सरकार कृषि में ड्रोन के उपयोग को प्रोत्साहन देगी- ‘कृषि मशीनीकरण पर उप मिशन’ के तहत दी जा रही है वित्तीय सहायता

By रविकांत पारीक
January 23, 2022, Updated on : Sun Jan 23 2022 05:20:52 GMT+0000
सरकार कृषि में ड्रोन के उपयोग को प्रोत्साहन देगी- ‘कृषि मशीनीकरण पर उप मिशन’ के तहत दी जा रही है वित्तीय सहायता
कृषि मंत्रालय ड्रोनों की खरीद के लिए कृषि संस्थानों को 10 लाख रुपये तक अनुदान उपलब्ध कराएगा। किसान सहकारी समितियों, एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर्स को ड्रोन की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी मिलेगी। सब्सिडीयुक्त खरीद से आम आदमी की ड्रोन तक पहुंच बढ़ेगी।
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भारत में गुणवत्तापूर्ण खेती को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एक प्रमुख पहल करते हुए, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस क्षेत्र के हितधारकों के लिए ड्रोन तकनीक को किफायती बनाने के दिशानिर्देश जारी किए।


“कृषि मशीनीकरण पर उप मिशन” (SMAM) के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है, जिसमें कृषि ड्रोन की लागत का 100 प्रतिशत तक या 10 लाख रुपये, जो भी कम हो, के अनुदान की कल्पना की गई थी। यह धनराशि कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा ड्रोन की खरीद के लिए अनुदान के रूप में दी जाएगी। इसके तहत किसानों के खेतों में बड़े स्तर पर इस तकनीक का प्रदर्शन किया जाएगा।


कृषक उत्पादक संगठन (FPO) किसानों के खेतों पर इसके प्रदर्शन के लिए कृषि ड्रोन की लागत का 75 फीसदी तक अनुदान पाने के लिए पात्र होंगे।


उन कार्यान्वयन एजेंसियों को 6,000 रुपये प्रति हेक्टेयर आकस्मिक व्यय उपलब्ध कराया जाएगा, जो ड्रोन खरीदने की इच्छुक नहीं हैं लेकिन कस्टम हायरिंग सेंटर्स, हाई-टेक हब्स, ड्रोन मैन्युफैक्चरर्स और स्टार्टअप्स से किराये पर लेना चाहते हैं। उन कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए आकस्मिक व्यय 3,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित रहेगा, जो ड्रोन के प्रदर्शन के लिए ड्रोन खरीदना चाहते हैं। वित्तीय सहायता और अनुदान 31 मार्च, 2023 तक उपलब्ध होगा।

Drone use in Agriculture

सांकेतिक चित्र

ड्रोन के उपयोग के माध्यम से कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने के क्रम में, मौजूदा कस्टम हायरिंग सेंटर्स द्वारा ड्रोन और उससे जुड़े सामानों की 40 प्रतिशत मूल लागत या 4 लाख रुपये, जो भी कम हो, वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना किसान सहकारी समितियों, FPO और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा की जाती है। वहीं SMAM, RKVY या अन्य योजनाओं से वित्तीय सहायता के साथ किसान सहकारी समितियों, एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा स्थापित किए जाने वाले नए सीएचसी या हाई-टेक हब्स की परियोजनाओं में ड्रोन को भी अन्य कृषि मशीनों के साथ एक मशीन के रूप में शामिल किया जा सकता है।


कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना कर रहे कृषि स्नातक ड्रोन और उससे जुड़े सामानों की मूल लागत का 50 प्रतिशत हासिल करने या ड्रोन खरीद के लिए 5 लाख रुपये तक अनुदान समर्थन लेने के पात्र होंगे। ग्रामीण उद्यमियों को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं या उसके समान परीक्षा उत्तीर्ण होने चाहिए; और उनके पास नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा निर्दिष्ट संस्थान या किसी अधिकृत दूरस्थ पायलट प्रशिक्षण संस्थान से दूरस्थ पायलट लाइसेंस होना चाहिए।


सीएचसी/ हाई-टेक हब्स के लिए कृषि ड्रोनों की सब्सिडीयुक्त खरीद से तकनीक किफायती हो जाएगी और इनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी। इससे भारत में आम आदमी तक ड्रोन की पहुंच बढ़ेगी और काफी हद तक ड्रोन का घरेलू उत्पादन भी बढ़ेगा।


नागर विमानन मंत्रालय (MoCA) और नागर विमानन महानिदेशक (DGCA) द्वारा सशर्त छूट सीमा के माध्यम से ड्रोन परिचालन की अनुमति दी जा रही है। MoCA ने भारत में ड्रोन के उपयोग और संचालन को विनियमित करने के लिए 25 अगस्त, 2021 को GSR संख्या 589 (ई) के माध्यम से ‘ड्रोन नियम 2021’ प्रकाशित किए थे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कृषि, वन, गैर फसल क्षेत्रों आदि में फसल संरक्षण के लिए उर्वरकों के साथ ड्रोन के उपयोग और मिट्टी तथा फसलों पर पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) भी लाई गई हैं। प्रदर्शन करने वाले संस्थानों और ड्रोन के उपयोग के माध्यम से कृषि सेवाओं के प्रदाताओं को इन नियमों/ विनियमों और एसओपी का पालन करना होगा।