स्टार्टअप्स से लेकर कोविड-19 राहत कार्य तक, कैसे हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं स्टैंडअप कॉमेडियन अपूर्व गुप्ता

YourStory के साथ बातचीत में, कॉमेडियन अपूर्व गुप्ता ने वित्तीय साक्षरता पर अपने शो, स्टार्टअप्स में एक निवेशक के रूप में उनकी भूमिका और कोविड-19 के दौरान उनके द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों के बारे में बात की।
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इंजीनियरिंग कर चुके स्टैंडअप कॉमेडियन अपूर्व गुप्ता उर्फ गुप्ताजी अब तक 1500 से ज्यादा शो कर चुके हैं।

नई दिल्ली के कॉमेडियन, जिनके ट्विटर पर लगभग 22,000 फॉलोअर्स हैं, ने 2013 में अपनी यात्रा शुरू की, जब उनका एक वीडियो वायरल हुआ। 2014 तक, उनका पहला सोलो शो - अप्पुरव्यू-लाफ (AppurVIew-Laugh) था। उन्हें 2015 के लिए फोर्ब्स इंडिया सेलिब्रिटी 100 नॉमिनी लिस्ट में सूचीबद्ध किया गया था।

आज, अपने सोलो शो के अलावा, वह स्टार्टअप्स में एक निवेशक है और उनका वित्त और वित्तीय साक्षरता पर एक शो है।

हालांकि, जब इस साल अप्रैल में COVID-19 की दूसरी लहर भारत में आई, तो उन्होंने राहत प्रयासों की दिशा में काम करना शुरू कर दिया।

YourStory के साथ बातचीत में, देश के सबसे सफल स्टैंड-अप कॉमेडियन में से एक, अपूर्व गुप्ता ने अपनी यात्रा के बारे में बात की कि कैसे वह स्टार्टअप्स की मदद कर रहे हैं, और कैसे COVID-19 के दौरान वह राहत कार्य में लगे रहे।

अपूर्व गुप्ता

इंटरव्यू से संपादित अंश:

YourStory (YS): आपने स्टार्टअप्स के साथ काम करना कैसे शुरू किया?

अपूर्व गुप्ता (AG): मैं 2015 से स्टार्टअप्स के साथ काम कर रहा हूं। मैं द स्टूपिड डिजाइन नामक एक एजेंसी चलाता था, जिसने स्टार्टअप्स के लिए वायरल इमेज कंटेंट बनाने में मदद की।

2019 में, मैं अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहता था और मैंने स्टार्टअप्स में निवेश करने के बारे में सोचना शुरू किया। मुझे निमो नाम की इस स्मार्ट ग्लास कंपनी के बारे में पता चला, मुझे यह कॉन्सेप्ट पसंद आया और मैंने इनमें निवेश किया। मैं सीरियल उद्यमियों के साथ-साथ कंपनी में एंजेल निवेशकों में से एक हूं। मैंने एक कंटेंट प्लस कॉमर्स प्लेटफॉर्म Hypd को भी सपोर्ट किया, जिसे Ex Innov8 और Zostel के संस्थापकों ने शुरू किया था।

मैं काफी शुरुआती चरण में निवेश करना पसंद करता हूं, जैसे जब संस्थापक कॉन्सेप्ट पर या प्रोडक्ट डेवलपमेंट के स्टेज में काम कर रहे हों तो।

फिलहाल मैं एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा हूं जो लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा। मुझे लगता है कि यह सभी के लिए काफी फायदेमंद होगा, खासकर उन लोगों के लिए जो अपने हुनर को सबके सामने पेश करने का आत्मविश्वास नहीं जुटा पाते।

YS: पैसे और फाइनेंस पर अपने शो के बारे में बताएं

AG: शो का नाम Funny Money With GuptaJi है। मुझे लगता है कि वित्तीय साक्षरता समय की जरूरत है। आज हम दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से हैं, और वित्तीय साक्षरता न होना मुश्किल साबित हो सकता है।

हम में से अधिकांश अभी भी अपनी बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट या वर्क पेचैक में रखना सुरक्षित समझते हैं और इमरजेंसी फंड के लिए बहुत कुछ नहीं रखते हैं। मुख्य समस्या यह है कि बहुत कम प्लेटफॉर्म हैं जो वित्तीय शर्तों को आसान और समझने योग्य भाषा में समझा सकते हैं। इसलिए मैं अपने फैन बेस का इस्तेमाल करके अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने और उन्हें इक्विटी, ऋण, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी के साथ-साथ स्टार्टअप-संबंधित कॉन्सेप्ट जैसी वित्तीय शब्दावली से अवगत कराने के विचार के साथ आया।

हमने मीम्स के रूप में कंटेंट बनाना शुरू कर दिया है क्योंकि मुझे लगता है कि मीम्स संदेश देने और दर्शकों से जुड़ने का सबसे अच्छा और तेज तरीका है।

मैं व्यक्तिगत रूप से संस्थापकों और स्टार्टअप्स के साथ काम करना पसंद करता हूं, और इसलिए मैंने शो के भीतर स्टार्टअप और संबंधित अवधारणाओं को जोड़ा है, जो मुझे लगता है कि सभी को नए स्टार्टअप के बारे में जागरूक करेगा और संस्थापकों को अधिक लोगों तक पहुंचने में मदद करेगा।

YS: आपने कोविड राहत कार्य कैसे शुरू किया?

