रीसाइकल्ड प्लास्टिक से बनी वर्दी में दिखेंगे अब इंडियन ऑयल के लाखों कर्मचारी

By Prerna Bhardwaj
November 14, 2022, Updated on : Mon Nov 14 2022 09:20:47 GMT+0000
रीसाइकल्ड प्लास्टिक से बनी वर्दी में दिखेंगे अब इंडियन ऑयल के लाखों कर्मचारी
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प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए सबसे बड़े ख़तरों में से एक है. एक बार यूज होने वाले प्लास्टिक को डी-कम्पोज होने में 500 से अधिक साल लग जाते हैं. इतने लम्बे समय तक यह हमारे आस-पास गली-मोहल्लों में, नदियों-तालाबों में, समुद्र में पड़ा रहता है. इसके खतरे अनेक हैं जिसमे एक खतरा हमारे स्वास्थ्य का भी है. संयुक्त राष्ट्र संघ की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2060 तक विश्व की प्लास्टिक की खपत आज से तीन गुणा बढ़ जायेगी. वहीँ फॉसिल फ्युएल बेस्ड प्लास्टिक प्रोडक्शन 2060 तक इतनी बढ़ जाएगी कि इससे उत्पन्न हुआ प्लास्टिक वेस्ट हर साला 100 करोड़ टन से ज्यादा होगा. यह आँकड़े और इससे झांकने वाली सचाई डराने वाली है. खतरा इतना बड़ा है जनता की प्लास्टिक पर बेहद निर्भरता के बावजूद भारत जैसे बड़े देश ने इस पर कंप्लीट बैन लगा दिया है. भारत में इस दिशा में नए स्टार्ट अप, बड़ी कम्पनियाँ ए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्लास्टिक के खतरे को कम करने वाली ऐसी ही एक पहल इंडियन ऑयल (Indian Oil Corporation) ने की है.


इंडियन ऑयल ने की शुरूआत

कंपनी ने प्लास्टिक के बेकार बोतलों के कचड़े से पॉलिएस्टर की बनाई और डिज़ाइन की गई एक विशेष "टिकाऊ और हरी" वर्दी बनाने का फैसला लिया है. इसे पहनेंगे कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil Corporation) के पेट्रोल पंप पर काम करने वाले लाखों कर्मचारी. यह वर्दी इंडेन एलपीजी (Indane LPG) गैस डिलीवरी के कर्मचारी भी पहनेंगे.

कैसे बनाए जाते हैं प्लास्टिक से कपडे?

इन यूनिफॉर्म के लिए ड्रेस मटेरियल को फेंके गए पीईटी बोतलों से बनाए जाते हैं. पहले चरण में, यूज्ड प्लास्टिक की बोतलों को टुकड़ों में काट दिया जाता है. फिर उसे पिघला कर माइक्रो पेलेट्स बना दिया जाता है. इन माइक्रो पेलेट्स से ही कपड़ों की बुनाई के लिए यार्न बनते हैं. पॉलिएस्टर धागे से ये कपड़े बुने जाते हैं. इस यार्न से बने कपड़े गुणवत्ता में वर्जिन पॉलिएस्टर से मेल खाते हैं, लेकिन इसके निर्माण में काफी कम संसाधन लगते हैं.

प्लास्टिक के करोड़ों बेकार बोतलों से मिलेगी निजात

इस हरीत पहल की घोषणा करते हुए आईओसी (IOC) के अध्यक्ष एस एम वैद्य ने कहा कि इस पहल से लगभग 405 टन पीईटी बोतलों (PET Bottle) की रिसाइकिलिंग हो सकेगी. यह सालाना 20 मिलियन से अधिक बोतलों की भरपाई के बराबर है. साथ ही साथ, इनके उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और वर्जिन पॉलिएस्टर की तुलना में CO2 उत्सर्जन लगभग एक तिहाई कम हो जाता है. यहां तक कि जब ये कपड़े खराब हो जाते हैं, तो इस्तेमाल की गई पॉलीकॉटन वर्दी को यांत्रिक रूप से पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है.

भूमि पेंडेकर का भी समर्थन

इंडियन ऑयल के इस अभियान को बॉलीवुड अभिनेत्री एवं पर्यावरण कार्यकर्ता भूमि पेंडेकर (Bhumi Pendekar) जुड़ी हैं. उन्होंने इस विशेष यूनिफार्म के लॉन्च कार्यक्रम में शिरकत भी की. इस अवसर पर उन्होंने कहा "हममें से प्रत्येक जीवन के तरीके के रूप में स्थिरता को अपनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. देश के नागरिक के रूप में, मुझे गर्व है कि देश की अग्रणी ऊर्जा कंपनी इस तरह के अद्वितीय पर्यावरण प्रयास का कार्य कर रही है. इंडियन ऑयल को मेरा धन्यवाद और बधाई."