तमिलनाडु के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक कुछ इस तरह कर रही हैं लॉकडाउन के दौरान गरीब परिवारों की आर्थिक मदद

तमिलनाडु के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक कुछ इस तरह कर रही हैं लॉकडाउन के दौरान गरीब परिवारों की आर्थिक मदद

Tuesday May 05, 2020,

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कोरोना महामारी के चलते सामने आए इस कठिन समय में स्कूल की हेडमास्टर गांवों में जरूरतमंद परिवारों को मदद राशि बाँट रही हैं।

पी. कन्नगी ने किराने के सामान के लिए छात्रों के परिवारों को 1000 रुपये देती हुईं।

पी. कन्नगी ने किराने के सामान के लिए छात्रों के परिवारों को 1000 रुपये देती हुईं।



मंगलवार को 1,400 से अधिक मौतों और 46,541 कोरोनोवायरस मामलों के साथ ही भारत सरकार ने सोमवार से तीसरी बार देशव्यापी लॉकडाउन को 18 मई तक के लिए बढ़ा दिया है।


इस दौरान बेहतर आय वाले लोग बुनियादी जरूरतों को वहन कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान कई दैनिक मजदूरी वाले मजदूरों और वंचितों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है, जिसमें उनके परिवार भी शामिल हैं।


इनमें से अधिकांश परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजते हैं, जो भारत सरकार द्वारा दिए गए वादे के अनुसार मुफ्त शिक्षा और मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करता है, हालाँकि इस कठिन समय में पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।


लेकिन तमिलनाडु के थुप्पपुरम में पंचायत यूनियन प्राइमरी स्कूल की एक हेडमिस्ट्रेस एक शिक्षक के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि इन बच्चों को इस दौरान भोजन मिलता रहे।





परमेश्वरी वरदराजन के साथ हेडमिस्ट्रेस पी. कन्नगी ने अपने छात्रों की दुर्दशा से परेशान होकर 41 परिवारों को एक हजार रुपये देने का फैसला किया, जो अपनी जरूरत का सामान खरीदने के लिए सक्षम नहीं हैं।


एडेक्स लाइव के अनुसार,

"मैं लॉकडाउन के कारण लोगों की कठिनाइयों को समझती हूं। मेरे बेटों ने मुझे यह विचार दिया कि मैं अपने स्कूल के छात्रों के परिवारों की मदद कर सकती हूं। मैंने इसके बारे में स्कूल में ही काम करने वाले एक अन्य शिक्षक को बताया और  वह भी इससे सहमत हो गए। मैंने 36,000 रुपये का योगदान दिया और उन्होने 5000 रुपये का योगदान दिया। मैंने प्रत्येक छात्र के घर जाकर पैसे दिए। हम ऐसा करके खुश हैं।"


दोनों शिक्षक थुप्पपुरम में गए और व्यक्तिगत रूप से इन परिवारों को पैसा दिया। उन्होंने इन कठिन समय में व्यक्तिगत स्वच्छता की आवश्यकता के बारे में भी बताया।

“यह अप्रत्याशित है। जब हमें समर्थन की जरूरत होती है तो हमें सहायता मिलती है। यह हमारे लिए बहुत मददगार होगा। ”सी. इलवरासन, वेम्बाकुड़ी गांव के रहने वाले अविभावक ने द हिंदू को बताया। उन्होंने कहा कि समय पर मदद से उनके बच्चों में भी सहानुभूति का महत्व बढ़ेगा।