भारत में कंपनियों के CEO की एवरेज सैलरी 11 करोड़ रुपये से अधिक: रिपोर्ट

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साल 2006 में पर्दे पर आई बॉलीवुड फिल्म 'फिर हेरा फेरी' में राजू (अक्षय कुमार) का वो डायलॉग तो याद ही होगा — "पैसा ही पैसा होगा". इस डायलॉग ने बीते वर्षों में सोशल मीडिया पर जो गदर मचाई है... भई. आज के दौर में लगभग हर दूसरे फनी वीडियो में इसका मीम देखने को मिल जाएगा.

इस रिपोर्ट के साथ भी यह डायलॉग सटिक बैठता है...

डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) के कार्यकारी पारिश्रमिक सर्वे के अनुसार, भारतीय कंपनियों के सीईओ का औसत मुआवजा वित्त वर्ष 2022 में तीन साल के उच्चतम स्तर 11.2 करोड़ और औसत 7.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इस सर्वे में प्रमोटर सीईओ के साथ-साथ पेशेवर सीईओ दोनों के लिए मुआवजा शामिल है. सर्वे में मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, आईटी, आईटी सर्विसेज, साइफ साइंसेज और फाइनेंशियल सेक्टर की 470 से अधिक कंपनियों को शामिल किया गया है.

वित्त वर्ष 2021 में, सीईओ की एवरेज सैलरी 9.4 करोड़ रुपये और बीच की सैलरी 6.4 करोड़ रुपये थी. यह 2020 की तुलना में थोड़ा कम थी. 2020 में लोन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज के साथ एवरेज सैलरी 9.8 करोड़ रुपये और बीच की सैलरी 6.9 करोड़ रुपये थी.

वित्त वर्ष 2022 में, पेशेवर सीईओ ने औसतन 10 करोड़ रुपये कमाए. जबकि लोन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज के साथ औसत मुआवजा (median compensation) 7.4 करोड़ रुपये था. इसी तरह, वित्त वर्ष 2021 में, एवरेज सैलरी 9.1 करोड़ रुपये थी, जबकि बीच की सैलरी 6.2 करोड़ रुपये था. यह 2020 की तुलना में फिर से कम थी. 2020 एवरेज सैलरी 9.7 करोड़ रुपये और बीच की सैलरी 7.1 करोड़ रुपये थी.

सीईओ की सैलरी का लगभग 51% 'जोखिम में' या परिवर्तनशील है. शेयर की खराब कीमत और/या कंपनी के मौलिक प्रदर्शन के मामले में इस पहलू से प्राप्त आय गिरकर शून्य हो सकती है. सीईओ के लिए लगभग 25% सैलरी लोन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज के रूप में थी.

साथ ही, वित्त वर्ष 2022 में CXO (chief experience officer) का औसत मुआवजा 3.2 करोड़ रुपये था. इसमें कुल सैलरी का लगभग 40% जोखिम में था. सैलरी के 20% लोन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज थे. एवरेज सैलरी 2.4 करोड़ रुपये थी. यह पिछले दो वर्षों से इस स्तर पर स्थिर है. वित्त वर्ष 2021 में, CXO की एवरेज सैलरी 3 करोड़ रुपये थी. 2020 में, यह 3.5 करोड़ रुपये थी.

CEO से लेकर CXO तक, मुआवजा अनुपात अलग है. COO (chief operating officer) के लिए 2.4 करोड़ रुपये है. चीफ़ लीगल ऑफिसर के लिए 4.9 करोड़ रुपये है. सर्वे के मुताबिक, COO के अलावा, CFO (chief financial officer) और बिजनेस हेड सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले CXO हैं.

सीईओ के लिए, 84% शॉर्ट-टर्म इंसेंटिव्ज कंपनी की परफॉर्मेंश पर निर्भर हैं. CXO लेवल पर इससे जुड़ी संख्या लगभग 50% है. लगभग 80% कंपनियां शॉर्ट-टर्म इंसेंटिव्ज निर्धारित करने के लिए टारगेट-बेस्ड अप्रोच अपनाना पसंद करती हैं. जबकि 60% कंपनियां लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज का उपयोग करती हैं. ESOP (employee stock ownership plan) सबसे प्रचलित प्रकार का लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज इंस्ट्रूमेंट है.

सर्वे में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर भूमिकाओं में, कंपनी की साइज का उस सेक्टर की तुलना में सैलरी लेवल पर अधिक प्रभाव पड़ा जिसमें कंपनी काम करती है. सैलरी लेवल में वृद्धि एक स्ट्रोंग परफॉर्मेंस लिंकेज के साथ है. लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव्ज प्लान वाली कंपनियों के लिए, 91% की अवधि तीन या अधिक वर्षों की थी.

सर्वे के मुताबिक, एनलाइज की गई पांच कंपनियों में से दो में 2016 के बाद से कम से कम एक सीईओ बदला था. इस अवधि में तीन नए सीईओ में से एक को बाहरी रूप से हायर किया गया था. प्रत्येक तीन बाहरी सीईओ में से दो पिछली कंपनी में CXO लेवल की भूमिका में थे.

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