AG: जब COVID की पहली लहर खत्म हुई तो मैं अपने शो में वापस आ गया था। लेकिन अप्रैल आते-आते मेरे शो एक के बाद एक कैंसिल होने लगे। तभी मुझे स्थिति की गंभीरता का अहसास हुआ।

अप्रैल के मध्य के आसपास, मुझे अपने एक मित्र का एक ट्वीट दिखा, जिसमें कहा गया था, 'इतने ज्यादा फॉलोअर्स होने का क्या मतलब है जब हम उनका सही दिशा में इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं? इसलिए मुझे बताएं कि क्या आपके पास कोई इमरजेंसी ट्वीट है और मैं इसे आगे बढ़ाने की कोशिश करूंगा।"

ये बात मेरे दिमाग में अटक गई। मुझे लगा कि मेरा फैन बेस अच्छा है, और अगर मैंने ऐसा ही किया, तो मैं मदद करने में सक्षम हो सकता हूं। इसलिए मैंने इस ट्वीट को कॉपी-पेस्ट किया और अचानक से मैसेज आने लगे।

मैं समझ गया था कि जमीनी स्तर पर स्थिति खराब है। इतने सारे मैसेज/ईमेल/कमेंट्स थे कि मेरे लिए उन सभी का जवाब देना और उन्हें विस्तार से पोस्ट करना असंभव था, वो भी सभी अपने आप से। और तब मुझे एहसास हुआ कि अगले कुछ दिनों के लिए, मुझे अपनी सारी ऊर्जा उन लोगों के लिए स्थिति को बेहतर बनाने की कोशिश करने पर केंद्रित करने की आवश्यकता है जो इस घातक वायरस से पीड़ित थे। मेरे दिमाग में बस एक ही बात थी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए मुझे जो करना है वह करना चाहिए।

YS: जागरूकता लाने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए आप अपने फॉलोअर्स और पहुंच का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं?

AG: बहुत सारे इमरजेंसी (एसओएस) मैसेजेस आने लगे और ये बात फैल गई कि जो लोग भी मदद कर सकते हैं वे जरूरतमंदों से संपर्क करें। अगले कुछ दिनों में, मैंने अपनी टीम की मदद से आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के बारे में सत्यापित जानकारी भी पोस्ट करना शुरू कर दिया। हम ऐसे लिंक भी साझा कर रहे थे जिन तक सीधे जरूरतमंद लोग पहुंच सकते थे।

एक बात जो मैंने महसूस की, वह यह थी कि हम में से अधिकांश कोविड के उपाय और उपचार के तरीके के बारे में डॉक्टरों को छोड़कर बाकी सभी की बात सुन रहे थे। इसलिए, मैंने डॉ जगदीश चतुर्वेदी और डॉ अविरल वत्स जैसे डॉक्टरों के साथ लाइव इंटरव्यू स्ट्रीमिंग करने की कोशिश की, और फिर इन इंटरव्यू से शॉर्ट वीडियो बनाए और जागरूकता पैदा करने के लिए इसे सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड किया।

YS: आपने किन मुख्य चुनौतियों का सामना किया और आपने उनसे कैसे पार पाया?

AG: मुख्य चुनौती सूचना की पुष्टि करना था। इंटरनेट पर हर सेकेंड में इतनी फर्जी सूचनाएं चल रही हैं कि इसकी पुष्टि करना मुश्किल है। कभी-कभी, जानकारी सही हो सकती है, लेकिन पोस्ट करने से पहले हमें इसकी पुष्टि करनी होगी। और जब तक हम डिटेल वैरीफाई करते हैं, सप्लाई खत्म हो जाती है, नंबर बंद हो जाते हैं, और फिर सचमुच इसे आगे प्रसारित करने की कोई जरूरत नहीं है।

इसके अलावा, बहुत सारे स्कैमर्स हैं जो इस घबड़ाहट का इस्तेमाल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोग कॉल रिसीव करते हैं, सप्लाई का दावा करते हैं, ऑर्डर लेते हैं, और यहां तक कि इसके लिए एडवांस पैसे भी लेते हैं, और बाद में वे कॉल उठाना बंद कर देते हैं।

हालांकि मैं अपने द्वारा पोस्ट किए गए संपर्कों को सत्यापित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करता हूं, कभी-कभी हमें प्राप्त होने वाले प्रश्नों की भारी संख्या के कारण विवरणों को ट्रैक करना असंभव होता है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस व्यक्ति को इसकी आवश्यकता है उसे भेजी जा रही जानकारी वास्तविक है। कोई एक सेकंड भी नहीं गंवा सकता - प्रत्येक जीवन अनमोल है।

YS: हम सभी को अपने द्वारा किए गए आधारभूत कार्य के बारे में बताएं और इसमें सहायता के लिए आपने टीम कैसे बनाई है?

