IT सर्विसेज की आउटसोर्सिंग पर बैंकों और NBFCs के लिए बदलेंगे नियम: RBI

IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर RBI के ड्राफ्ट के अनुसार रेग्यूलेटरी संस्थाओं को आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं की आउटसोर्सिंग के लिए केंद्रीय बैंक से पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.
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भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) ने हाल ही में बैंकों और दूसरी रेग्यूलेटरी संस्थाओं द्वारा इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सर्विसेज की आउटसोर्सिंग को लेकर नए नियमों का प्रस्ताव रखा हैं. इन नियमों का मकसद वित्तीय, परिचालन और साख संबंधी जोखिमों का प्रबंधन करना है. IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर RBI के ड्राफ्ट के अनुसार रेग्यूलेटरी संस्थाओं को आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं की आउटसोर्सिंग के लिए केंद्रीय बैंक से पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि नियमित संस्थाएं अपने बिजनेस मॉडल को सपोर्ट करने के लिए व्यापक स्तर पर आईटी और आईटी-इनेबल्ड सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं. वहीं अपने काम के एक बड़े हिस्से को लेकर वो तीसरी पार्टी पर निर्भर करती हैं, ऐसे में वो जोखिमों का शिकार होने की आशंका में रहती हैं.

ड्राफ्ट में कहा गया है, "इन निर्देशों का अंतर्निहित सिद्धांत यह है कि रेग्यूलेटरी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था ग्राहकों के लिए उसके दायित्वों को पूरा करने की क्षमता को कम न करे और न ही पर्यवेक्षण प्राधिकरण द्वारा प्रभावी निरीक्षण को बाधित करे."

RBI ने इस ड्राफ्ट पर स्टैकहोल्डर्स से 22 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं.

बैंकों, भुगतान बैंकों, सहकारी बैंकों, ऋण सूचना कंपनियों, NBFCs और दूसरी रेग्यूलेटरी संस्थाओं को एक व्यापक रूप से अप्रूव्ड आईटी आउटसोर्सिंग पॉलिसी को लागू करना होता है.

इससे पहले RBI ने इस हफ्ते क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों को ग्राहकों की सहमति के बगैर कार्ड सक्रिय करने जैसे कुछ मानदंडों का पालन करने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ाई थी.

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