रूस के साथ भारत का तेल आयात 3.5 गुना बढ़ा, 69 फीसदी आयात रिलायंस और नायरा ने किया

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में रूस से भारत के कच्चे तेल का आयात 1.3 बिलियन डॉलर (1 खरब रुपये) था, जो रूस से भारत के कुल इनबाउंड शिपमेंट का 57 प्रतिशत है.
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यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रतिबंधों को सामना कर रहे रूस से कच्चा तेल खरीदने में बढ़ोतरी के बीच बीते एक साल की तुलना में इस साल अप्रैल में 3.5 गुना अधिक आय़ात हुआ है जिसकी कुल कीमत 2.3 अरब डॉलर (1.8 खरब रुपये) है.

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में रूस से भारत के कच्चे तेल का आयात 1.3 बिलियन डॉलर (1 खरब रुपये) था, जो रूस से भारत के कुल इनबाउंड शिपमेंट का 57 प्रतिशत है.

रूस से आयात होने वाले तेल का 69 फीसदी हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और नायरा इंडस्ट्रीज आयात कर रहे हैं.

अप्रैल महीने में आयात की गई अन्य सामग्रियों में कोयला, सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल, खाद और नॉन-इंडस्ट्रीयल हीरा शामिल हैं.

अप्रैल में इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात रूस भारत को कच्चे पेट्रोलियम का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था. वहीं, कुल आपूर्ति के मामले में रूस छठा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा. पिछले साल अप्रैल महीने में ही रूस भारत को तेल का 7वां सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था औक कुल आपूर्ति के मामले में यह 21वें पायदान पर था.

अप्रैल में रूस भारत का 9वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार (निर्यात और आयात दोनों) था, और व्यापार का आकार 2.42 बिलियन डॉलर (1.9 खरब रुपये) था.

बीते 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से रूस से भारत में कच्चे तेल का आयात बढ़ रहा है। इस हमले के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे देश को वैश्विक व्यापार से अलग करने का प्रयास किया गया और इसके परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है.

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