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फैशन डिजाइनिंग छोड़कर शुरू की समाज सेवा, अनाथ बच्चों की करती हैं देखभाल

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15th Apr 2019
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अनाथ बच्चों का घर

हमारे समाज में लाख बुराईयां हैं, लेकिन कुछ अच्छाईयां भी हैं, जिनके बारे में सुनकर दिल खुश हो जाता है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम की रहने वाली मधु तुग्नैत की कहानी कुछ ऐसी है जो आपका इंसानियत में भरोसा और मजबूत कर देगी। 60 वर्षीय मधु को उस वक्त दुख पहुंचा था जब उन्होंने देखा कि अनाथालायों में विकलांग बच्चों को बदतर स्थिति में जिंदगी बितानी पड़ रही है। उन्होंने ऐसे बच्चों को गोद लेकर उन्हें एक नई जिंदगी देने की शुरुआत की।


मधु ने एक एनजीओ की शुरुआत की जिसका नाम रखा इचा फाउंडेशन। यह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित है। मधु बताती हैं, 'जब मैं अनाथालयों में बच्चों की दयनीय हालत में देखती थी तो मुझे दुख होता था। विकलांग होने की वजह से उनकी अच्छी देखभाल नहीं हो पाती थी। उस वक्त मुझे लगा कि मुझे जिंदगी का एक बड़ा मिशन मिल गया है। उसके बाद से मैं इन बच्चों की जिंदगी आसान करने के हरसंभव प्रयास कर रही हूं।'


एनजीओ शुरू करने के लिए मधु ने अपनी संपत्ति बेच दी और कोंडाकर्ला अवा लेक के पास एक जमीन खरीदकर उसे अनाथालय में परिवर्तित कर दिया। इस मिशन को शुरू करना आसान काम नहीं था और इसमें उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने अपने फाउंडेशन को एक ट्रस्ट के तौर पर विशाखापत्तनम में ही रजिस्टर्ड करवा लिया। 2010 में उन्होंने तीन बच्चों के साथ इसकी शुरूआत की। उस वक्त वे बच्चे गंभीर विकलांगता से पीड़ित थे।


मधु (बाएं)


योरस्टोरी से बात करते हुए मधु कहती हैं, 'जब मैं सरकारी कार्यालय में अपने ट्रस्ट को रजिस्टर करवाने गईं तो वहां उन्हें अधिकारियों ने ऐसे और बच्चों के बारे में बताया जो सुविधाओं के आभाव में बदतर जिंदगी जीने के लिए मजबूर थे।' मधु उन बच्चों को भी अपने एनजीओ में लेकर आईं। इस वक्त मधु के फाउंडेशन में 20 बच्चे रहते हैं जिनकी देखभाल के लिए एक फीजियोथेरेपिस्ट एक टीचर और कई स्टाफ के सदस्य रहते हैं। फाउंडेशन के पास 30 बच्चों की देखभाल करने की क्षमता है। इन बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके खाने-पीने, रहने और दवाइयों का पूरा प्रबंध किया जाता है।


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