मार्च 2022 में प्री-कोविड लेवल पर पहुंची नॉन-मेट्रो शहरों से MSME क्रेडिट डिमांड

स्टडी में मार्च 2020 से मार्च 2022 तक की अवधि के लिए 25 शहरों से 40,000 से अधिक MSME का आकलन किया गया.

मार्च 2022 में प्री-कोविड लेवल पर पहुंची नॉन-मेट्रो शहरों से MSME क्रेडिट डिमांड

Wednesday June 15, 2022,

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मार्च 2022 में नॉन-मेट्रो शहरों से MSME क्रेडिट डिमांड प्री-कोविड लेवल्स पर वापस पहुंच गई. वहीं मेट्रो शहरों में अभी यह प्री-कोविड लेवल पर पहुंचने से थोड़ा दूर है. यह बात डिजिटल MSME लेंडर NeoGrowth Credit की एक स्टडी से सामने आई है. सेगमेंट के संदर्भ में, नॉन डिसक्रेशनरी मांग-ओरिएंटेड व्यवसाय जैसे पेट्रोल पंप, इंफ्रास्ट्रक्चर, और ऑटो ने कस्टमर फेसिंग और और डिसक्रेशनरी मांग-ओरिएंटेड व्यवसायों की तुलना में तेज रिकवरी दर्ज की. स्टडी में मार्च 2020 से मार्च 2022 तक की अवधि के लिए 25 शहरों से 40,000 से अधिक एमएसएमई का आकलन किया गया.

स्टडी 'Rising In The Face Of Adversity' कोविड के बाद की अवधि के दौरान एमएसएमई के पुनरुद्धार पर भी रोशनी डालती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी लहर में, एमएसएमई अच्छी तरह से तैयार थे और नए कारोबारी माहौल में समायोजित हो सकते थे क्योंकि पिछले साल, 2020 में पहली लहर की तुलना में केवल 30 प्रतिशत एमएसएमई को ही समर्थन की आवश्यकता थी.

NeoGrowth के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अरुण नैय्यर का कहना है, 'कई MSMEs 2020-21 में उपभोक्ताओं की ओर से मांग खत्म हो जाने से लोन रिपेमेंट्स के बोझ के कारण संघर्ष कर रहे थे… भारत में MSME इकोसिस्टम एक 'सरवाइवल टू रिवाइवल' गाथा है. महामारी से सीखे गए महत्वपूर्ण सबक ने व्यवसायों के संचालन के तरीके को बदल दिया है और डिजिटल में उनके कदम को तेजी से ट्रैक किया है. MSMEs से ऋण की मांग स्वस्थ स्तर पर वापस आ गई है.'

महामारी में केवल 46% MSME को पड़ी वित्तीय मदद की जरूरत

स्टडी के अनुसार, हालांकि सभी क्षेत्रों में एमएसएमई महामारी के कारण प्रभावित हो रहे थे, लेकिन भारत भर में केवल 46 प्रतिशत एमएसएमई ऐसे थे जिन्हें महामारी के असर को कम करने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी. उन्हें महानगरों की तुलना में गैर-महानगरों से अधिक मांग मिल रही थी. इसके अलावा, नॉन डिसक्रेशनरी एमएसएमई द्वारा प्राप्त वित्तीय सहायता अन्य व्यवसायों की तुलना में कम थी.

NeoGrowth ने MSMEs को रिकवरी में की मदद

2020 में MSMEs, लॉकडाउन के दौरान आवाजाही पर प्रतिबंध, कम उपभोक्ता मांग के कारण नकदी प्रवाह का प्रबंधन करने में असमर्थता और व्यवसाय की बहाली के बाद अनिश्चितता के कारण प्रभावित हुए थे. MSMEs को उनकी रिकवरी में सहायता करने के लिए, NeoGrowth ने प्रभाव की गंभीरता के बावजूद सभी प्रकार के ग्राहकों के लिए अनुकूलित समाधानों के माध्यम से वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए अपनी 'संजीवनी' पहल शुरू की थी. कंपनी का कहना है कि उसने अपने कस्टमर बेस में मार्च 2020 से मार्च 2022 तक 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. इस दौरान इसका कस्टमर बेस 16,087 से बढ़कर 20,868 हो गया.

इस साल की शुरुआत में कोविड की ओमिक्रॉन लहर के बाद से पूरे भारत में क्रेडिट डिमांड रिवाइवल में बहुत प्रगति नहीं हुई है. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र ने रिकवरी का मार्ग प्रशस्त किया, क्रेडिट डिमांड 2020 के शुरुआती स्तर के 114% पर रही. इसके बाद एफएमसीजी और रिटेल रहे, जो 103% की तेजी के साथ आगे बढ़े. सर्वेक्षण में पाया गया कि अन्य क्षेत्रों में ऋण मांग में सुधार होना बाकी है.