3 लाख रुपये से शुरू हुए इस मैटरनिटी स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2021 में कैसे कमाए 6 करोड़ रुपये, पेंडेमिक में हासिल की 6 गुना ग्रोथ

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सुरभि भाटिया ने जुलाई 2018 में बेंगलुरु से मैटरनिटी स्टार्टअप द मॉम स्टोर (The Mom Store) की स्थापना की। यह स्टार्टअप उनकी खुद की "व्यक्तिगत मातृत्व के सफर" का हिस्सा था। एक मां के रूप में सुरभि ने पाया कि बहुत से ऐसे प्रोडक्ट हैं, जो भारतीय बाजार में हैं नहीं या फिर आसानी से मिलते नहीं है। इसी ने उन्हें इस मैटरनिटी स्टार्टअप को शुरू करने की प्रेरणा दी।

3 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी और तीन उत्पादों की के साथ शुरू हुआ यह ऑनलाइन पोर्टल अब विभिन्न प्रकार के मैटरनिटी वियर, नर्सिंग एक्सेसरीज, बेबी क्लोदिंग, फीडिंग गियर और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराता है।

लॉन्च के बाद से ही मैटरनिटी स्टार्टअप ने काफी ग्रोथ देखी है। द मॉम स्टोर के उत्पाद का विस्तार अब 5,700 से अधिक एसकेयू तक है। साथ ही इसके क्यूरेटेड मार्केटप्लेस मोड में ऑनबोर्ड विक्रेताओं के लिए 1,700 से अधिक एसकेयू में इसके प्रोडक्ट उपलब्ध हैं। इसने पिछले वर्ष में 1,00,000 से अधिक ऑर्डर बेचे हैं और वित्त वर्ष 2021 में 6 करोड़ रुपये की आमदनी हासिल की है, जो निवेश किए हुए रकम का 200 गुना है।

मॉम स्टोर ने वित्त वर्ष 2019 और 2018 में क्रमशः 2 करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये की आमदनी दर्ज की थी। वहीं वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वह 12 करोड़ रुपये के सालाना रेवेन्यू रन रेट के साथ बढ़ रही है।

सुरभि ने योरस्टोरी को बताया,

"पिछले दो वर्षों में हमारी 6 गुना वृद्धि हुई है और हम स्थिर गति से बढ़ रहे हैं क्योंकि हमने अपनी पेशकशों का विस्तार करना जारी रखा हैं और अपने मार्केटिंग, सोशल मीडिया और एसईओ प्रयासों के जरिए एक बड़े कस्टमर बेस तक पहुंचते हैं।" 

वह कहती हैं,

“हमने नर्सिंग के अनुकूल, स्टाइलिश, उपयोगी और आरामदायक मैटरनिटी अपैरल मुहैया करके देश भर में 200,000 से अधिक महिलाओं के जीवन को छुआ है। हमारे पास प्रीमी साइज से शुरू होने वाले बच्चों के कपड़े, एसेसरीज और आवश्यक वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला भी है, जिनपर माताएं आसानी से गुणवत्ता और आराम के लिए भरोसा कर सकती हैं।"

स्थापना के बाद से, फाउंडर्स ने 30 प्रमुख कैटेगरी और 65 सब-कैटेगरी में मातृ-शिशु उत्पादों में पेश किया है और इन्हें भारत और दुनिया भर में वितरित किया है।

अपनी खुद की वेबसाइट पर बेचने के अलावा, द मॉम स्टोर के प्रोडक्ट दूसरे मार्केटप्लेस पर भी उपलब्ध हैं। इनमें मिंत्रा, अमेजन, फर्स्टक्राई, एजियो, होप्सकॉच आदि शामिल हैं। इसने बेंगलुरु और हैदराबाद के चुनिंदा मदरकेयर स्टोर्स में अपने प्रोडक्ट लॉन्च कर ऑफलाइन रिटेल में भी प्रवेश किया। 

सुरभि कहती हैं,

“हम एक मां और बच्चे से जुड़ा एक बड़ा ब्रांड बनने चाहते हैं, जिसके पास सभी कैटेगरी और सेगमेंट के प्रोडक्ट ऑफर करने को हों। इसमें गर्भावस्था से लेकर, मातृत्व के विभिन्न चरणों के दौरान आवश्यक सभी उत्पादों शामिल हैं। हमारे पास एक ब्लॉगिंग कम्युनिटी भी है, जिस पर देश भर की माताओं ने हजारों की संख्या में लेख शेयर किए हैं। हम इसे एक बड़ी कम्युनिटी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

"हम अपने खुद के मार्केटप्लेस मॉडल को भी विकसित करना जारी रखेंगे जहां हमारे पास 15 से अधिक ऑनबोर्ड ब्रांड हैं। साथ ही हम इस सेगमेंट में शानदार पेशकशों को जारी रखने के अलावा अन्य ब्रांडों के साथ गठजोड़ करना भी जारी रखेंगे।" 

अब तक का सफर

शुरुआत दिनों को याद करते हुए, सुरभि कहती हैं कि जब उन्होंने स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया तो उस समय मैटरनिटी बाजार "भारत में लगभग अस्तित्व में ही नहीं" था।

