पद्म विभूषण के बाद मेरीकाम का सपना ‘भारत रत्न’, अब तक सिर्फ इस खिलाड़ी के पास हैं भारत रत्न

By भाषा पीटीआई
January 27, 2020, Updated on : Mon Jan 27 2020 06:01:31 GMT+0000
पद्म विभूषण के बाद मेरीकाम का सपना ‘भारत रत्न’, अब तक सिर्फ इस खिलाड़ी के पास हैं भारत रत्न
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पद्म विभूषण के लिये चुनी गयी पहली महिला खिलाड़ी एमसी मेरीकाम ने रविवार को कहा कि वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर ‘भारत रत्न’ बनना चाहती हैं।


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फाइल फोटो



नई दिल्ली, पद्म विभूषण के लिये चुनी गयी पहली महिला खिलाड़ी एमसी मेरीकाम ने रविवार को कहा कि वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर ‘भारत रत्न’ बनना चाहती हैं।


छह बार की विश्व चैम्पियन मुक्केबाज मेरीकाम ने यहां पत्रकारों से कहा,

‘‘भारत रत्न हासिल करना सपना है। इस पुरस्कार (पद्म विभूषण) से मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी ताकि मैं भारत रत्न बन सकूं।’’


उन्होंने कहा,

‘‘सचिन तेंदुलकर ही एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया है और मैं भी इसे हासिल करना चाहती हूं और ऐसा करने वाली पहली महिला बनना चाहती हूं। मैं तेंदुलकर की राह पर चलना चाहती हूं और मुझे उनसे प्रेरणा मिलती है।’’


छत्तीस साल की मेरीकाम ने हालांकि कहा कि उनका लक्ष्य पहले ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना है और फिर वह ‘पदक के रंग’ के बारे में सोचेंगी।


उन्होंने कहा,

‘‘मेरा अभी लक्ष्य ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना है और फिर मैं पदक के रंग के बारे में सोचूंगी। अगर मैं क्वालीफाई कर लेती हूं और तोक्यो में स्वर्ण पदक जीत लेती हूं तो मैं भारत रत्न हासिल करने की उम्मीद कर सकती हूं। भारत रत्न से नवाजा जाना सिर्फ एक खिलाड़ी के लिये ही नहीं बल्कि किसी भी भारतीय की उपलब्धियों का शीर्ष सम्मान है।’’


भारत रत्न देश का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान है।


मणिपुर की इस मुक्केबाज को 2013 में पद्म भूषण और 2006 में पद्म श्री से नवाजा गया था। वह पद्म विभूषण से सम्मानित किये जाने वाली पहली महिला और चौथी खिलाड़ी हैं। महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद, पर्वतारोही एडमंडल हिलेरी और महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सभी को 2008 में यह पुरस्कार दिया गया था।


तेंदुलकर को 2014 में भारत रत्न से नवाजा गया था।


यह पूछने पर कि भारत की महान महिला खिलाड़ी होने से वह कैसा महसूस करती हैं तो उन्होंने कहा,

‘‘मुझे लगता है कि मैंने देश को कई दफा गौरवान्वित किया है और सिर्फ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना ही बचा है। ’’


उन्होंने कहा,

‘‘मैं देश के लिये चमकना चाहती हूं। टोक्यो मेरा अंतिम ओलंपिक होगा। मैं नहीं जानती कि वे (भारतीय मुक्केबाजी महासंघ) मुझे अगले ओलंपिक (2024) में 40 साल की उम्र में मुझे भाग लेने की अनुमति देंगे या नहीं इसलिये यह सचमुच मेरे लिये अहम है। मैं ओलंपिक में अपने देश के लिये स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं।’’


मेरीकाम ने कहा,

‘‘मैं इस पुरस्कार को देश के लोगों को समर्पित करना चाहती हूं और पद्म पुरस्कार हासिल करने वाली अन्य विजेताओं जैसे पीवी सिंधू और रानी रामपाल को मेरी यही सलाह होगी कि उन्हें इससे प्रेरित होना चाहिए और इससे बड़ा सम्मान हासिल करने का सपना देखना चाहिए।’’



चीन में कोरोना वायरस के कारण ओलंपिक मुक्केबाजी क्वालीफाइंग टूर्नामेंट को वुहान के बजाय जोर्डन के अम्मान में तीन से 11 मार्च तक आयोजित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि देश के मुक्केबाजों को अब ट्रेनिंग कार्यक्रम में कुछ मामूली बदलाव करना होगा।


बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह ने मेरीकाम को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा,

‘‘मेरीकाम को पद्म विभूषण से नवाजे जाने के लिये बधाई देना चाहूंगा। वह देश के युवा लड़कों और लड़कियों के लिये ही प्रेरणास्रोत नहीं हैं बल्कि हम सभी के लिये भी हैं। मुक्केबाजी में उनका योगदान अद्वितीय है।’’

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