जानें, गणतन्त्र दिवस से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स जो बेहद कम लोगों को पता हैं!

By प्रियांशु द्विवेदी
January 26, 2020, Updated on : Sun Jan 26 2020 03:31:30 GMT+0000
जानें, गणतन्त्र दिवस से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स जो बेहद कम लोगों को पता हैं!
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71वां गणतन्त्र दिवस न सिर्फ हमें एक बार फिर अपने अधिकारों की याद दिला रहा है, बल्कि हमें यह भी बता रहा है कि इस दिन के लिए हमारे पुरखों ने अपना खून-पसीना एक किया है।

देश गर्व के साथ वां गणतन्त्र दिवस मना रहा है।

देश गर्व के साथ वां गणतन्त्र दिवस मना रहा है।



हम बड़े गर्व के साथ अपना 71वां गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। गणतन्त्र दिवस न सिर्फ हमें यह याद दिलाता है कि कि हमने अपने संविधान और अधिकारों के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी है, बल्कि उस मौके पर हम देश भर में फैली विविधता को एक साथ देख पाते हैं और ऐसा संभव हो पाता है गणतन्त्र दिवस के मौके पर राजपथ पर होने वाली भव्य परेड से।


पहले गणतन्त्र दिवस के मौके पर देश में एक साथ कई बदलाव हुए। इन बदलावों में लोगों के अधिकार और देश की तरक्की के रास्ते शामिल थे। नीचे हम आपको गणतन्त्र दिवस से जुड़े कुछ खास फैक्ट्स बता रहे हैं, जिन्हे जानकर आपको भी आश्चर्य होगा-


1. पहली बार पूर्ण स्वराज्य दिवस 26 जनवरी 1930 को मनाया गया था। यही वो दिन था जब देश ने अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के लिए संघर्ष का आह्वान किया था। पूर्ण स्वराज्य दिवस तब से 1947 तक 26 जनवरी को ही मनाया जाता रहा। इस दिन का ही महत्व था कि संविधान को अपनाने के लिए 26 जनवरी की तारीख चुनी गई।


पहला गणतन्त्र दिवस के मौके पर स्वतन्त्रता मिलने के तीन साल बाद मनाया गया।

पहला गणतन्त्र दिवस के मौके पर स्वतन्त्रता मिलने के तीन साल बाद मनाया गया।



2.  देश के संविधान को तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। संविधान को लिखने का काम डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व वाली ड्राफ्टिंग कमेटी को मिला था। संविधान की दो प्रतियाँ मुख्यता हिन्दी और अँग्रेजी भाषाओं में तैयार की गईं थीं।


3. 26 जनवरी 1950 को भारत सरकार अधिनियम, 1935 को हटाकर देश में भारत के संविधान को लागू किया गया। भारत में तीन राष्ट्रिय अवकाश घोषित हैं और 26 जनवरी यानी गणतन्त्र दिवस उनमे से एक है, अन्य स्वतन्त्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।


4. 26 जनवरी 1950 के दिन भारतीय वायु सेना भी अस्तित्व में आई, इसके पहले देश की वायु सेना रॉयल एयर फोर्स का हिस्सा थी। इसी के साथ सारनाथ संग्रहालय में स्थित अशोक लाट को भी इसी दिन भारत के राष्ट्रिय प्रतीक के रूप में भी अपनाया गया था।


5.  संविधान को लागू करने से पहले इसकी हस्तलिखित प्रतियों पर संसद के 308 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि संविधान की मूल प्रति को संसद की लाइब्रेरी में रखे हीलियम गैस से भरे एक कास्केट में रखा गया है।


संसद की लाइब्रेरी में रखीं संविधान की प्रतियाँ

संसद की लाइब्रेरी में रखीं संविधान की प्रतियाँ



6.  गणतन्त्र दिवस के मौके पर राजधानी में होने वाला समारोह उसी दिन खत्म नहीं होता है,  बल्कि यह समारोह 3 दिनों तक चलता है। इसका समापन 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ होता है।


7. गणतन्त्र दिवस के मौके पर किसी दूसरे देश के नेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। साल 1950 पर पहली बार गणतन्त्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। साल 1952, 1953 और 1966 में किसी भी दूसरे देश के नेता को मुख्य अतिथि के रूप में नहीं बुलाया गया था, गौरतलब है कि साल 1965 के गणतन्त्र दिवस के मौके पर पाकिस्तान के तत्कालीन खाद्य और कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। इस बार ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियस बोलसोनारो को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।


8.  गणतन्त्र दिवस का आयोजन पहले राजपथ पर नहीं होता था, बल्कि यह आयोजन इरविन स्टेडियम (अब राष्ट्रिय स्टेडियम) में होता था। राजपथ में गणतन्त्र दिवस का आयोजन साल 1955 से शुरू हुआ। जब पहली बार राजपथ पर परेड का आयोजन किया गया तो मुख्य अतिथि के रूप में पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित किया गया था।


पंडित नेहरू के साथ मलिक गुलाम मोहम्मद

पंडित नेहरू के साथ मलिक गुलाम मोहम्मद (चित्र:Dawn)



9. गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या को राष्ट्रपति देश को संबोधित करते हैं, इसी के साथ पद्म अवार्ड की भी घोषणा की जाती है। इस बार 7 हस्तियों को पद्म विभूषण, 16 लोगों को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री से नवाजा जाएगा। गौरतलब है कि देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाजा जाएगा।


10. गौरतलब है कि एक क्रिश्चियन गाना ‘Abide With Me’ भी गणतन्त्र दिवस के मौके पर बजाया जाता है। माना जाता है कि यह गाना महात्मा गांधी को काफी पसंद था।