AG: जैसे-जैसे प्रश्नों और ईमेल की संख्या बढ़ती गई, मुझे एहसास हुआ कि मैं इसे अकेले नहीं कर पाऊंगा। इसलिए, मैंने एक अलग ईमेल आईडी बनाई। इसके बाद, मैंने अपने प्रशंसकों और समान विचारधारा वाले लोगों से मदद मांगी, जो प्रति दिन कम से कम छह घंटे स्वयंसेवक के तौर पर खुद को समर्पित कर सकते थे। एक बार जब मुझे शामिल होने के इच्छुक लोगों से ईमेल प्राप्त हुए, तो मैंने अपनी टीम के सदस्यों में से एक की मदद ली और स्वयंसेवकों के साथ एक कॉल शेड्यूल किया और उन्हें दो टीमों में विभाजित किया - टीम ग्रीन और टीम ब्लू।

जब टीम ग्रीन ईमेल (24x7) का प्रबंधन कर रही थी, सोशल मीडिया संदेशों, फेसबुक और ट्विटर कमेंट्स, डीएम (डायरेक्ट मैसेजेस) आदि की जांच कर रही थी, टीम ब्लू के पास ऐसे स्वयंसेवक थे जिनके पास उनके अपने शहरों में अच्छे कनेक्शन थे और वे अपने शहरों के आसपास मदद खोज और पहुंचा सकते थे।

दूसरे, हमने एक टेलीग्राम ग्रुप बनाया, क्योंकि कई सारे लोग मदद करना चाहते थे, लेकिन रोज स्वयंसेवा के लिए समय नहीं दे सक थे। इस ग्रुप में, कोई भी अपने प्रश्नों को पोस्ट कर सकता है और जो कोई भी स्वतंत्र था और जिसके पास लीड थी, वह उनकी मदद कर सकता था।

जैसे ही मुझे इस टेलीग्राम ग्रुप से और स्वयंसेवक मिले, हमने एक और टीम बनाई - टीम रेड, जिसे दैनिक आधार पर प्राप्त जानकारी का सत्यापन करना था।

जहां तक जमीनी कार्य का संबंध है, हमारे पास ऐसे लोग थे जो विभिन्न शहरों में विभिन्न आपूर्ति में मदद कर रहे थे। ऐसी टीमें भी थीं जो कोविड रोगियों को भोजन उपलब्ध करा रही थीं और हमने उनका विवरण जरूरतमंदों के साथ साझा किया। लेकिन हमने कोई ऑन-ग्राउंड टीम नहीं बनाई क्योंकि हमें लगा कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की प्रक्रिया में, हम अपना मुख्य ध्यान खो सकते हैं जोकि - सत्यापित जानकारी प्रदान करके जीवन बचाना था।

YS: इस पर आपके साथ कौन काम कर रहा है?

AG: मेरी टीम में, हमारे पास छात्र, कामकाजी कर्मचारी, व्यवसायी, गृहिणी और मेरे कर्मचारी हैं। कई भारतीय नागरिक जो विदेशों में तैनात हैं, इस मुसीबत में समर्थन करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने हमारे साथ काम करना शुरू किया और इस तरह हम 24*7 हेल्पलाइन शुरू कर सके।

अभी के लिए, महत्वपूर्ण बात यह है कि सुरक्षित रहें और प्रोटोकॉल का पालन करें – मास्क पहनें और सामाजिक दूरी बनाए रखें।

अगर एक चीज है जो वर्तमान महामारी ने हमें सिखाई है, तो वह यह है कि आगे की योजना बनाने का कोई मतलब नहीं है। आप कभी नहीं जानते कि चीजें कब फिर से खराब हो जाएंगी।

हालांकि, मैं कुछ चीजों पर काम कर रहा हूं जैसे कॉमेडी स्पेशल, ए फाइनेंस शो, और ए पर्सनैलिटी डेवलपमेंट एंड कॉन्फिडेंस बूस्टिंग स्टार्टअप जिसे द कॉन्फिडेंटो कहा जाता है। निश्चित रूप से मेरे प्रशंसकों और दोस्तों को अगले कुछ महीनों में यह सब देखने को मिलेगा।

Edited by Ranjana Tripathi