इन पोषक तत्‍वों का सेवन करने से मिलेगी बेहतर इम्‍युन हेल्‍थ

By yourstory हिन्दी
January 05, 2023, Updated on : Thu Jan 05 2023 04:42:53 GMT+0000
इन पोषक तत्‍वों का सेवन करने से मिलेगी बेहतर इम्‍युन हेल्‍थ
बेहतर रोग प्रतिरोधक स्‍वास्‍थ्‍य पाने में आपकी सहायता करने के लिये एबॅट के न्‍यूट्रीशन बिजनेस में मेडिकल एंड साइंटिफिक अफेयर्स के हेड डॉ. इरफान शेख उन महत्‍वपूर्ण पोषक-तत्‍वों और उनके स्रोतों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको मजबूत बनाये रख सकते हैं.
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बेहतर रोग प्रतिरोधक स्‍वास्‍थ्‍य (इम्‍युन हेल्‍थ) पाने के मजबूत संकल्‍प के साथ नये साल की शुरूआत कीजिये. स्‍वस्‍थ रोग प्रतिरोधक तंत्र को सहयोग देने के लिये अच्‍छा पोषण महत्‍वपूर्ण है. पोषण के खराब स्‍तर और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता के बीच गहरा सम्‍बंध होता है.


बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिये जरूरी पोषक-तत्‍व लेना महत्‍वपूर्ण है. डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिये अच्‍छा पोषण ग्‍लूकोज पर नियंत्रण की पहली सीढ़ी भी है. पोषक-तत्‍वों का सेवन बढ़ाने से बीमारी को काबू में रखने में कैसे मदद मिलती है, इस पर नजर रखने के लिये आप ग्‍लूकोज की लगातार निगरानी करने वाले उपकरणों से अपनी प्रगति देख सकते हैं. सुलभ और यूजर के लिये अनुकूल डिजाइन वाले यह सुविधाजनक, पहनने योग्‍य उपकरण ब्‍लड शुगर लेवल्‍स पर नजर रखने में डायबिटीज के मरीजों की मदद करते हैं और समझने देते हैं कि उनका शरीर खास खाद्य पदार्थों और पोषक-तत्‍वों, व्‍यायामों, आदि पर कैसे प्रतिक्रिया देता है. आपके हाथ के पीछे की ओर लगने वाले एक छोटे-से सेंसर से यह उपकरण ग्‍लूकोज की रीडिंग और ट्रेंड्ज पर काम करने योग्‍य जानकारी देते हैं और वास्‍तविक समय में ग्‍लूकोज के उतार-चढ़ावों पर आपको सचेत करते हैं, ताकि आप सुधार के लिये आसानी से कदम उठा सकें. 

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सांकेतिक चित्र (freepik)

अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने से आपको बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य का फायदा मिल सकता है. यह बुजुर्गों और श्‍वसन मार्ग और लिवर के रोग, गठिया, डायबिटीज, आदि जैसी लंबे समय की बीमारियों वाले लोगों के लिये सच है. ऐसे लोगों को मसल्‍स (माँसपेशियाँ) कम होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिये.


बेहतर रोग प्रतिरोधक स्‍वास्‍थ्‍य पाने में आपकी सहायता करने के लिये एबॅट के न्‍यूट्रीशन बिजनेस में मेडिकल एंड साइंटिफिक अफेयर्स के हेड डॉ. इरफान शेख उन महत्‍वपूर्ण पोषक-तत्‍वों और उनके स्रोतों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको मजबूत बनाये रख सकते हैं:


1. एचएमबी (बीटा-हाइड्रोक्‍सी-बीटा-मिथाइलबुटीरेट) मसल के टूटने या कम होने को धीमा कर आपके मसल्‍स को संतुलित रखने में सहायक का काम करता है. यह शरीर में ल्‍युसिन के टूटने से प्राकृतिक रूप से बनता है, जोकि एक इसेंशियल अमीनो एसिड है, लेकिन उसकी छोटी मात्रा ही शरीर में एचएमबी का रूप लेती है. वैज्ञानिक आधार पर एचएमबी लंबे समय से आपके आहार का हिस्‍सा रहा है, जिसका आपको पता नहीं था. यह एवोकैडो, मौसंबी और फूलगोभी में छोटी मात्रा में उपलब्‍ध होता है. एचएमबी वाले विशेषीकृत और खाये जा सकने योग्‍य पूरक (सप्‍लीमेंट्स) यह सुनिश्चित करने में अच्‍छा सहयोग देते हैं कि वह आपको मांसपेशियों के स्‍वास्‍थ्‍य में सहायता के लिये जरूरी मात्रा में मिले.


2. प्रोटीन शरीर की हर कोशिका को बनाने में ईंट का काम करता है, जैसे कि मांसपेशियाँ, हड्डियाँ, हॉमोन्‍स, एंटीबॉडीज, आदि. यह एंटीबॉडीज और रोग प्रतिरोधक तंत्र की कोशिकाएं बनाने के लिये चाहिये होता है. इसके अलावा, प्रोटीन्‍स को बनाने वाले कुछ अमीनो एसिड्स रोग प्रतिरोधक तंत्र की कोशिकाओं के लिये महत्‍वपूर्ण ईंधन होते हैं. अंडे प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं, जबकि काबुली चने, पनीर, क्विनोआ, ग्रीक दही, मूंगफली और बादाम भी प्रोटीन का सेवन बढ़ाने में मदद करते हैं. डेयरी और उसके उत्‍पादों को भी नहीं भूलना चाहिये.


