सौर ऊर्जा से कपड़े तैयार कर रहा है यह टेक्सटाइल डिजाइनर, हजारों ग्रामीणों को मिल रहा है रोज़गार

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बड़ा आइडिया कहीं से भी आ सकता है। 2016 में प्रगति मैदान में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले की एक यात्रा लखनऊ स्थित कपड़ा डिजाइनर अभिषेक पाठक के करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई। उस दौरान आईआईटी-दिल्ली और महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (एमजीआईआरआई) वर्धा द्वारा डिजाइन किए गए एक सौर चरखे ने अभिषेक का ध्यान आकर्षित किया और इस डिजाइनर फौरन ही एक व्यवसाय शुरू करने के लिए इस इनोवेशन का लाभ उठाने की ठान ली।

इस कॉन्सेप्ट की गहराई में जाने और विशेषज्ञों से बात करने के बाद इस उद्यमी ने महसूस किया कि सौर चरखा या करघा न केवल हाथ से चलने वाले चरखों की तुलना में अधिक उत्पादक है, बल्कि कठिन परिश्रम को भी कम करते हैं। अभिषेक ने जल्द ही एक स्थायी फैशन ब्रांड बनाने के लिए सौर चरखों, करघों और सिलाई मशीनों का उपयोग करने के लिए एक व्यावसायिक मैप तैयार किया और साल 2016 में अपने उद्यम ‘ग्रीनवियर फैशन’ की शुरुआत कर डाली।

ग्रीनवियर लखनऊ स्थित बी2बी और बी2सी क्लोदिंग ब्रांड है जो सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों का उपयोग यार्न, फैब्रिक और गारमेंट्स के उत्पादन के लिए करता है। स्टार्टअप के बारे में जो सबसे खास बात है वो यह है कि उसने सामुदायिक भागीदारों और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से एक डिसेंट्रलाइज्ड इंटरनल वैल्यू चेन का निर्माण किया है, जहां इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार में लगभग 5,000 ग्रामीण महिलाएं, 480 बुनकर और 180 कारीगर शामिल हैं।

लखनऊ में ग्रीनवियर की निर्माण इकाई में बुनकरों के साथ संस्थापक अभिषेक पाठक

'सौर वस्त्र' के लिए बाजार

जबकि स्टार्टअप को 2016 में शुरू किया गया था, लेकिन इसने 2019 में अपना परिचालन शुरू किया। निफ्ट-दिल्ली में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने प्रॉडक्ट डेवलपमेंट डिजाइनर के रूप में यूएस-आधारित होम फर्निशिंग ब्रांड के साथ अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने जल्द ही अपने पहले कपड़ों के उद्यम ‘प्रकृति’ के साथ उद्यमशीलता की शुरुआत की थी। हालांकि संस्थापकों की "सीमित व्यावसायिक समझ" के कारण संचालन के छह महीने के भीतर वह बंद हो गया।

इस बीच अभिषेक ने स्क्रैप का उपयोग करके भारतीय पारंपरिक डिजाइन और हस्तनिर्मित शिल्प में गहरी रुचि विकसित कर ली थी और फिर वे नोएडा स्थित गैर-लाभकारी धृष्टी फाउंडेशन के साथ भी जुड़े, जो इसी तरह की ही एक पहल शुरू कर रहा था। तीन साल तक एक लीड क्राफ्ट डिजाइनर के रूप में काम करते हुए संस्थापक को खादी के साथ-साथ इसकी विकास क्षमता में बाधा डालने वाले मुद्दों को भी समझने का मौका मिला।

अभिषेक कहते हैं, “मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैदान पर खादी के कारीगर और स्पिनर क्यों नहीं थे। मुख्य दोष उत्पादन प्रक्रिया में शामिल कठिन परिश्रम का ही था। एक महिला मैनुअल चरखे पर लगातार आठ घंटे तक हाथ नहीं चला सकती और वह खादी के कपड़े के लिए मुश्किल से 50 रुपये कमाती है। यहीं से सौर चक्रों के बारे में मेरी दिलचस्पी बढ़ी। मैंने इस कॉन्सेप्ट पर ध्यान केंद्रित किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

