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वनिता शास्त्री, सात समंदर पार भारतीय संस्कृति की जड़ें मजबूत करने वाली...

हम जो भी करते हैं उसमें मानवीयता होनी चाहिए- वनिता शास्त्री

6th Jul 2015
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डॉ.वनिता सिन्हा शास्त्री, अशोका यूनिवर्सिटी की डीन कहती हैं| “जिंदगी प्रतिदिन हमें चुनौतीं देती है| हमें सीखने के लिए और नए विचारों के लिए खुला रहना चाहिए|” एक शिक्षाविद्, उद्यमी और परोपकारी होने के नाते वह सदैव चुनौतियों का सामना आसानी से करती हैं| करियर के शुरूआती सालों में उन्होंने बोस्टन में रेडवुड इन्वेस्टमेंट सिस्टम आईएनसी.(Redwood Investment system Inc.) के लिए काम किया और बाद में गैर-लाभकारी संगठनों की स्थापना की| उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद, स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट बोस्टन यूनिवर्सिटी, वेल्लेस्ले कॉलेज Massachusetts और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास dartmouth में पढ़ाया|

वनिता शास्त्री

वनिता शास्त्री


राजनीति की छात्रा होने के कारण वह गाँधी जी से बहुत प्रभावित हुई और उनकी विशेषताओ को ग्रहण किया| वह शास्त्रीय नृत्य और थिएटर में भी रूचि रखती हैं|

हर स्टोरी के साथ बातचीत में वनिता ने अपने बारे में और अशोका यूनिवर्सिटी के डीन के रूप में नई योजनाओं के बारे में बताया|

शुरूआती साल

दो बहनों और एक भाई के साथ रात्रि भोजन के समय, प्रश्न पूछना और उन पर बहस, के साथ वो बड़ी हुई| वह कहती हैं- “इसका प्रभाव मेरी जिंदगी में पड़ा| मेरी माँ हमें हमेशा कहती थी ‘ हम कुछ भी कर सकते है’, जिसने मुझे हार न मानने की आतंरिक शक्ति दी|” उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज से राजनीति विज्ञान और, एमए और एमफिल जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी से की| पीएचडी कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से की|

वनिता शास्त्री

वनिता शास्त्री


अशोका यूनिवर्सिटी में

अशोका यूनिवर्सिटी ने भारत में उदार कला कार्यक्रम की पहल की है| यही वो कारण है जिसने उन्हें बोस्टन से भारत आने के लिए उत्साहित किया और इस प्रयोग का हिस्सा बनी|

भारत में उदार कला शिक्षा एक बहु अनुशासनिक प्रारूप में छात्रों के लिए एक समग्र अनुभव बनाता है| और उच्च शिक्षा के क्षेत्र बदलाव का प्रस्ताव रखता है।

“ मैंने अपने करियर में, शिक्षाविद्, उद्यमी और प्रबंधन का नेतृत्व किया है| मैं इन सभी कौशल को एक साथ मिलाने की भूमिका में हूँ| एक अनूठी संस्था के बारे में सोचना, उसके पैमानों और कार्यक्रमों को मजबूत करने के साथ भविष्य के नेताओं को प्रेरित करने का अवसर मुझे प्रतिदिन उत्साहित करता है| ”

मेरु शिक्षा फाउंडेशन और हैबिटैट लर्निंग सेंटर

मेरु एजुकेशन फाउंडेशन का उद्देश्य उत्तर अमेरिका के दर्शकों के लिए भारत की कला, इतिहास, भाषा और संस्कृति को सीखना है| मेरु के साथ काम करते हुए, उन्होंने भारत पर सभी ग्रेड (k से 12) के लिए स्कूलों में पाठ्यक्रम बनाये हैं| वह कहती हैं “कुछ पाठ मैंने ‘द सलेम इंडिया स्टोरी, मेरीटाइम ट्रेड बिटवीन सलेम एमए एंड इंडिया (1788-1845)’ से रूपांतरित किये है| ” 2001-2002 में न्यू दिल्ली में उन्होंने हैबिटैट लर्निंग सेंटर भी खोला| जो तकनीकी शिक्षा से वंचित युवाओं को कंप्यूटर साक्षरता देता है| वह ‘माधवी मुद्गल’ और प्रसिद्ध गुरु ‘केलुचरण महापात्रा’ के मार्गदर्शन ओडिसी शैली में प्रशिक्षित भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना है। नृत्य में रूचि होने के कारण उन्होंने इसपर पढ़ना और शोध की है| वह शास्त्रीय नृत्य के साथ भारतीय सौंदर्यशास्त्र पर व्याख्यान भी देती है| साथ ही वनिता थिएटर कलाकार के रूप में काम कर चुकी हैं और अमेरिका में बच्चों को हिंदी पढ़ा चुकी हैं|

