KVIC ने असम में 70 महिला अगरबत्ती कारीगरों के लिए तैयार किया ये अनोखा बिजनेस मॉडल

By रविकांत पारीक
December 03, 2021, Updated on : Fri Dec 03 2021 11:47:09 GMT+0000
KVIC ने असम में 70 महिला अगरबत्ती कारीगरों के लिए तैयार किया ये अनोखा बिजनेस मॉडल
KVIC ने असम में कामरूप जिले के बिरकुची में अपनी अगरबत्ती निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रमुख प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 70 आदिवासी महिलाओं को शामिल किया है।
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खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission - KVIC) ने असम में महिला अगरबत्ती कारीगरों को सशक्त बनाने तथा स्थानीय अगरबत्ती उद्योग को मजबूत करने के लिए एक अनूठा बिजनेस मॉडल तैयार किया है, जिसकी राज्य में रोजगार सृजित करने में प्रमुख भूमिका है।


KVIC ने असम में कामरूप जिले के बिरकुची में अपनी अगरबत्ती निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रमुख प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 70 आदिवासी महिलाओं को शामिल किया है। KVIC ने एक व्यवसायिक सहयोगी भी बनाया है, जो असम का सफल स्थानीय अगरबत्ती निर्माता है। यह सहयोगी कच्चा माल उपलब्ध कराएगा और श्रम शुल्क का भुगतान करके इन 70 महिला उद्यमियों द्वारा बनाई गई अगरबत्ती को वापस लेकर उनकी बिक्री करेगा। ये महिलाएं 7 स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हुई हैं।

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KVIC ने बृहस्पतिवार को असम के रूपनगर में एक बहु अनुशासनिक प्रशिक्षण केंद्र (MDTC) का भी उद्घाटन किया, जो युवा उद्यमियों को मधुमक्खी पालन, मिट्टी के बर्तन बनाने और चमड़ा उद्योग आदि जैसे विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण प्रदान करेगा।


अगरबत्ती का यह बिजनेस मॉडल कई मायनों में बेहद अनूठा है क्योंकि ये महिला उद्यमी अपना तैयार उत्पाद बेचने या उसे बाजार में पहुंचाने के झंझट से मुक्त होंगी। वहीं दूसरी ओर, इस मॉडल के तहत व्यवसायिक भागीदार द्वारा नई मशीनों की खरीद पर कोई पूंजीगत लागत खर्च किए बिना ही अगरबत्ती के उत्पादन में वृद्धि होगी। KVIC ने “महाबाहु एग्रो प्रोडक्ट्स” को एक प्रमुख अगरबत्ती निर्माण इकाई से जोड़ा है, जिसे पहले KVIC द्वारा पीएमईजीपी कार्यक्रम के तहत व्यावसायिक भागीदार के रूप में स्थापित किया गया था।


यह सहयोगी उच्च गुणवत्ता वाली अगरबत्ती के निर्माण के लिए इन महिला उद्यमियों को सभी प्रकार की तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा। उपलब्ध कराई गई 70 मशीनों से प्रतिदिन लगभग 5600 किलोग्राम अगरबत्ती का भारी मात्रा में उत्पादन होगा, जिसे व्यापारिक भागीदार द्वारा खरीदा जाएगा।


KVIC ने अपनी प्रमुख PMEGP योजना के तहत अगरबत्ती निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए इन महिलाओं को गुवाहाटी के असम ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से 7 इकाइयों में से प्रत्येक के लिए 5 लाख रुपये की कुल 35 लाख रुपये वित्तीय सहायता की सुविधा प्रदान की है।


KVIC के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने बृहस्पतिवार को गुवाहाटी में इन महिला उद्यमियों को स्वीकृति पत्र सौंपे। KVIC ने इन इकाइयों को सहयोग प्रदान करने के लिए 35 फीसदी यानी 12.25 लाख रुपये की सब्सिडी दी है। इस बैंक ऋण से उद्यमियों को स्वचालित अगरबत्ती बनाने की मशीन, मिक्सर मशीन और ड्रायर मशीन प्रदान की गई है। इन महिलाओं को जल्द ही मशीनें मिल जाएंगी।


KVIC के अध्यक्ष ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों को संगठित करना और स्थानीय अगरबत्ती उद्योग का सहयोग करना है, जिसे पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार से काफी बढ़ावा मिला है। बहुत कम निवेश में महिला उद्यमियों के लिए स्थायी रोजगार का सृजन करते हुए अगरबत्ती उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की यह एक अनूठी पहल है।


सक्सेना ने कहा कि KVIC देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे ही व्यवसायिक मॉडल तलाशेगा जो छोटे उद्यमियों को सशक्त ही नहीं करेगा बल्कि घरेलू अगरबत्ती उत्पादन में भी काफी वृद्धि करेगा।


इस मॉडल को दो प्रमुख निर्णयों के मद्देनजर तैयार किया गया है - कच्ची अगरबत्ती पर आयात प्रतिबंध और बांस की छड़ियों पर आयात शुल्क में वृद्धि। स्थानीय अगरबत्ती उद्योग का समर्थन करने के लिए इन निर्णयों को क्रमशः वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा लिया गया है। देश में अगरबत्ती की वर्तमान खपत लगभग 1790 मीट्रिक टन प्रति दिन है। हालांकि, भारत में अगरबत्ती का एक दिन का उत्पादन सिर्फ 760 मीट्रिक टन है। मांग और आपूर्ति के बीच बहुत बड़ा अंतर है और इसलिए इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं।