनाने की दिशा में अपने विचारों से योगदान देते हैं।’’

डा. राजीव इन सब कार्यों को अपने पैसों से ही संचालित कर रहे हैं और उनका कहना है कि उन्होंने अभी तक इन सब कामों के लिये किसी से कैसी भी आर्थिक मदद नहीं ली है। वे कहते हैं, ‘‘हां! मेरे कुछ छात्र इन वेबसाइटों को तैयार करने और इनकी देखभाल के काम में जरूर मदद करते हैं। बाकी इनमें होने वाला सारा खर्च मैं खुद ही वहन करता हूँ।’’

इन सब कार्यों के अलावा डा. राजीव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अपनी ओर से प्रयास करते रहते हैं। वे लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिये प्रेरित करते हैं। डा. राजीव कहते हैं, ‘‘मेरा मानना है कि हम सब बंदर की संतान हैं और नकल करना हमारी फितरत है। हमें अपने आसपास जो होता दिखाई देता है हम भी वही दोहराते हैं। ऐसे में अगर मैं पेड़ लगाऊंगा तो मेरी देखा-देखी और लोग भी सामने आएंगे और पेड़ लगाने के लिये प्रेरित होंगे।’’ नोएडा में जहां भी कहीं बड़ी अपराधिक गतिविधि होती है डा. गुप्ता वहीं जाकर पौधा लगाते हैं। ‘‘मैंने निठारी की खूनी कोठी के बाहर पौधा लगाया। देशभर में चर्चित हुई आरुषि के घर के बाहर उसकी याद में पौधा लगाया और अभी हाल ही में देश को हिलाने वाले अखलाक हत्याकांड में मृतक की याद में भी मैंने एक पौधा लगाया है।’’ पर्यावरण के प्रति उनके इस लगाव के चलते लोग अब उन्हें ‘‘धरतीपुत्र’’ भी कहने लगे हैं।

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डा. राजीव कुमार गुप्ता को उनके इस नेक कामों के बदले कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। उन्हें वर्ष 2009 में एयर इंडिया की तरफ से ब्राॅड आटलुक लर्नर्स टीचर (BOLT) अवार्ड से नवाजा गया जिसमें उन्हें सिंगापुर जाने का मौका मिला। इसके अलावा वर्ष 2006 में उन्हें वीक पत्रिका की ओर से ‘टीचर विद ए काॅज़’ भी चुना गया।

डा. राजीव कुमार गुप्ता अध्यापन और इन सब सामाजिक कामों के अलावा लगातार अध्ययन भी करते रहते हैं और अबतक वे कई विषयों में डिग्रियां अर्जित कर चुके हैं। डा. गुप्ता एमकाॅम, एलएलबी, पीएचडी और एमबीए करने के अलावा मास्टर इन जर्नलिज़्म भी कर चुके हैं। इसके अलावा इस वर्ष वे सीए की फाइनल परीक्षा भी देने वाले हैं। साथ ही वे सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश के सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों का नाॅमिनी के रूप में भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

डा. राजीव कुमार गुप्ता से उनके फेसबुक पेज पर संपर्क करें।

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