स्टार्टअप्स रैंकिंग में बिहार क्यों साबित हुआ फिसड्डी, गुजरात क्यों रहा अव्वल?

योर स्टोरी ने स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग, 2021 के लिए गुजरात और बिहार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि दोनों राज्यों की रैंकिंग में जमीन और आसमान का अंतर होने की वजह क्या है.
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देशभर के राज्यों में स्टार्टअप्स के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने वाले राज्यों की जारी की गई स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग, 2021 की सूची में गुजरात इस बार भी शीर्ष पर रहा तो वहीं बिहार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा.

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि गुजरात साल 2020 की रैंकिंग की तरह दोबारा शीर्ष पर बने रहने में कैसे कामयाब रहा और पूरे देश को श्रम उपलब्ध कराने वाला बिहार इसमें खराब प्रदर्शन क्यों कर रहा है.

YourStory ने स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग, 2021 के लिए गुजरात और बिहार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि दोनों राज्यों की रैंकिंग में जमीन और आसमान का अंतर होने की वजह क्या है.

स्टार्टअप के लिए 7 मुख्य पैमानों में गुजरात और बिहार में अंतर:

स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग, 2021 की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी विभागों के सपोर्ट के मामले में गुजरात को 94 परसेंटाइल स्कोर मिला है जबकि बिहार को 19 परसेंटाइल स्कोर मिला है.

गुजरात के 94 परसेंटाइल स्कोर का मतलब है कि वह इस रैंकिंग में भाग लेने वाले राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों से 94 फीसदी अधिक स्कोर हासिल किया.

वहीं, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के मामले में गुजरात को जहां 87 तो बिहार को 2 परसेंटाइल स्कोर मिला है.

बाजार तक पहुंच, स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सपोर्ट यानि सरकारी सहायता मुहैया कराने और फंडिंग सपोर्ट के मामले में जहां बिहार को शून्य परसेंटाइल स्कोर मिला है तो वहीं, गुजरात को क्रमश: 100, 88 और 90 परसेंटाइल स्कोर मिला है.

हालांकि, मेंटरशिप प्रोग्राम के मामले में बिहार और गुजरात दोनों को ही शून्य परसेंटाइल स्कोर मिला है. स्टार्टअप्स शुरू करने वालों के क्षमता निर्माण के मामले में भी गुजरात को 100 तो बिहार को 20 परसेंटाइल स्कोर मिला है.

गुजरात ने स्टार्टअप्स को 200 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता मुहैया कराई जबकि बिहार ने केवल 50 करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया.

गुजरात में 8000 से अधिक स्टार्टअप्स ने रजिस्ट्रेशन कराया तो वहीं बिहार में इसकी संख्या केवल 180 से अधिक है. गुजरात में 180 से अधिक इनक्यूबेटर्स या इनोवेशन सेंटर्स बने जबकि बिहार में यह संख्या 80 से अधिक है.

बिहार:

बिहार ने राज्य में बेहद ही उचित मूल्य पर औद्योगिक श्रम उपलब्ध होने के कारण उसे इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श राज्य बताया है.

स्टार्टअप्स के लिए बिहार ने उद्यमी बिहार योजना शुरू की है जिसके तहत 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है.

वित्त वर्ष में 2021-22 में 16 हजार लोगों को इसका लाभ मिला. इसके तहत 4000 MSMEs ने उत्पादन शुरू किया और 20 हजार युवाओं को रोजगार मिला. इसके साथ ही बिहार सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए समृद्ध बिहार अभियान भी चलाया है.

बिहार में स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक वन-स्टॉप पोर्टल की स्थापना की है और स्व-प्रमाणन को प्रोत्साहित कर रहा है. स्कूलों, विश्वविद्यालयों, स्किल ट्रेनिंग और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम/कार्यक्रम में एंटरप्रेन्योरशिप मॉड्यूल्स शामिल किया है.

वहीं, महिला नवउद्यमियों को प्रमोट करने के लिए बिहार सरकार ने ‘बिहार मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ की शुरुआत की है. इस योजना के तहत महिला नवउद्यमियों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है. इसके लिए 400 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.

गुजरात:

स्टार्टअप्स की सहायता के लिए गुजरात में गुजरात इंस्डस्ट्रीयल पॉलिसी-2020, स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के साथ ही सभी विश्वविद्यालयों में इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटक्स स्थापित करने के लिए हाल ही में SSIP 2.0 लॉन्च किया गया है.

गुजरात में, 325 से अधिक मेंटर्स रजिस्टर्ड हुए हैं, 490 से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं और 170 से अधिक ग्रासरूट्स स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं.

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