अभिषेक को स्टार्टअप के वर्तमान सामुदायिक भागीदार और सरकार द्वारा प्रायोजित गैर-लाभकारी संस्था भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्थान के अध्यक्ष द्वारा भी संपर्क किया गया था।

अभिषेक कहते हैं, “सौर चरखा आधारित कताई और संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण भारत में लाखों से अधिक महिलाओं, बुनकरों और कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के संगठन के मिशन के साथ आगे बढ़ना मेरा उद्देश्य है। 2016 में मैंने ग्रीनवियर शुरू किया और साथ ही सीईओ के रूप में हरित खादी से जुड़ गया। हमने मिशन सोलर चरखा के लिए पायलट प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और 3,500 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को सौर चरखा कताई के लिए प्रशिक्षित भी किया है।”

वैल्यू चेन

स्टार्टअप ने यार्न और फैब्रिक के उत्पादन का विकेंद्रीकरण किया है और परिधान सिलाई के लिए एक इन-हाउस यूनिट का निर्माण किया है। यह हरित खादी के माध्यम से धागे की खरीद करता है, जिसने चार राज्यों में 5,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को अपने घरों में सौर चर्खों से लैस किया है। यह संगठन महिलाओं को अपने स्वयं के चरखे खरीदने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करता है और वित्तीय सहायता की सुविधा प्रदान करता है।

अभिषेक कहते हैं, "एक कारीगर काम के घंटे के आधार पर सौर चक्र के साथ प्रति माह लगभग 6,000 रुपये कमा सकता है।" इसके बाद धागों को गुणवत्ता जांच और बुनकरों के लिए सैंपल डिजाइन तैयार करने के लिए सभी महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित ग्रीनवियर की सैंपल इकाई में भेजा जाता है।

यार्न, सैंपल डिजाइन के साथ नालंदा, गया, भागलपुर, बाराबंकी, वाराणसी और बिजनौर सहित यूपी और बिहार के छह क्षेत्रों में फैले ग्रीनवियर के सहयोगी पारंपरिक कपड़ा बुनकर समूहों को भेजे जाते हैं। कपड़े सौर करघों पर बुने जाते हैं, जिसमें 480 से अधिक बुनकर शामिल होते हैं। इसने लखनऊ में 180 से अधिक इन-हाउस कारीगरों के साथ अपनी खुद की निर्माण इकाई भी स्थापित की है, जिनमें से 110 महिलाएं हैं, जहां कपड़ों को सौर ऊर्जा से चलने वाली सिलाई मशीनों पर प्रोसेस किया जाता है।

कपड़े ग्रीनवियर द्वारा विभिन्न मुख्यधारा के फैशन ब्रांडों जैसे डब्ल्यू फॉर वीमेन और ऑरेलिया और लखनऊ में इसकी दो मुख्य खुदरा दुकानों के लिए भेजे जाते हैं। अंतिम उत्पाद की मूल्य सीमा उत्पाद के आधार पर 300 रुपये से 5,000 रुपये तक होती है।

उत्तर प्रदेश में अपने घर पर सौर चक्र चलाती महिला

बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू स्ट्रीम और फंडिंग

स्टार्टअप थोक कपड़े की बिक्री, कपड़े की खुदरा बिक्री, ब्रांडों के लिए सिलाई, तैयार कपड़ों की खुदरा बिक्री और संस्थानों और छोटे भागीदारों को वर्दी, बेडशीट, कवर और अन्य कपड़ा सामग्री की बिक्री से अपना राजस्व उत्पन्न करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के अलावा स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 में क्रमशः 2.5 करोड़ रुपये और 2 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।

