गर्मियों की छुट्टी में बच्चों को घुमाने के लिए कुछ खास जगहें

By जय प्रकाश जय
May 07, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
 गर्मियों की छुट्टी में बच्चों को घुमाने के लिए कुछ खास जगहें
'सैर कर दुनिया की ग़ालिब जिन्दगानी फिर कहां! जिन्दगानी ग़र रही तो, नौजवानी फिर कहां!' गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के साथ देश दुनिया घूमने का मजा ही कुछ और होता है, तब बार बार ग़ालिब का ये सेर बड़े काम का लगता है। तो देर किस बात की, बच्चों के साथ घूमने के लिए हो जाइए तैयार, ये हैं कुछ खास टूरिस्ट ड
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सांकेतिक तस्वीर, साभार: Shutterstock


स्कूली बच्चों के रिजल्ट भी आ गए हैं, गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं तो लोगों के मन घुमक्कड़ी की तरकीबें, अटकलें भी घर कर चुकी हैं। पर्यटन स्थल गिने-चुने होते हैं और घूमने वालों की संख्या हजारों, लाखों में। फिर टूर का मजा वही ले पाते हैं जो योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन प्लान कर लेते हैं। हम आपको इस बार अलग तरीके से छुट्टियां बिताने के कुछ टिप्स दे रहे हैं।0 इससे बच्चों को रोमांच के साथ उनकी अनुभव संपन्नता भी होगी क्योंकि ऐसे वक़्त में बच्चे खेल-खेल में बहुत कुछ सीख लेते हैं। वे भारतीय संस्कृति की विविधता से सुपरिचित हो पाते हैं।


बच्चों को टूर पर ले जाना हो तो उनके अभिभावकों को इस महत्वपूर्ण मकसद का जरूर ध्यान रखना चाहिए। मसलन, अम्यूजमेंट पार्क, म्यूजियम और वाइल्डलाइफ एडवेंचर पर बच्चे खुशी से झूम उठते हैं। बच्चों के झूला झूलने, फव्वारों से होकर गुजरने, उछल-कूद करने लिए एक बेहत ऑब्शन होते हैं थीम पार्क। इसके लिए सबसे बेहतर जगह है हॉन्गकॉन्ग। वहां पर अम्यूजमेंट पार्क से लेकर नेचर पार्क तक कुल पांच थीम पार्क हैं।


उल्लेखनीय है कि समर हॉलिडे का टाइम टूरिज्म इंडस्ट्री का पीक टाइम होता है। गर्मियों के समय में लोग पहाड़ों की तरफ सबसे ज्यादा घूमने जाते हैं। हमारे देश में गर्मियों की छुट्टी में घूमने के लिए कश्मीर भी एक खूबसूरत इलाका है। गुलमर्ग, सोनमर्ग और शिकारा राइड यहां के फेमस टूरिस्ट स्पॉट हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा वैली में पालमपुर हिल स्टेशन है। यह अपनी हरियाली, पहाड़ों और अच्छे नजारों के लिए फेमस है। यह चाय के बागान, जंगल और धौलाधार रेंज के लिए फेमस हैं। इस पैकेज में होटल, खाने-पीने और लोकल ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल है। अगर आप बच्चों के साथ शोर शराबे से दूर वक्त बिताना चाहते हैं तो पालमपुर अच्छी जगह है।

सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पार्वती वैली है। यह जगह एडवेंचर ढूंढने वालों के लिए बेस्ट ऑप्शन है। यहां गर्मियों में कैंप भी लगते हैं, जहां आप परिवार के साथ रह सकते हैं। इस पैकेज में होटल, खाने-पीने और लोकल ट्रांसपोर्ट का खर्च शामिल है। इसी तरह उत्तराखंड के चमोली जिले में औली है। हिमालय के पहाड़ों के बीच बसा औली भी देहरादून से 270 किलोमीटर है। यहां बस के जरिए पहुंचा जा सकता है। औली उत्तराखंड का एडवेंचर टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है। यहां प्रोफेशनल स्कीइंग होती है। इसी तरह ओडिशा के गंजम जिले में गोपालपुर है। यह बंगाल की घाटी के पास है। ये ओडिशा का फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। यहां ट्रेन और फ्लाइट दोनों से पहुंचा जा सकता है।


