देश के सबसे बड़ी अगरबत्ती निर्माताओं में कैसे शामिल हो गया दिल्ली के सदर बाजार से शुरू हुआ यह छोटा सा ट्रेडिंग बिजनेस

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उत्तर में लिली के फूल से लेकर दक्षिण में चंपा, और लगभग हर जगह पाई जाने वाली चमेली तक, भारतीय सुगंध का एक समृद्ध इतिहास है। भारतीय सुगंध के इन समृद्ध विकल्प पर दांव लगाना और उन्हें लाखों भारतीय परिवारों की प्रार्थनाओं में शामिल कराने का काम किया हरि दर्शन ने। यह धूप, अगरबत्ती और एरोमाथेरेपी उत्पादों की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है।

हरि दर्शन के संस्थापक परिवार ने सन 1800 के समय में जड़ी-बूटियों और सुगंधित आवश्यक तेलों का व्यापार किया, लेकिन 1947 में विभाजन के दौरान व्यापार अचानक रुक गया।

बहरहाल किसी तरह सुगंधित आवश्यक तेलों का पारंपरिक व्यवसाय बच गया और फिर 1970 में नई दिल्ली के सदर बाजार से वर्तमान ब्रांड, हरि दर्शन का जन्म हुआ था।

योरस्टोरी के साथ बातचीत में, चौथी पीढ़ी के उद्यमी और हरि दर्शन सेवाश्रम प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गोल्डी नागदेव बताते हैं कि कैसे ब्रांड ने 100 से अधिक वर्षों में अपनी विरासत का निर्माण किया है। 

वह कहते हैं, "धूप और अगरबत्ती के साथ, हम दिव्य आनंद के कुछ पल बेच रहे हैं और यही हमें आगे बढ़ाता है। लोग जब प्रार्थना कर रहे होते हैं तो हमें याद करते हैं।"

इन सालों के दौरान, हरि दर्शन ने अगरबत्ती के बाजार में खुद को एक मजबूत कंपनी के रूप में स्थापित किया है, जो इस क्षेत्र में साइकिल प्योर अगरबत्ती, जेड ब्लैक और मंगलदीप जैसी कंपनियों के साथ मुकाबला कर रही है।

ब्रांड का दावा है कि वह इस समय भारतीय बाजार में सालाना करीब 300 करोड़ रुपये के अगरबत्ती प्रोडक्ट्स का उत्पादन कर रही है। 

छोटा बिजनेस, बड़ा मौका

इस सबकी शुरुआत दिल्ली में धूप और अगरबत्ती के ट्रेडिंग बिजनेस के साथ हुई। 1960 के दशक में हरि दर्शन ने शाहदरा में धूप का एक छोटा सा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित किया।

उस समय, ब्रांड ने अपने उत्पादों को बिना किसी ब्रांडिंग और लेबलिंग के बेचा। 1970 के दशक में, जब ब्रांडिंग का कॉन्सेप्ट शुरू हुआ, तब गोल्डी के पिता की अगुआई में "हरि दर्शन" ब्रांड अस्तित्व में आया।

गुणवत्ता, नयापन और ग्राहकों की संतुष्टि के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, ब्रांड ने एक राज्य से दूसरे राज्य में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया, फिर धीरे-धीरे पूरे देश को कवर किया। 

1990 के दशक की शुरुआत में, हरि दर्शन ने भारत के बाहर भी निर्यात करना शुरू कर दिया।

गोल्डी कहते हैं, “हम अभी भी सदर बाजार में उस छोटी 10 फीट बाई 15 फीट की दुकान के मालिक हैं। कई बार यह सोचकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि आज हम कहां से कहां पहुंच गए हैं। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि हमारे पूर्वजों को उनकी दृष्टि में विश्वास था, और मैं इसे अपने साथ आगे ले जा रहा हूं।”

आज हरि दर्शन के पास इंडस्ट्री का सबसे बड़ा अगरबत्ती और उससे संबंधित उत्पादों के उत्पादन की मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग सेंटर हैं, जो लॉजिस्टिक के जरिए पूरे भारत से जुड़ी है। गोल्डी का दावा है कि कंपनी का टर्नओवर अभी 150 करोड़ रुपये का है।

प्रभाव छोड़ना

कुछ पैक्स से लेकर रोजाना कई ट्रकों में सामान लोड होने तक, हरि दर्शन ने अगरबत्ती बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

गोल्डी योरस्टोरी को बताते हैं, “लोग हमारे उत्पाद का उपयोग बहुत विश्वास के साथ करते हैं और हम अपनी गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते। इसी ने हमें आगे बढ़ाया है। हम कितना निर्माण करते हैं, इसका संख्या देना मुश्किल है, लेकिन हम एक दिन में 35-40 ट्रकों में लगभग 70-75 तरह के उत्पाद भेज रहे हैं।”

असल में हरि दर्शन आज की तारीख में पश्चिम एशिया, श्रीलंका, लैटिन अमेरिका और अन्य देशों में अगरबत्ती और धूप का निर्यात करता है।

कच्चे माल की उपलब्धता के बारे में बात करते हुए, गोल्डी का कहना है कि भारत में अधिकांश कच्चे माल उपलब्ध हैं, लेकिन वह कुछ माल का सक्रिय रूप से आयात भी करते हैं। .

वे कहते हैं, “भारत में अनुपलब्धता तो एक कारण है, लेकिन इसके अलावा कई अन्य कारक भी हैं। दुनिया को अब एक बड़े बाजार के रूप में देखा जा रहा है। अगर कम लागत में कोई आपकी क्वालिटी, इनोवेशन, फीचर्स में इजाफा कर रहा है, तो आयात करने में कोई हानि नहीं है। एक बहुत अधिक संरक्षण वाली अर्थव्यवस्था अक्षमता को पैदा करती है।” 

विपरीत हालात से निपटना

गोल्डी का दावा है कि अगरबत्ती उद्योग में दो प्रमुख चुनौतियां हैं - असंगठित खिलाड़ी और ब्रांड को लेकर कम जागरुकता

गोल्डी बताते हैं, “अगरबत्ती उद्योग मूल रूप से एक असंगठित क्षेत्र है। उनके साथ प्रतिस्पर्धा करना, लागत को लेकर समझौता करना, और निम्न-गुणवत्ता की प्रतिबद्धता एक अदृश्य दुश्मन से लड़ने के समान है। FMCG उत्पादों को खरीदते समय जिस तरह लोग ब्रांड को वरीयता देते हैं, वैसा वे अगरबत्ती के मामले में नहीं करते हैं। इससे असंगठित और स्थानीय खिलाड़ियों की संख्या में तेजी आई है जो बेहतर रिटेल मार्जिन की पेशकश कर सकते हैं। कंपनियों को रिटेल विक्रेताओं और चैनल पार्टनर्स को इंसेंटिव देने होते हैं, जिससे वे आपके ब्रांड को पसंदीदा बताकर उसे आगे बढ़ाए। ऐसे में यह अतिरिक्त लागत बढ़ाता है।”

एक अन्य चुनौती कच्चे माल की लागत में तेजी से बढ़ोतरी है, क्योंकि धूप और अगरबत्ती विभिन्न स्रोतों से मिले कच्चे माल पर निर्भर होता है, इसमें प्राकृतिक, सिंथेटिक, घरेलू, आयातित, कृषि-आधारित, पैकेजिंग आदि शामिल हैं।

Edited by Ranjana Tripathi

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