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चुनौतियाँ

वनिता कहती हैं “मेरी महिलाओं को सलाह है कि हम में से प्रत्येक अपनी यात्रा को तलाशता है| अपने भीतर की आवाज़ को सुनो और उसका पालन करो|”

वनिता ने भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के माध्यम से अपने करियर को दिशा दी| जीवन के हर मोड़ को उन्होंने खुबसूरत से अपनाया| जब उनके बच्चें बड़े हो रहे थे तब वह उन पर ध्यान देती थी| वह उन्हें स्कूल से लाती और उनके साथ समय बिताती| लेकिन अब उनका ध्यान अपने काम पर केंद्रित है|

महिला उद्यमियों

वनिता नही मानती कि टेक्नोलॉजी महिलाओं के लिए रुकावट है| “आज, महिलायें हर क्षेत्र में हैं और मुझे इस पर गर्व है| मैं सदैव दूसरी महिलाओं को सलाह देती हूँ और उन्हें अपने अनुभवों के बारे में बताती हूँ| मुझे लगता है, महिलायें संस्कृति की अनोखी तरह से वाहक हैं|” भारत ने बहुत सी महिला लीडरों को जन्म दिया है| यह बात लगातार भारतीय महिलाओं को आगे बढ़ने और असाधारण चीजें करने को प्रेरित करती हैं|

जड़ों के करीब रहकर

“मेरा मानना है आधुनिक और प्रोफेशनल होने के साथ-साथ, अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहना सामान रूप से महत्वपूर्ण है|”

वह कहती हैं “पिछले 30 सालों में मैंने नए के साथ पुराने को मिलाने की कोशिश की है| परंपरा कोई अतीत नही है| यह एक ज्ञान है जो बहुत ही वास्तविक मायनों में हमारे जीवन के लिए योगदान कर सकता है|”

माता-पिता होने के नाते, वह और उनके पति अपने बच्चों को भारत को जानने, चचेरे भाई-बहन और दादा-दादी से दोस्ती करने और भाषा बोलने के लिए प्रेरित करते है|

किताबों से परे शिक्षा

आज की दुनिया जेन वाई (Generation Y) मोबाइल फोन और ऐप्प के अनुकूल है| मेरा मानना है सीखना हमेशा चलने वाली प्रक्रिया है| मैं प्रतिदिन छात्रों, अपने बच्चों और सहकर्मी से कुछ न कुछ सीखती रहती हूँ|

वनिता सांस्कृतिक शिक्षा पर काफी जोर देती हैं| वह बताती है “अशोका में हमने कला को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है|”

दुनिया भर में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन

शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण वनिता ने इसके बदलाव को देखा है “शिक्षा बदल रही है, जिस तरीके से हमने सीखा वह बदल रहा है| युवा छात्र वह कर रहा है जो उसकी पिछली पीढ़ी ने बहुत बाद की उम्र में किया था| इन्टरनेट के माध्यम से टेक्नोलॉजी क्रांति के द्वारा जानकारी आसान हो गयी है| ऑनलाइन कोर्स से लेकर ई-लर्निंग तक सीखने के कई विकल्प हैं|”

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भारत में और अमेरिका में इकोसिस्टम

“भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा अंतर कंपनियों का उत्पाद को बाहर बनाया जाना है| मुझे लगता है यह बढ़ रहा है और इकोसिस्टम के विकास से तेजी से बदलेगा भी| उद्यमिता के दौरान असफलताओं को स्वीकार करना अमेरिका के इकोसिस्टम और सामाजिकता का हिस्सा है| हमें इस सोच को भारत में लाने और उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है|”

सीख

बोस्टन में टीआईई (TIE) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर होने के कारण वनीता बहुत से सफल उद्यमियों से बातचीत करती थी| जिसमे से कुछ का उनपर काफी प्रभाव पड़ा|

वह बताती है “मैंने उनसे बहुत कुछ सिखा| विशेष रूप से कामयाब होने पर विनम्र होना और हर छोटी चीज की कद्र करना| हम जो भी करते हैं उसमे मानवीयता होनी चाहिए| ”

वनिता अपने पूर्व सलाहकार के गुरु मंत्र “कामयाब लोग हमेशा खुश नहीं रहते, लेकिन खुश लोग हमेशा कामयाब रहते हैं” का दैनिक जीवन में पालन करती है|

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