सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश के क्या हैं फायदे, कैसे और कितना लगा सकते हैं पैसा?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड गवर्मेंट सिक्योरिटीज हैं, जिन्हें केंद्रीय बैंक RBI, सरकार की ओर से जारी करता है. ये निवासी व्यक्तियों, HUF, ट्रस्ट्स, विश्वविद्यालयों और धर्मार्थ संस्थाओं को ही बेचे जा सकते हैं.
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond or SGB) स्कीम 2022-23 की पहली सीरीज के तहत बिक्री 20 जून से शुरू होने वाली है. इसके लिए इश्यू प्राइस 5,091 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, SGB स्कीम 2022-23 की पहली सीरीज खरीद के लिए 20 से 24 जून 2022 तक खुली रहेगी. ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से गोल्ड बॉन्ड के लिए आवेदन और भुगतान करने वाले निवेशकों के लिए इश्यू प्राइस 50 रुपये प्रति ग्राम कम होगा, यानी 5,041 रुपये प्रति ग्राम.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड गवर्मेंट सिक्योरिटीज हैं, जिन्हें केंद्रीय बैंक RBI, सरकार की ओर से जारी करता है. ये निवासी व्यक्तियों, अविभाजित हिंदू परिवार (HUF), ट्रस्ट्स, विश्वविद्यालयों और धर्मार्थ संस्थाओं को ही बेचे जा सकते हैं. आइए जानते हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कैसे निवेश किया जा सकता है और इसके फायदे क्या हैं...

कितना और कैसे कर सकते हैं निवेश

गोल्ड बॉन्ड सोने में निवेश का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है क्योंकि गोल्ड की जिस मात्रा के लिए निवेशक ने भुगतान किया है, वह पूरी तरह सुरक्षित रहती है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कम से कम एक ग्राम सोने के लिए निवेश करना होता है. कोई भी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार मैक्सिमम 4 किलोग्राम मूल्य तक का गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है. ट्रस्ट और समान संस्थाओं के लिए खरीद की मैक्सिमम लिमिट 20 किलोग्राम है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड (BSE) के माध्यम से की जाती है. याद रहे कि स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट्स बैंकों को गोल्ड बॉन्ड बेचने की इजाजत नहीं है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को जॉइंट में या फिर नाबालिग के नाम पर भी खरीद सकते हैं.

ब्याज का फायदा

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर हर साल 2.5 प्रतिशत का ब्याज मिलता है. यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत टैक्सेबल होता है. एक वित्त वर्ष में गोल्ड बॉन्ड पर हासिल ब्याज, करदाता की अन्य सोर्स से इनकम में काउंट होता है. इसलिए इस पर टैक्स इस बेसिस पर लगता है कि करदाता किस इनकम टैक्स स्लैब में आता है. हालांकि गोल्ड बॉन्ड से हासिल ब्याज पर TDS नहीं है.

लोन लेने की भी सुविधा

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल और लॉक इन पीरियड 5 साल है. इसका अर्थ हुआ कि गोल्ड बॉन्ड खरीदे जाने के 5 साल पूरे होने के बाद अगले ब्याज भुगतान की तिथि पर इसे प्रीमैच्योरली भुनाने की इजाजत दी जा सकती है. जरूरत पड़ने पर निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर लोन भी ले सकता है. इसके लिए गोल्ड बॉन्ड को गिरवीं रखना होगा. इसके अलावा गोल्ड बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडेबल होते हैं। हालांकि ऐसा इनके जारी होने के 15 दिन के अंदर हो सकेगा.

टैक्स में क्या बेनिफिट

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का 8 साल का मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद निवेशक को मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से दो तरीके से प्रीमैच्योरली एग्जिट कर सकते हैं. ऐसा करने पर बॉन्ड के रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स रेट लागू हैं..

1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का लॉक इन पीरियड पूरा होने के बाद और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से मिलने वाला रिटर्न, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में आता है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर, एडेड सेस और इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20 प्रतिशत है.

2. अगर गोल्ड बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं तो इन्हें आरबीआई द्वारा नोटिफाई की गई तारीख से शेयर बाजार में ट्रेड किया जा सकता है. अगर गोल्ड बॉन्ड को, खरीद की तारीख के 3 साल के अंदर बेचा जाता है तो प्राप्त होने वाला रिटर्न शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स में आता है. यह निवेशक की सालाना आय में जुड़ता है और फिर एप्लीकेबल टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है. अगर गोल्ड बॉन्ड को खरीद की तारीख से 3 साल पूरे होने के बाद बेचा जाता है तो प्राप्त रिटर्न, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में आता है.

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