3. विटामिन ‘ए’ रोग प्रतिरोधक तंत्र को नियमित करने में सहायक होता है. “संक्रमण-रोधी विटामिन’’ के नाम से ज्ञात यह पोषक-तत्‍व आपकी त्‍वचा, मुंह, पेट और फेफड़ों को स्‍वस्‍थ रखता है, ताकि वे संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ सकें. यह अच्‍छी दृष्टि के लिये भी महत्‍वपूर्ण है. बेहतर अवशोषण के लिये इसे थोड़े फैट के साथ लें. शकरकंद, कद्दू, गाजर और पालक में खूब विटामिन ‘ए’ होता है.


4. विटामिन ‘सी’ स्‍वस्‍थ त्‍वचा और संयोजक ऊतक बनाने में शरीर की सहायता करता है, जिससे बाहरी जीवाणुओं का प्रवेश रोकने में मदद मिलती है. विटामिन ‘सी’ एंटीऑक्‍सीडेंट के रूप में भी काम करता है और कोशिकाओं को क्षति से बचाता है. यह प्‍लांट फूड से ज्‍यादा आयरन ग्रहण करने में हमारी सहायता कर एनीमिया से भी बचाने में मदद करता है. संतरे विटामिन ‘सी’ के सबसे बढ़िया स्रोत के रूप में जाने जाते हैं. संतरों के अलावा कुछ और चीजें भी विटामिन ‘सी’ से भरपूर होती हैं, जैसे कि कीवी, स्‍ट्रॉबेरीज, ब्रॉकोली, टमाटर, फूलगोभी और लाल मिर्च.


5. विटामिन ‘ई’ एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करता है और कोशिका की झिल्लियों को मुक्‍त मूलकों (फ्री रेडिकल्‍स) के कारण होने वाली क्षति से बचाता है. कोशिका की स्‍वस्‍थ झिल्लियाँ बाहरी जीवाणुओं को बाहर रखने में मदद करती हैं और रोग प्रतिरोधक तंत्र की स्‍वस्‍थ प्रतिक्रिया को सहयोग देती हैं. विटामिन ‘ई’ आमतौर पर कई खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला पोषक-तत्‍व है. खाद्य तेल, बीज और नट्स इसके बेजोड़ तरीके से समृद्ध स्रोत हैं.


6. विटामिन ‘डी’ रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद देता है और उनके काम को अच्‍छी तरह से नियमित करता है. कई काम करने वाला यह पोषक-तत्‍व कैल्शियम को ग्रहण करने में हमारे शरीर की सहायता करता है और मजबूत रोग प्रतिरोधक तंत्र को बढ़ावा देता है. कुछ खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से विटामिन ‘डी3’ से प्रचुर होते हैं. इसके स्रोतों में से कुछ हैं फैटी फिश का मांस और फिश लिवर ऑयल्‍स, अंडे का पीला भाग, संतरे का रस और चीज़.


7. ज़िंक घाव भरने और कोशिकाओं के प्रजनन के लिये जरूरी होता है. इससे रोग प्रतिरोधक तंत्र की नई कोशिकाओं का संश्‍लेषण होता है. ज़िंक सही वृद्धि और विकास के लिये भी महत्‍वपूर्ण होता है, खासकर बचपन, किशोरवय और गर्भावस्‍था में. मीट ज़िंक का बेहतरीन स्रोत है, खासकर रेड मीट. शाकाहारी लोगों के लिये काबुली चने, मसूर और फलियों में ज़िंक की अच्‍छी मात्रा होती है. बीज भी आपके आहार में सेहत को बढ़ाते हैं और ज़िंक के सेवन को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.


8. तरल और इलेक्‍ट्रोलाइट्स: पर्याप्‍त तरल (पानी) और इलेक्‍ट्रोलाइट्स, जैसे कि सोडियम, पोटेशियम और क्‍लोराइड लेने से शरीर के तापमान को नियमित करने में मदद मिलती है. यह जोड़ों को चिकनाई देते हैं, कोशिकाओं और ऊतकों को स्‍वस्‍थ रखते हैं, अपशिष्‍टों को बाहर करते हैं और बेहतर हाइड्रेशन के लिये फ्‍लुइड को पकड़कर रखने में शरीर की सहायता करते हैं. कई खाद्य पदार्थों और पेयों में इलेक्‍ट्रोलाइट्स होते हैं, जैसे कि पालक, कले जैसी हरी पत्‍तेदार सब्जियाँ, और केले, बेर तथा सूखी खुबानी जैसे फल. इनके अलावा फलियों, मसूर, नट्स और सैण्‍ड सीड्स में भी इलेक्‍ट्रोलाइट्स अच्‍छी मात्रा में होते हैं.


कमजोर रोग प्रतिरोधक स्‍वास्‍थ्‍य का ज्‍यादा जोखिम उन लोगों को है, जिनके आहार में पर्याप्‍त खाद्य नहीं होते हैं, जिन्‍हें महत्‍वपूर्ण पोषक-तत्‍वों वाले खाद्य पदार्थ नहीं मिलते हैं, जो कुपोषित हैं, या जिन्‍हें ऐसी बीमारियाँ हैं, जिनमें पोषण से अतिरिक्‍त सहयोग की जरूरत हो. स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतर आदतों के साथ आप एक संतोषी जीवन जी सकते हैं.


Edited by रविकांत पारीक