सेलाइन गार्गल RT-PCR पद्धति विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से कोविड-19 जांच के लिए लागू की जानी चाहिए: नितिन गडकरी

सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल सेलाइन गार्गल RT-PCR तकनीक की जानकारी MSME मंत्रालय को हस्तांतरित। सेलाइन गार्गल RT-PCR इनोवेशन का व्यापक पैमाने पर उत्पादन करने के लिए सभी पात्र पार्टियों को लाइसेंस दिया जा सकता है: CSIR-NEERI
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कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के तहत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरणगत इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) ने स्वदेशी रूप से विकसित सेलाइन गार्गल (नमक घोल के गरारे) RT-PCR तकनीक जिसका उपयोग कोविड-19 नमूनों के परीक्षण के लिए उपयोग किया जाता है, की जानकारी हस्तांतरित कर दी है।

सेलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर प्रौद्योगिकी सरल, त्वरित, सस्ती, रोगी के अनुकूल और आरामदायक है; यह त्वरित जांच परिणाम भी उपलब्ध कराती है और न्यूनतम बुनियादी ढांचा आवश्यकताओं को देखते हुए ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए सर्वथा उपयुक्त है।

CSIR-NEERI ने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित इनोवेशन समाज की सेवा के लिए 'राष्ट्र को समर्पित' किया गया है। इस जानकारी को गैर-विशिष्ट आधार पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) को हस्तांतरित कर दिया गया है। यह इनोवेशन निजी, सरकारी और विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं और विभागों सहित सभी सक्षम पार्टियों को वाणिज्यीकरण करने और लाइसेंस प्राप्त करने में समर्थ बनाएगा।

स्वदेशी रूप से विकसित सेलाइन गार्गल (नमक घोल के गरारे) RT-PCR तकनीक जिसका उपयोग कोविड-19 नमूनों के परीक्षण के लिए उपयोग किया जाता है। (फोटो साभार: PIB)

लाइसेंसधारकों से आसानी से प्रयोग करने योग्य कॉम्पैक्ट किट के रूप में व्यावसायिक उत्पादन के लिए विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने की अपेक्षा की जाती है। महामारी की व्याप्त स्थिति तथा कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए CSIR-NEERI ने देश भर में इसके व्यापक प्रसार के लिए संभावित लाइसेंसधारियों को जानकारी हस्तांतरण करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में 11 सितंबर, 2021 को मानक प्रचालन प्रक्रिया और सेलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर प्रौद्योगिकी का औपचारिक हस्तांतरण किया गया।

इस अवसर पर, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा: “सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर पद्धति को पूरे देश में, खासकर संसाधन की दृष्टि से निम्न ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कार्यान्वित करने की आवश्यकता है। इसका परिणाम त्वरित और अधिक नागरिक-अनुकूल जांच के रूप में आएगा तथा महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को और सुदृढ़ करेगा। एमएसएमई इकाई ने CSIR-NEERI द्वारा विकसित सेलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए CSIR-NEERI से संपर्क किया था।“

सेलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर प्रौद्योगिकी के प्रमुख आविष्कारक NEERI के वैज्ञानिक डॉ कृष्ण खैरनार और CSIR-NEERI , नागपुर में पर्यावरण विषाणु विज्ञान के रिसर्च स्कॉलर की टीम है।

एमएसएमई इकाई को जानकारी के हस्तांतरण के दौरान CSIR-NEERI (सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर का नवोन्मेषक) के वैज्ञानिक और ईवीसी के प्रमुख डॉ कृष्णा खैरनार, CSIR-NEERI के निदेशक डॉ. वरी चंद्रशेखर,CSIR-NEERI के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अध्यक्ष डॉ अतुल वैद्य, एमएसएमई इकाई के निदेशक राजेश डागा और एमएसएमई इकाई के निदेशक कमलेश डागा भी उपस्थित थे।


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