बच्चों के साथ यदि टूर पर यूरोप और अमेरिका निकलना हो तो पहले से ही सेगवे और साइकिल टुअर बुक कर लें। ये क्लासरूम से निकलकर असली दुनिया को जानने का मौका देते हैं। इसके लिए बर्लिन, टोक्यो, लंदन और बार्सिलोना के बारे में सोचा जा सकता है। यदि बच्चे में आर्टिस्ट होने की ललक हो तो पेरिस, बार्सिलोना और न्यूजीलैंड की आर्ट गैलरियां उन्हे खूब रिझा सकती हैं। इसी तरह तंजानिया में सेरेंगेटी नेशनल पार्क और दक्षिण अफ्रीका में मलामला गेम रिजर्व, क्रुगर नेशनल पार्क और लेपर्ड हिल्स जैसे पार्क बच्चों को रोमांच से भर देते हैं। गर्मियों में घूमने के लिए हमारे देश में जाल्दापारा नेशनल पार्क पश्चिम बंगाल में है। इस नेशनल पार्क में हाथी, गैंडे, रॉयल बंगाल टाइगर, हिरण, जंगली सुअर और पक्षियों के लिए फेमस है।


यह भी गौरतलब है कि आम तौर पर छुट्टियों पर जाने के दो तरीके खास होते हैं। पहला, ये कि किसी टूर कंपनी का पैकेज ले लिया जाए, दूसरा, स्वयं की प्लानिंग से सारा काम आसानी से कर पैसे बचा लिया जाए। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, घरेलू यात्रियों की संख्या में साल दर साल करीब बीस प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। टूर के लिए अगर खुद कोई योजना बनानी हो तो इस पर रिसर्च से लेकर बुकिंग तक खुद सब कुछ करना पड़ता है। इसमें अगर कोई एक्टिविटी नहीं करना चाहें तो पैकेज में उसके लिए भी चार्ज शामिल होता है। खुद योजना बनाकर यह पैसा बचाया जा सकता है। यह ध्यान देना भी जरूरी है कि कई बार ग्रुप की बुकिंग से ग्राहकों को कई फायदे होते हैं। इस हिसाब से पैकेज वाले टूर में पैसे की बचत हो जाती है। इसमें प्लानिंग से लेकर ठहरने की व्यवस्था तक और टिकट बुकिंग से लेकर शहर में घूमने के विकल्प चुनने तक हर तरह की परेशानी से बचने का मौका मिल जाता है।


एक बात और। मई-जून में घूमने के लिहाज से लदाख भी एक खूबसूरत क्षेत्र है लेकिन यह सबसे महंगा भी है। यहां पहुंचने का सबसे आसन तरीका कश्मीर होकर जाना है। दिल्ली से श्रीनगर की फ्लाइट ली जा सकती है और उसके बाद लेह के लिए बस से जाया जा सकता है। दिक्कत यह है कि 434 किलोमीटर की यात्रा में बस दो दिन का समय ले लेती है। रात में बस करगिल में ठहरती है। अगर मनाली के रास्ते से जाना हो तो भी रात में केलोंग में रुकना पड़ता है। पूरी तरह रोड से जाने में 60 घंटे लग जाते हैं। अगर पांच दिन का ट्रिप प्लान करें तो इस समय को भी यात्रा के ट्रिप में जोड़ लेना चाहिए। यात्रा में तीन रात लेह में ठहरा जा सकता है। एक रात पैंगोंग और एक रात नुब्रा घाटी में रुकने की योजना बनाई जा सकती है। यहां साईट घूमने में बहुत अधिक खर्च नहीं करना पड़ता है।


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