सुरभि कहती हैं,

“प्रेग्नेंट महिलाओं या नई मां के पास काफी सीमित विकल्प थे और ऐसे ब्रांडों की कमी थी जिन पर वह आंख मूंद कर अपने बच्चे के लिए भरोसा कर सकती थी। मैंने बाजार में इस अंतर को दूर करने के लिए 2018 में द मॉम स्टोर लॉन्च किया।”

आईआईएम कोझीकोड की पूर्व छात्र रही सुरभि ने अमेरिका में डेलॉइट में टेलीकॉम और मीडिया टेक्नोलॉजी के लिए एक रणनीति सलाहकार के रूप में काम किया था। बाद में उन्होंने पीटर इंग्लैंड और एलन सॉली जैसे ब्रांड के स्वामित्व वाली आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड में बिजनेस एक्सीलेंस टीम के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।

स्टार्टअप शुरू करने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां भी आईं।

"टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और ऑपरेशन के क्षेत्र में बिना किसी पूर्व अनुभव के अपने पैसे से बिजनेस को शुरू करना काफी चुनौती भरा रहा। कोरोना महामारी के दौरान मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन सप्लाई चेन की स्थिति अच्छी नहीं रही। कुछ मैन्युफैक्चरर्स ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं, तो कही मजदूरों और रॉ मैटेरियल की बढ़ी हुई दाम की दिक्कत थी।"

वह कहती हैं कि डिजिटल मार्केटिंग अधिक महंगी हो गई क्योंकि अब हर कोई डिजिटल हो गया। "हमें अपनी जेब खाली किए बिना अगर वेबसाइट पर ट्रैफिक और बिक्री बरकरार रखना चाहते हैं, तो इसके लिए काफी क्रिएटिव होने की जरूरत है।" 

एक एंप्लॉयर के तौर पर कोरोना महामारी के दौरान काम करना एक चुनौती थी क्योंकि टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रिमोट लोकेशन पर थे। ई-कॉमर्स ऑफिसों के कर्मचारियों के लिए वायरस की चपेट में आने का खतरा अधिक था क्योंकि वह ज्यादा बाहर रहते थे। ऐसे में कामकाज को सीमित संसाधनों, नियमित सैनिटाइजेशन, शुरुआती दिनों में टीकाकरण आदि के साथ मैनेज किया जाना पड़ा।

हालांकि सुरभि का कहना है कि पिछले दो से तीन वर्षों की चुनौतियों ने उन्हें आंत्रप्रेन्योरशिप को लेकर महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। साथ 15 सदस्यीय टीम और व्यवसाय के लिए एक मजबूत नींव रखी है।

भविष्य की योजना

मॉम स्टोर अब अपने बिजनेस को तेजी से बढ़ाने और "भारतीय बाजार में एक मजबूत उपस्थिति बनाने" के लिए अपनी पहली फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। उसका लक्ष्य पूरे भारत में माताओं द्वारा "सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद ब्रांड" बनने का है।

सुरभि कहती हैं,

"हम व्यक्तिगत सामग्री और सूचना-आधारित खरीदारी अनुभव के जरिए एक शानदार अनुभव प्रदान करने का प्रयास करेंगे, जो मातृत्व यात्रा में हर एक मील के पत्थर को पूरा करता है।" 

ब्रांड का लक्ष्य मदरकेयर, ऑफलाइन पॉपअप स्टोर और प्रदर्शनियों के माध्यम से ऑफलाइन रिटेल में अपनी उपस्थिति का विस्तार करना है, और फिर अगले तीन वर्षों में एक एक्सपीरियंस स्टोर का निर्माण करना है।

मॉम स्टोर ने नवजात बच्चों और मातृत्व गिफ्टिंग के लिए कस्टमाइज्ड कॉर्पोरेट उपहार समाधान प्रदान करके विकास के लिए नए चैनल भी बनाए हैं। इस साल, स्टार्टअप ने कॉरपोरेट्स को 500 से अधिक कस्टमाइज्ड गिफ्ट बॉक्स की आपूर्ति की है, जिसमें एक फिनटेक दिग्गज, एक रिसर्च कंसल्टेंसी और एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी शामिल है।

स्टार्टअप ने हाल ही में डाइस मीडिया की एक यूट्यूब वेब सीरीज "फर्स्ट्स" के लिए वार्डरोब पार्टनर के रूप में सिल्वर स्क्रीन पर शुरुआत की, जिसे सीजन 6 में नायक द्वारा पहने जाने वाले मातृत्व परिधान के लिए दो मिलियन से अधिक बार देखा गया। 

सुरभि कहती हैं,

“भारत में मातृत्व बाजार करीब 2,000 करोड़ रुपये आंका गया है, जो साल दर साल 17 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है। साथ ही वूमंसवियर सेगमेंट के अंदर सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट भी है। बच्चों का परिधान बाजार 1.2 अरब डॉलर का है और प्रतिस्पर्धी होने के बावजूद यह अभी भी कुछ ब्रांडों के साथ अत्यधिक असंगठित है। हम मातृत्व और बच्चों के परिधान बाजार में काम करेंगे।”

Edited by Ranjana Tripathi