ग्रामीण महाराष्ट्र में रायगढ़ को COVID-19 से लड़ने में मदद कर रहा है रोनी और जरीना स्क्रूवाला का स्वदेश फाउंडेशन

अपग्रेड (UpGrad) के रोनी स्क्रूवाला और उनका स्वदेस फाउंडेशन महाराष्ट्र के रायगढ़ को भारत में COVID-19 की दूसरी लहर से लड़ने में मदद कर रहा है।
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"देश भर में लाखों लोग संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में कई नागरिकों ने अधिक से अधिक लोगों की मदद के लिए कदम बढ़ाया है। भारत में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक महाराष्ट्र में, रोनी और जरीना स्क्रूवाला का स्वदेश फाउंडेशन टीकाकरण आदि के लिए 1,000 से अधिक गांवों में COVID-19-उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए रायगढ़ जिले के साथ काम कर रहा है।"

कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत को बुरी तरह प्रभावित किया है। देश में 190,000 से अधिक मौतों के साथ कुल मामलों की संख्या 16.6 मिलियन से अधिक है। दवाओं, अस्पताल के बेड और ऑक्सीजन की भारी कमी है।

देश भर में लाखों लोग संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में कई नागरिकों ने अधिक से अधिक लोगों की मदद के लिए कदम बढ़ाया है। भारत में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक महाराष्ट्र में, रोनी और जरीना स्क्रूवाला का स्वदेश फाउंडेशन टीकाकरण आदि के लिए 1,000 से अधिक गांवों में COVID-19-उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए रायगढ़ जिले के साथ काम कर रहा है।

भारतीय उद्यमी ने ट्वीट करते हुए बताया कि स्वदेश ने पहले ही रायगढ़ जिले में ग्रोसरी की 17,245 किट वितरित की हैं और मुंबई, महाराष्ट्र में श्रमिकों, डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को 57,503 से अधिक फूड सर्व किया है।

फाउंडेशन ने प्रवासी श्रमिकों को 3.3 लाख से अधिक भोजन वितरित किया है। इसने मेडिकल किट भी वितरित की हैं जिसमें 2.7 लाख डबल मास्क, 10,000 एन 95 मास्क, 9 वेंटिलेटर, 5,400 पीपीई किट, 200 थर्मल स्कैनर, 14 ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स, 150 डिजिटल बीपी उपकरण, 200 पल्स ऑक्सीमीटर, दो मॉनिटर और 100 से अधिक स्टेथोस्कोप शामिल हैं।

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में रोनी सबसे प्रसिद्ध चेहरों में से एक है। वह एक सीरियल उद्यमी हैं और उन्होंने 1990 में यूटीवी समूह की स्थापना की और इसे बड़े मीडिया समूह में विकसित किया। बाद में, वे एक प्राइवेट इक्विटी निवेशक बन गए और यूनिलैजर वेंचर्स को लॉन्च किया, जो प्रारंभिक चरण के निवेश के साथ मुख्य रूप से भारतीय स्टार्टअप में निवेश करता है।

वह एडटेक स्टार्टअप अपग्रेड के सह-संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं, और एनजीओ स्वदेश फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। पिछले साल, महामारी की पहली लहर के बीच, स्वदेश फाउंडेशन ने भी लड़ाई में शामिल होने के लिए कदम बढ़ाया था।

YourStory के साथ बातचीत में रॉनी ने कहा था,

“एक छोटे स्तर पर, स्वदेश फाउंडेशन, जो पांच वर्षों से रिवर्स माइग्रेशन पर काम कर रहा है, उसके पास 95,000 से अधिक प्रवासियों को संभालने की जिम्मेदारी थी। यह बड़े पैमाने पर और बहुत बड़ी समस्या थी वो भी एक ऐसी समस्या जो सही कारणों से शुरू नहीं हुई थी। इसका मतलब था कि हमें उनके गृहनगर में जीवन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने की जरूरत पड़ी। चाहे वह नौकरियों का सृजन करना हो, अच्छी शिक्षा सुविधाओं और नौकरियों को सुनिश्चित करना हो।”

Edited by Ranjana Tripathi

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