स्टार्टअप ने कोलकाता स्थित ज़ायनिका जैसे छोटे पैमाने के ब्रांडों के साथ भागीदारी भी की है, जो विकलांग लोगों के लिए कपड़े डिजाइन करते हैं। इसी के साथ इस सूची में लखनऊ में सरस्वती डेंटल कॉलेज और अस्पताल और सभी क्षेत्रों के सरकारी स्कूल शामिल हैं, जहां यह स्टार्टअप वर्दी की आपूर्ति के साथ ही अन्य कपड़ा आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

इसने पहले अपने उत्पादों को अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर क्रमशः अपनी पहल अमेज़ॅन कारीगर और फ्लिपकार्ट समर्थ के माध्यम से रोल आउट किया था। अब यह 2022 में इस मार्केटप्लेस के साथ अपने D2C प्लेटफॉर्म के साथ ऑनलाइन शुरुआत करने की योजना बना रहा है।

स्टार्टअप अब तक दो राउंड से 75 लाख रुपये का फंड जुटा चुका है। 2019 में इसे अपने इनक्यूबेटर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-कलकत्ता इनोवेशन पार्क (IIMCIP) से 50 लाख रुपये की सीड फंडिंग प्राप्त हुई थी। इसके बाद सिएटल स्थित निवेशकों उपया सोशल वेंचर्स से भी इसने 35 लाख रुपये का निवेश जुटाया था।

लखनऊ में ग्रीनवियर फैशन रिटेल स्टोर

हालांकि महामारी ने लगभग सभी व्यवसाय को धीमा कर दिया है लेकिन स्टार्टअप विभिन्न उद्योग पहलों से सहायता के कारण विकास के स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहा है। इसे हाल ही में दिल्ली स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) और विलग्रो इनोवेशन फाउंडेशन पहल-पावरिंग लाइवलीहुड से समर्थन मिला है। ग्रीनवियर कार्यक्रम के तहत चुने गए छह स्वच्छ ऊर्जा इनोवेशन में से एक था और उसी के माध्यम से अपनी नई फंडिंग प्राप्त करने में कामयाब रहा है।

अभिषेक कहते हैं, “कार्यक्रम ने महामारी के दौरान हमारा समर्थन किया। हमें अपने व्यापार मॉडल को बेहतर बनाने और प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्राप्त हुए। टीम ने हमें बाजार की योजना बनाने और नए उत्पादों के परीक्षण में भी मदद की।”

प्रतिस्पर्धा पर बात करते हुए स्टार्टअप इस व्यवसाय मॉडल और मूल्य श्रृंखला के बाद बाजार में एकमात्र खिलाड़ी होने का दावा करता है। संस्थापक बड़े ब्रांडों के साथ साझेदारी के अवसर देख रहे हैं और खादी के स्वामित्व वाले स्टोर से प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं।

अभिषेक कहते हैं, “अधिकांश बड़े ब्रांड मात्रा और गुणवत्ता की तलाश करते हैं। इसलिए एक समान विकेंद्रीकृत कपड़ा मूल्य श्रृंखला को अपनाना उनके लिए संभव नहीं है। हालांकि, यह हमारे जैसे स्टार्टअप के साथ साझेदारी का अवसर विकसित करता है जहां फैशन उद्योग एक साथ कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों और महिलाओं के लिए आजीविका उत्पन्न करने का प्रयास किया जा सकता है।”

वे आगे कहते हैं, “हम वैल्यू चेन में महिलाओं को शामिल करने की हमारी सामाजिक संरचना के साथ-साथ स्किल, स्केल और स्पीड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य पुरानी पारंपरिक कला के पुनरुद्धार के साथ-साथ अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों को इस प्रक्रिया में शामिल करना है।"

स्टार्टअप का लक्ष्य 2022 में अपना ईकॉमर्स स्टोर स्थापित करने के अलावा 3-5 गुना राजस्व वृद्धि के साथ स्टार्टअप की क्षमता को दोगुना करना है। अभिषेक ने कहा, "हम पूरे भारत में लगभग 10 नए फ्रेंचाइजी-आधारित स्टोर खोलने और 5 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रख रहे हैं।"

Edited by Ranjana Tripathi

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