घाट वाला स्कूल: कभी खुद की पढ़ाई के लिए करना पड़ा था संघर्ष, आज गरीब बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाते हैं नितिन

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उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में गंगा नदी के तट पर संचालित किया जाने वाला ‘घाट वाला स्कूल’ आज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इस खास कोचिंग सेंटर की स्थापना नितिन कुमार ने की थी, जिनकी खुद की कहानी बेहद प्रेरणादाई है। अपने शुरुआती दिनों में संघर्ष से भरी जिंदगी गुजारने वाले नितिन आज सैकड़ों की संख्या में जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

मालूम हो कि नितिन आज करीब 200 से अधिक बच्चों को शिक्षा के उजाले से जोड़ने का काम कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए इस कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाली छात्रा नैन्सी ने बताया है कि वो यहाँ तब पढ़ने आई थीं जब वे 7वीं कक्षा की छात्रा थीं और अब वे 12वीं की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। नैन्सी के अनुसार शुरुआत से ही उनकी शिक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी खुद नितिन ने अपने कंधों पर ली हुई है।

स्थापित किया खास एनजीओ

जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में बेहतर शिक्षा व अन्य सुविधाएं हासिल हो सकें इसके लिए नितिन कुमार ने साल 2015 में ‘एक नई राह फाउंडेशन’ नाम से एक एनजीओ शुरू किया था, इसी एनजीओ के तहत ही इस खास कोचिंग सेंटर का संचालन किया जा रहा है। मालूम हो कि एनजीओ की आय का मुख्य श्रोत लोगों द्वारा दिया जाने वाला दान है।

नितिन के पास पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा और इसी के साथ उन्होने कुछ छात्रों को लेकर अपना पहला कोचिंग सेंटर भी खोल दिया। फोटो साभार: Facebook

नितिन के अनुसार इस एनजीओ को शुरू करने की प्रेरणा दरअसल उन्हें खुद से ही मिली हैं। नितिन बताते हैं कि उनके पिता के पास कोई स्थायी नौकरी नहीं थीं और घर चलाने के लिए उनकी माँ दूसरों के घरों में काम किया करती थीं। इन परिस्थितियों के साथ नितिन ने आर्थिक रूप से काठी कठिन समय का सामना किया है और वे यह नहीं चाहते हैं कि अन्य बच्चे भी इस तरह के संघर्ष का सामना करें।  

ट्यूशन की समस्या को किया हल

नितिन अपने अनुभव को साझा करते हुए बताते हैं कि वे जिस स्कूल में पढ़ते थे वहाँ पर फीस बेहद कम होती थी लेकिन स्कूल के शिक्षक प्राइवेट ट्यूशन लेने का दबाव उनपर बनाते थे। ऐसे में कठिन आर्थिक हालातों से गुजर रहे परिवार के लिए प्राइवेट ट्यूशन के लिए हर महीने 300 रुपये का इंतजाम कर पाना काफी मुश्किल था।

नितिन ने इस समस्या का अपने ही स्तर पर हल निकाला और 10वीं कक्षा में आकर खुद ही कम पैसों में छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। नितिन के अनुसार वे ट्यूशन पढ़ाने कई किलोमीटर पैदल चलकर जाया करते थे और ऐसे में जिन बच्चों के घरों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होती थीं वे उनसे फीस नहीं लेते थे।

इस काम को देखते हुए नितिन के पास पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा और इसी के साथ उन्होने कुछ छात्रों को लेकर अपना पहला कोचिंग सेंटर भी खोल दिया। यहाँ पर नितिन अपने फाउंडेशन के जरिये बच्चों को कॉपी, पेन और पेंसिल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुफ्त में उपलब्ध कराने लगे। 

छात्रों के लिए खरीदी नाव

हर रोज़ शाम 4 बजे से 6 बजे तक नितिन द्वारा संचालित होने वाली इस ओपेन क्लास में बड़ी संख्या में छात्रों की संख्या बढ़ने लगी। हालांकि नदी के तट पर संचालित होने वाली क्लास में दूसरी तरफ से आने वाले तमाम बच्चों के पास कई बार नाव का किराया भरने के लिए पैसे नहीं होते थे, ऐसे में वे नियमित रूप से क्लास अटेंड करने में सक्षम नहीं हो पाते थे।

नितिन और उनकी टीम ने इस समस्या को हल् करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए 27 हज़ार रुपये की एक नई नाव खरीदने का फैसला किया, जो अब छात्रों को मुफ्त में कोचिंग सेंटर तक लाने और ले जाने का काम करती है।

कोरोनावायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान नितिन ने कुछ कंप्यूटर भी खरीदे हैं जिससे जरूरतमंद छात्रों को अपनी ऑनलाइन पढ़ाई को लगातार जारी रखने में मदद मिल रही है। नितिन के अनुसार उन्हें इस सफर में कुछ समस्याओं का सामना जरूर करना पड़ा है लेकिन वे इन बच्चों की शिक्षा को लेकर उनकी हर जरूरत का ख्याल रख रहे हैं।

Edited by Ranjana Tripathi

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